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ताउते से 80 प्रतिशत नाशपाती की खेती बर्बाद
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मुहम्मदाबाद। ताउते तूफान की वजह से दो दिनों तक हुई बारिश के चलते क्षेत्र में होने वाली नाशपाती की खेती पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। इससे नाशपाती उत्पादक किसानों को काफी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है।
विकासखंड के विशुनपुरा उर्फ रघुवरगंज, मानिकपुर, सिलाइच, परसा, टड़वा, बरेजपुर गांवों के लगभग पांच सौ एकड़ क्षेत्रफल में गर्मी के मौसम में किसान कैश क्राप के रुप में नाशपाती की खेती करके अच्छी आमदनी कर लेते हैं। इस वर्ष जैसे ही नाशपाती की फसल निकलनी शुरु हुई, बेमौसम बारिश से लगभग 80 प्रतिशत नाशपाती की खेती पूरी तरह नष्ट हो गई और किसान तबाह हो गए। क्षेत्र के रघुवरगंज चट्टी पर प्रति दिन सुबह नाशपाती की थोक मंडी लगती है जिसमें काफी दूर-दूर के जिलों के व्यापारी नाशपाती खरीदकर ले जाते हैं। बारिश की वजह से खेतों में जो फल तैयार थी वह फट गई है और खेतों में ही सड़ रही है। किसान रमेश कुशवाहा ने बताया कि गर्मी के मौसम में जब अन्य जगह खेत खाली रहते हैं इस क्षेत्र के किसान नाशपाती की खेती एक अतिरिक्त फसल के रुप में करके काफी मुनाफा कमाते हैं। लेकिन बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। प्रेमचंद कुशवाहा ने बताया कि 15 जून के बाद बारिश होने पर नाशपाती के खेत में दूसरी फसल की खेती शुरु हो जाती है। इससे एक अतिरिक्त आमदनी होती है। मूलचंद कुशवाहा कहते हैं कि बारिश में खेतों में पानी लग जाने से इसके फल खराब हो गए। किसी तरह तोड़कर 400 से 500 रुपये क्विंटल नुकसान पर इन्हें बेचना पड़ा। राजेश शर्मा ने कहा कि तूफान ने नाशपाती उत्पादक किसानों को काफी नुकसान पहुंचाया।
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विकासखंड के विशुनपुरा उर्फ रघुवरगंज, मानिकपुर, सिलाइच, परसा, टड़वा, बरेजपुर गांवों के लगभग पांच सौ एकड़ क्षेत्रफल में गर्मी के मौसम में किसान कैश क्राप के रुप में नाशपाती की खेती करके अच्छी आमदनी कर लेते हैं। इस वर्ष जैसे ही नाशपाती की फसल निकलनी शुरु हुई, बेमौसम बारिश से लगभग 80 प्रतिशत नाशपाती की खेती पूरी तरह नष्ट हो गई और किसान तबाह हो गए। क्षेत्र के रघुवरगंज चट्टी पर प्रति दिन सुबह नाशपाती की थोक मंडी लगती है जिसमें काफी दूर-दूर के जिलों के व्यापारी नाशपाती खरीदकर ले जाते हैं। बारिश की वजह से खेतों में जो फल तैयार थी वह फट गई है और खेतों में ही सड़ रही है। किसान रमेश कुशवाहा ने बताया कि गर्मी के मौसम में जब अन्य जगह खेत खाली रहते हैं इस क्षेत्र के किसान नाशपाती की खेती एक अतिरिक्त फसल के रुप में करके काफी मुनाफा कमाते हैं। लेकिन बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। प्रेमचंद कुशवाहा ने बताया कि 15 जून के बाद बारिश होने पर नाशपाती के खेत में दूसरी फसल की खेती शुरु हो जाती है। इससे एक अतिरिक्त आमदनी होती है। मूलचंद कुशवाहा कहते हैं कि बारिश में खेतों में पानी लग जाने से इसके फल खराब हो गए। किसी तरह तोड़कर 400 से 500 रुपये क्विंटल नुकसान पर इन्हें बेचना पड़ा। राजेश शर्मा ने कहा कि तूफान ने नाशपाती उत्पादक किसानों को काफी नुकसान पहुंचाया।
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