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स्वस्थ रहने का उत्तम तरीका है सूर्य नमस्कार
अमर उजाला ब्यूरो/ गाजीपुर
Updated Thu, 08 Jun 2017 10:53 PM IST
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योगाभ्यास करते युवक।
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व योगाचार्यों की ओर से योग की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। योग की कक्षा में योगाभ्यास के दौरान सूर्य नमस्कार उर्ध्वहस्तासन के लाभ की जानकारी दी गई। योगाचार्य अमित पांडेय ने बताया कि सूर्य नमस्कार का शाब्दिक अर्थ सूर्य को अर्पण या नमस्कार करना है। यह योग शरीर को सही आकार देने और मन को शांत एवं स्वस्थ रखने का उत्तम तरीका है।
सूर्य उर्ध्वहस्तासन नमस्कार के 12 शक्तिशाली योग आसनों का एक समन्वय है, जो एक उत्तम कार्डियो-वैस्क्युलर व्यायाम भी है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। सूर्य नमस्कार मन और शरीर दोनों को तंदुरुस्त रखता है। योगाचार्य ने बताया कि कम समय में चुस्त दुरुस्त रहने के लिए सूर्य नमस्कार उर्ध्वहस्तासन उसका सबसे अच्छा विकल्प है।
सूर्य नमस्कार सुबह खाली पेट से करने पर उचित होता है। प्रत्येक सूर्य नमस्कार के चरण में 12 आसनों के दो क्रम होते हैं। 12 योग आसन सूर्य नमस्कार का एक क्रम पूर्ण करते हैं। सूर्य नमस्कार उधर्वहस्तासन के 12 तरीके में प्रणाम आसन, हस्त उत्तानासन, हस्तपाद आसन, अश्व संचालन आसन, दंडासन, अष्टांग नमस्कार, भुजंग आसन, पर्वत आसन, अश्वसंचालन आसन, हस्तपाद आसन, हस्तउत्थान आसन, ताड़ासन शामिल है। इस आसन से मनुष्य चुस्त और दुरूस्त रहता है।
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सूर्य नमस्कार उर्ध्वहस्तासन करने से हड्डियों को सूर्य की किरणों से विटामिन-डी भी मिलता है। इससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। शरीर को ऊर्जा देने के साथ आंखों की रोशनी ठीक रहती है। संपूर्ण शरीर लचीला बनता है। वजन कम करने में सहायक है। बालों का झड़ना और सफेद होना कम होता है। शरीर की सभी प्रणालियां जैसे पाचन, श्वसन, प्रजनन, तंत्रिका और अन्त:स्त्रावी ग्रंथी को संतुलित किया जाता है। मस्तिष्क को प्राणयुक्त रक्त का प्रवाह प्रदान करता है। प्रसूति के 40 दिन बाद पेट को कम करने के लिए सूर्य नमस्कार उपयोगी है। मानसिक शांति और धैर्य प्रदान करता है।
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सूर्य उर्ध्वहस्तासन नमस्कार के 12 शक्तिशाली योग आसनों का एक समन्वय है, जो एक उत्तम कार्डियो-वैस्क्युलर व्यायाम भी है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। सूर्य नमस्कार मन और शरीर दोनों को तंदुरुस्त रखता है। योगाचार्य ने बताया कि कम समय में चुस्त दुरुस्त रहने के लिए सूर्य नमस्कार उर्ध्वहस्तासन उसका सबसे अच्छा विकल्प है।
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सूर्य नमस्कार सुबह खाली पेट से करने पर उचित होता है। प्रत्येक सूर्य नमस्कार के चरण में 12 आसनों के दो क्रम होते हैं। 12 योग आसन सूर्य नमस्कार का एक क्रम पूर्ण करते हैं। सूर्य नमस्कार उधर्वहस्तासन के 12 तरीके में प्रणाम आसन, हस्त उत्तानासन, हस्तपाद आसन, अश्व संचालन आसन, दंडासन, अष्टांग नमस्कार, भुजंग आसन, पर्वत आसन, अश्वसंचालन आसन, हस्तपाद आसन, हस्तउत्थान आसन, ताड़ासन शामिल है। इस आसन से मनुष्य चुस्त और दुरूस्त रहता है।
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सूर्य नमस्कार उर्ध्वहस्तासन करने से हड्डियों को सूर्य की किरणों से विटामिन-डी भी मिलता है। इससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। शरीर को ऊर्जा देने के साथ आंखों की रोशनी ठीक रहती है। संपूर्ण शरीर लचीला बनता है। वजन कम करने में सहायक है। बालों का झड़ना और सफेद होना कम होता है। शरीर की सभी प्रणालियां जैसे पाचन, श्वसन, प्रजनन, तंत्रिका और अन्त:स्त्रावी ग्रंथी को संतुलित किया जाता है। मस्तिष्क को प्राणयुक्त रक्त का प्रवाह प्रदान करता है। प्रसूति के 40 दिन बाद पेट को कम करने के लिए सूर्य नमस्कार उपयोगी है। मानसिक शांति और धैर्य प्रदान करता है।