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सोनबरसा के महफूज के मामले की खुद जांच करेंगे एसपी

Sat, 27 Nov 2021 11:06 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 11:06 PM IST
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SP will himself investigate the case of Sonbarsa's Mehfooz
कोतवाली थाना क्षेत्र के सोनबरसा गांव से तीन माह पूर्व झूठा पता लिखाकर डेढ़ लाख रुपए का लोहे का गार्डर और लकड़ी का पटरा ट्रैक्टर ट्राली से ले जाने वाले की जांच पुलिस अधीक्षक रामबदन सिंह अब खुद करेंगे। शनिवार को थाना समाधान दिवस पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक को पीड़ित ने थानाध्यक्ष को दी गई तहरीर को दिखाते हुए कारवाई किए जाने की मांग किया।
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मालूम हो कि कोतवाली थाना क्षेत्र के सोनबरसा गांव निवासी महफूज अहमद की बिल्डिंग निर्माण से संबंधित सामग्री की दुकान है। इनकी दुकान पर बिल्डिंग की सेंट्रिंग के लिए लकड़ी की बल्लियां, पटरा और लोहे के लंबे-लंबे गार्डर किराए पर दिए जाते हैं। 30 अगस्त को ट्रैक्टर ट्राली के साथ दो लोग दुकान पर आए और कासिमाबाद विकासखंड के फतेहपुर गांव का पता नोट कराकर 500 लकड़ी के पटरा और 30 पीस 17 फीट लंबे लोहे का गार्डर लेकर चले गए। सेंट्रिंग में एक माह तक पटरा और गार्डर लगे रहते हैं। इसलिए महफूज ने एक माह बाद फतेहपुर गांव में बताए गए पते पर पता किया तो पता चला कि इस गांव में किसी का पटरा और गार्डर नहीं आया है। इसके बाद महफूज ने थानाध्यक्ष कासिमाबाद से मिलकर तहरीर देकर कार्रवाई की मांग किया। पीड़ित की मानें तो थानाध्यक्ष ने दिए गए मोबाइल नंबर के आधार पर पटरा और गार्डर ले जाने वाले का मोबाइल नंबर से उसका लोकेशन पता कर लिया था। लोकेशन पता चल जाने के बाद थानाध्यक्ष ने एक-दो बार पता लगा रहा हूं कि बात कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। लगभग 15 से 20 दिन तक इस मामले को टरकाते रहे। शनिवार को पुलिस अधीक्षक थाना समाधान दिवस होने के कारण थाने पर मौजूद थे और लोगों की समस्याओं को सुनकर निदान कर रहे थे। इसी बीच महफूज अहमद ने भी पूर्व में थानाध्यक्ष को दी गई तहरीर को पुलिस अधीक्षक को देते हुए मामले से अवगत कराया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्ष पन्नेलाल से इस मामले में पूछा तो थानाध्यक्ष ने महफूज की शिकायत को झूठा करार दे दिया। इस मामले को दबाने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने तहरीर को खुद लेते हुए इसे स्वयं देखने की बात कही। पुलिस अधीक्षक ने आरोपी के दिए गए मोबाइल नंबर को नोट किया और कहा कि इसके आधार पर वह शीघ्र पकड़ लिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक के द्वारा इस तरह के निर्णय से पीड़ित को विश्वास हो गया कि अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। पुलिस अधीक्षक ने समाधान दिवस पर आधा दर्जन शिकायतों को सुना और तत्काल इसे निस्तारित कराने का प्रयास किया। पुलिस अधीक्षक द्वारा जनता से सीधी बात करना और उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेना और त्वरित कार्रवाई करना चर्चा का विषय बना रहा।
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