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पुत्र की दीर्घायु के लिए रखा उपवास
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 24 Sep 2016 01:27 AM IST
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पुत्र की दीर्घायु के लिए रखा उपवास
पुत्र के दीर्घायु की कामना के लिए महिलाओं ने शुक्रवार को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। नदी और सरोवरों के तटों पर निर्जला व्रत रह जीउतिया की कथा सुनी गई और श्रद्धा पूर्वक पूजा अर्चन की गई। गंगा के तट पर व्रती महिलाओं की भीड़ रही तथा जीउतवाहन की पूजा हुई।पुत्रों के सुख-संमृद्धि को लेकर मनाया जाने वाला यह पर्व महिलाओं के लिए बहुत खास है। जिसमें फलों के साथ धागे की माला अर्पित की जाती है और पूजा के बाद उसे प्रसाद स्वरूप बच्चों को गले में पहनाया जाता है।
मान्यता है कि इससे जीवित्पुत्रिका माता बच्चों की रक्षा कर उसे दीर्घायु प्रदान करती हैं। इसे लेकर रौजा, मिश्र बाजार, लाल दरवाजा, स्टेशन रोड, लंका, पीतनाथ, स्टीमर घाट, नखाश, गोराबाजार आदि जगहों पर बाजारों एवं गलियों में महिलाओं की भारी भीड़ रही। उधर गंगा और सरोवर के तटों पर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान सड़क की पटरियों पर खिलौना, धागे एवं माला आदि की दूकानों पर खरीदारों की भीड़ जुटी हुई थी।
गंगा तटों पर भी मेले जैसा माहौल था। गंगा तट पर सैकड़ों व्रती महिलाएं अपराह्न दो बजे के बाद से पहुंचने लगी थीं, यह सिलसिला सायंकाल तक जारी रहा। जीवित्पुत्रिका की पूजा माताओं ने नदी और सरोवरों के तट पर की।इस दौरान गंगा नदी के ददरीघाट, कलेक्टर घाट और स्टीमर घाट पर अंधऊ, बिकापुर, फूलनपुर और मिश्रवलिया आदि गांवों की माताओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की। ददरीघाट पर मेले जैसा माहौल रहा। नगर और आस-पास के ग्राम्यांचलों में जीवित्पुत्रिका का व्रत पूरी आस्था और विश्वास के साथ महिलाओं ने रखा। शाम को गाजे बाजे के साथ महिलाएं ददरीघाट पहुंची और पूजन-अर्चन कर पुत्र दीर्घायु होने और पुत्र प्राप्ति की कामना की ।
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मान्यता है कि इससे जीवित्पुत्रिका माता बच्चों की रक्षा कर उसे दीर्घायु प्रदान करती हैं। इसे लेकर रौजा, मिश्र बाजार, लाल दरवाजा, स्टेशन रोड, लंका, पीतनाथ, स्टीमर घाट, नखाश, गोराबाजार आदि जगहों पर बाजारों एवं गलियों में महिलाओं की भारी भीड़ रही। उधर गंगा और सरोवर के तटों पर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान सड़क की पटरियों पर खिलौना, धागे एवं माला आदि की दूकानों पर खरीदारों की भीड़ जुटी हुई थी।
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गंगा तटों पर भी मेले जैसा माहौल था। गंगा तट पर सैकड़ों व्रती महिलाएं अपराह्न दो बजे के बाद से पहुंचने लगी थीं, यह सिलसिला सायंकाल तक जारी रहा। जीवित्पुत्रिका की पूजा माताओं ने नदी और सरोवरों के तट पर की।इस दौरान गंगा नदी के ददरीघाट, कलेक्टर घाट और स्टीमर घाट पर अंधऊ, बिकापुर, फूलनपुर और मिश्रवलिया आदि गांवों की माताओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की। ददरीघाट पर मेले जैसा माहौल रहा। नगर और आस-पास के ग्राम्यांचलों में जीवित्पुत्रिका का व्रत पूरी आस्था और विश्वास के साथ महिलाओं ने रखा। शाम को गाजे बाजे के साथ महिलाएं ददरीघाट पहुंची और पूजन-अर्चन कर पुत्र दीर्घायु होने और पुत्र प्राप्ति की कामना की ।
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