{"_id":"63b71311bb476025fa111176","slug":"somewhere-the-post-of-cho-is-vacant-somewhere-there-is-no-electricity-or-water-ghazipur-news-vns6922158178","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: कहीं सीएचओ का पद खाली, कहीं बिजली न पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: कहीं सीएचओ का पद खाली, कहीं बिजली न पानी
विज्ञापन
जिले के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर उपचार और जांच की सुविधा मुहैया कराने के लिए 254 हेल्थ वेलनेस सेंटर स्वीकृत हैं। इसमें 203 सेंटर बनकर तैयार तो हो गए हैं, लेकिन इसमें 150 का ही संचालन हो पा रहा है। शेष 53 जगहों पर सीएचओ के पद जहां रिक्त हैं, वहीं बिजली और पानी की भी व्यवस्था नहीं हुई है। ऐसे में सरकार की मंशा पर पानी फिरता दिखाई पड़ रहा है।
रक्तचाप, मधुमेह, टीबी, मलेरिया, टायफाइड सहित अन्य बीमारियों की जांच के लिए ग्रामीण इलाकों के लोगों को निजी जांच केंद्रों और निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ता था। ऐसे में उन्हें आर्थिक दंश झेलना पड़ता था और बेहतर उपचार के अभाव में स्थिति गंभीर हो जाती थी। ऐसे में सरकार ने करीब पांच वर्ष पूर्व स्वास्थ्य उपकेंद्रों और पीएचसी को हेल्थ वेलनेस सेंटर में तब्दील करने की शुरूआत की।
इसके लिए जनपद में 254 सेंटर स्वीकृत किए गए, जिससे उन ग्रामीण इलाकों के मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। ऐसे में 203 सेंटरों को निर्माण तो पूर्ण करा लिया गया, लेकिन 150 केंद्रों पर ही सीएचओ की तैनाती हो सकी। जबकि 53 पर सीएचओ नहीं है तो कई पर बिजली पानी की भी व्यवस्था नहीं की गई है। इस संबंध में एसीएमओ डा. उमेश कुमार ने बताया कि ब्लाक के स्थानीय अधिकारियों को प्रशासन द्वारा निर्देशित कर दिया गया। बिजली और पानी की व्यवस्था बीडीओ स्तर कराई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रक्तचाप, मधुमेह, टीबी, मलेरिया, टायफाइड सहित अन्य बीमारियों की जांच के लिए ग्रामीण इलाकों के लोगों को निजी जांच केंद्रों और निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ता था। ऐसे में उन्हें आर्थिक दंश झेलना पड़ता था और बेहतर उपचार के अभाव में स्थिति गंभीर हो जाती थी। ऐसे में सरकार ने करीब पांच वर्ष पूर्व स्वास्थ्य उपकेंद्रों और पीएचसी को हेल्थ वेलनेस सेंटर में तब्दील करने की शुरूआत की।
विज्ञापन
इसके लिए जनपद में 254 सेंटर स्वीकृत किए गए, जिससे उन ग्रामीण इलाकों के मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। ऐसे में 203 सेंटरों को निर्माण तो पूर्ण करा लिया गया, लेकिन 150 केंद्रों पर ही सीएचओ की तैनाती हो सकी। जबकि 53 पर सीएचओ नहीं है तो कई पर बिजली पानी की भी व्यवस्था नहीं की गई है। इस संबंध में एसीएमओ डा. उमेश कुमार ने बताया कि ब्लाक के स्थानीय अधिकारियों को प्रशासन द्वारा निर्देशित कर दिया गया। बिजली और पानी की व्यवस्था बीडीओ स्तर कराई जा रही है।
विज्ञापन