गाजीपुर के कर्मनाशा नदी पार करने के बाद बिहार बॉर्डर पर एक चेक पोस्ट है। इस चेक पोस्ट के आगे चाय-पानी की दुकान है। इसी के पीछे गोवंशीय पशुओं का मेला लगता है।
यहां पर बड़ी संख्या में बंधे कमजोर और चुटहिल पशुओं की कीमत सुनकर चौंक जाएंगे, क्योंकि कोई भी गोवंशीय पशु 10 हजार रुपये से कम का नहीं है। यूपी में इन पशुओं को लोग किसी काम में नहीं लेते हैं। तस्कर इन पशुओं का वजन बढ़ाने के लिए इंजेक्शन देते हैं।
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गंगा किनारे रखी गई पशुओं की नाद।
- फोटो : अमर उजाला
पशु मंडी में मिले तथाकथित व्यापारियों ने बताया कि वह जौनपुर के पशुओं को ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि उनकी कद-काठी अच्छी होती है, जिसे बिहार और पश्चिम बंगाल तक के लोग पसंद करते हैं और एक पशु की कीमत 25-30 हजार तक देते हैं।
उसकी बातों पर इस वजह से भी यकीन हो रहा था कि जौनपुर पुलिस ने बीते दिनों जिले में 570 पशु तस्करों को चिह्नित किया है। हाल ही में पशु तस्करों के हमले में हेड कांस्टेबल की मौत हो गई थी। व्यापारी बताता है, वह मिर्जापुर की तरफ के पशुओं को कम पसंद करता है, क्योंकि उनकी कद-काठी अच्छी नहीं होती है।
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गंगा किनारे रखी गई पशुओं की नाद।
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि उन्हें भी खरीद लेते हैं, लेकिन 10-15 हजार तक देते हैं। बताया कि इस समय उत्तर प्रदेश से अच्छे कद-काठी वाले सांड़ कम मिल रहे हैं। यहां पशुओं को बेचने से पहले दो-दो दिन तक पानी नहीं दिया जाता। इससे मांस मीठा हो जाता है।
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नदी किनारे ऐसे कई खूंटे गाड़े गए हैं।
- फोटो : अमर उजाला
कर्मनाशा नदी के इस पार आने पर अलग ही तस्वीर देखने को मिली। यहां कभी गाजीपुर तो कभी चंदौली जनपद की सीमा नजर आई। दूर-दूर तक एक सिपाही नहीं दिखा। वहां से थोड़ी दूर आने पर एक शख्स ने पशुओं को बिहार तक कैसे लाया जाता है, उसकी पूरी तस्वीर रात 8-9 बजे गंगबरार में गंगा नदी के किनारे दिखा दी।
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बीमार पशुओं की होती है डिमांड।
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस से बचने के लिए एक-एक पशु ले जाते हैं
पुलिस से बचने के लिए तस्कर ने कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। वह वाहनों में एक गाय के साथ एक बछड़ा भी रख लेते हैं, नहीं तो पैदल ही खेतों और मेड़ों से होकर एक-एक पशु को ले जाते हैं। पूछने पर बड़ी ही सावधानी से बताते हैं कि वह खरीदकर ले जा रहे हैं। इसमें कुछ स्थानीय लोग भी उनकी मदद करते हैं, जिससे पुलिस कार्रवाई नहीं कर पाती है।