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श्रृंगी ऋषि का आश्रम: यहां श्रीहरि से मिलने आए थे महादेव और सती, फिर दो शिवलिंगों के रूप में हुए विराजमान
Wed, 12 Jul 2023 12:54 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
Published by: किरन रौतेला
Updated Wed, 12 Jul 2023 12:54 PM IST
सार
औड़िहार के समीप स्थित वराह धाम को लेकर कई पौराणिक कथाएं हैं। बुजुर्गों के मुताबिक वराह धाम कहे जाने वाले भू-भाग पर ही कभी श्रृंगी ऋषि का आश्रम था। औड़िहार स्थित उनके आश्रम में तो अन्य महान विभूतियों, ऋषियों के अलावा देवी-देवता भी स्वर्ग से सीधे आगमन करने लगे थे।
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श्रृंगी ऋषि का आश्रम: यहां श्रीहरि से मिलने आए थे महादेव और सती
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लहुरी काशी के नाम से प्रसिद्ध जनपद में कई ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल हैं। इनमें सैदपुर तहसील क्षेत्र के औड़िहार बाजार के पास से गंगा किनारे स्थित वराह धाम का भी विशिष्ट स्थान है। मान्यता है कि यहीं, श्रृंगी ऋषि का आश्रम था, जिन्होंने अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां पुत्र्येष्टि यज्ञ संपन्न कराया था। इतना ही नहीं, यहीं गंगा नदी के तट पर देवों के देव महादेव और माता सती ने श्रीहरि से भेंट भी की थी।
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औड़िहार के समीप स्थित वराह धाम को लेकर कई पौराणिक कथाएं हैं। बुजुर्गों के मुताबिक वराह धाम कहे जाने वाले भू-भाग पर ही कभी श्रृंगी ऋषि का आश्रम था। औड़िहार स्थित उनके आश्रम में तो अन्य महान विभूतियों, ऋषियों के अलावा देवी-देवता भी स्वर्ग से सीधे आगमन करने लगे थे। बताते हैं ऋषि कश्यप के पुत्र हृण्याक्ष का दक्षिण भारत पर राज था। ब्रम्हा जी से अजरता और अमरता का वरदान पाने के बाद उसने धरती को ही अपना निशाना बनाया। पृथ्वी को लेकर वह रसातल में घुस गया, तब सामान्य जनजीवन के अलावा ऋषि, मुनि और देवी देवता भी जीवन से निराश हो गए।
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वराह धाम
- फोटो : अमर उजाला
तब करूणजनों की क्रंदन और पुकार सुनकर श्रीहरि ने वराह का रूप धारण किया था। प्रभु ने हृण्याक्ष का वध करके पृथ्वी का उद्धार किया। संसार का उद्धार करने के बाद श्रीहरि भगवान शंकर से मिलने को व्याकुल हो गए। कहते हैं कि ऋषि श्रृंगी के आश्रम में श्रीहरि के स्मरण करने के बाद महादेव ने उन्हें वहां अकेले नहीं, बल्कि माता सती के साथ दिव्य दर्शन दिया था। भगवान शिव और माता सती दोनों ही भगवान श्रीहरि को दर्शन देने के बाद दो शिवलिंगों के रूप में वहां पहले से स्थापित एक अरघे में विराजमान हो गए। कहते हैं कि भगवान शिव और माता सती के दो प्रतिरूपों का एक ही अरघे में दो शिवलिंगों के रूप में स्थापित मंदिर का वराह धाम के अलावा पूरे भारत में कोई दूसरा उदाहरण कहीं नहीं मिलता है। यहीं कारण है कि साल के बारहो महीने भगवान शिव के भक्तों के साथ ही श्रीहरि के भक्तों का यहां तांता लगा रहता है। यहां की पौराणिकता को जानने के बाद बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम ने वराह धाम के पास गंगा जी किनारे पक्का घाट का निर्माण कराया। जिसे आदित्य बिड़ला घाट नाम दिया गया है। यही नहीं, वह अपनी माता और बिड़ला समूह की संरक्षक राजश्री के साथ नवंबर 2014 को वराह धाम में दर्शन किए थे।