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पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अपना पूरा जीवन सरलता और सादगी से बिताया
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गाजीपुर। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के तत्वावधान में देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती की पूर्व संध्या में शास्त्री नगर स्थित उनकी प्रतिमा स्थल पर माल्यार्पण एवं दीपदान कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसके बाद पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. आरएस लाल के आवास पर आयोजित गोष्ठी में महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उनमें देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन सरलता और सादगी से बिताया।
उन्होंने कहा कि सरकार के तमाम महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद उनके दामन पर कोई दाग नहीं था। वह अत्यंत साहसी और बहादुर नेता थे। उन्होंने ही जय-जवान, जय-किसान का नारा दिया था। गांधीजी के आह्वान पर बहुत ही कम उम्र में देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े और आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह बाहर से तो काफी उदार और विनम्र थे लेकिन अंदर से चट्टान की तरह दृढ़ थे। रेल मंत्री होने के दौरान एक रेल दुर्घटना होने पर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी मानते हुए नैतिकता के आधार पर अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। कहा कि लालबहादुर शास्त्री का जीवन हम सबके लिए प्रेरणास्रोत है। हम सबको उनके जीवन से सबक लेकर सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और ईमानदारी का पालन करने का संकल्प लेना चाहिए और यही हम सबकी उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम में मुक्तेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, शैल श्रीवास्तव, परमानंद श्रीवास्तव, अमर सिंह राठौर, पप्पूलाल श्रीवास्तव आदि रहे।
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उन्होंने कहा कि सरकार के तमाम महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद उनके दामन पर कोई दाग नहीं था। वह अत्यंत साहसी और बहादुर नेता थे। उन्होंने ही जय-जवान, जय-किसान का नारा दिया था। गांधीजी के आह्वान पर बहुत ही कम उम्र में देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े और आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह बाहर से तो काफी उदार और विनम्र थे लेकिन अंदर से चट्टान की तरह दृढ़ थे। रेल मंत्री होने के दौरान एक रेल दुर्घटना होने पर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी मानते हुए नैतिकता के आधार पर अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। कहा कि लालबहादुर शास्त्री का जीवन हम सबके लिए प्रेरणास्रोत है। हम सबको उनके जीवन से सबक लेकर सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और ईमानदारी का पालन करने का संकल्प लेना चाहिए और यही हम सबकी उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम में मुक्तेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, शैल श्रीवास्तव, परमानंद श्रीवास्तव, अमर सिंह राठौर, पप्पूलाल श्रीवास्तव आदि रहे।
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