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देखिए तो कैसी है नियति ...अंतिम यात्रा में भी दुर्गति
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जिला अस्पताल से शव को मर्चरी हाउस और मृतकों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए संचालित हो रहा शव वाहन खराब पड़ा हुआ है। ऐसे में पहले से ही अपनों को खोने के दुख में डूबे लोगों की मुसीबत बढ़ जा रही है और उन्हें निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है। जो सक्षम हैं वे अपने साधनों की व्यवस्था कर ले रहे हैं और उन्हें विशेष फ र्क नहीं पड़ रहा है। लेकिन गरीबों के इससे आर्थिक दंश झेलना पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन की माने तो दो शव वाहनों में एक के ठीक होने के साथ संचालन का दावा किया जा रहा है, जबकि दूसरे को भी जल्द दुरुस्त कराने का दावा किया जा रहा है। वहीं दोनों वाहन अस्पताल परिसर में खड़े हैं। इधर अस्पताल में स्थापित मर्चरी हाउस के भी दस दिनों में संचालन का दावा किया जा रहा है।
दुर्घटना में घायल मरीजों के मौत के बाद शव को मिश्र बाजार स्थित जिला महिला अस्पताल में स्थापित मर्चरी हाउस में शव रखने के लिए और गंभीर बीमारी से मृत व्यक्तियों का शव उनके घर तक पहुंचाने के लिए जिला अस्पताल में दो शव वाहन उपलब्ध कराया गया है। जबकि दोनों शव वाहनों का संचालन चार दिनों से ठप पड़ा हुआ है। ऐसे में शव घर अथवा मर्चरी हाउस पहुंचाने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है, जिससे परिजनों को आर्थिक दंश झेलना पड़ता है।
सबसे अधिक दिक्कत रात के समय परिजनों को उठानी पड़ती है। शव ले जाने के लिए रात के समय कोई वाहन न मिल पाने की स्थिति में इधर-उधर भटकना पड़ता है। इधर मेडिकल कालेज प्रशासन का दावा है कि एक शव वाहन को दुरुस्त करा दिया गया है, जबकि दूसरे को भी जल्द ठीक करा लिया जाएगा। हालांकि स्थिति यह है कि दोनों शव वाहन अस्पताल परिसर में खडे़ हैं और शव को परिजन अपने निजी वाहन और निजी एंबुलेंस से ले जाने को विवश हैं। वहीं जिला अस्पताल में स्थापित मर्चरी हाउस का संचालन अब तक नहीं कराया जा सका है, जबकि कालेज प्रशासन करीब एक माह से मात्र दस दिनों में ही संचालित करने की बात कहकर पल्ला झाड़ ले रहा है। ऐसे में मिश्र बाजार स्थित जिला महिला अस्पताल परिसर में स्थापित मर्चरी हाउस में शवों को रखा जा रहा है। वहां से पोस्टमार्टम हाउस शव लाने के लिए परिजनों को निजी वाहन भाड़े पर बुक करना पड़ता है। एक तरफ वह जहां अपनों की मौत के दर्द की पीड़ा से परिवार के लोग व्यथित रहते हैं, वहीं आर्थिक दंश इस पीड़ा और भी असहनीय बना देती है। इस संबंध में मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डा. आनंद मिश्रा ने बताया कि एक शव वाहन दुरुस्त करा दिया गया है। जबकि दूसरा भी जल्द ठीक हो जाएगा। अस्पताल में स्थापित मर्चरी हाउस का संचालन भी दस दिनों के अंदर शुरू हो जाएगा।
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केस 1
नगर के नवापुरा कचहरी निवासी मुहम्मद रहमान ने बताया कि उनके रिश्तेदार का उपचार जिला अस्पताल में चल रहा था। बीते 23 जुलाई की रात उनका इलाज के दौरान निधन हो गया था। शव जमानिया उनके घर भेजवाने लिए जब शव वाहन के लिए अस्पताल में तैनात चिकित्सकों से कहा गया तो खराब होने की बात कहकर मना कर दिया गया। ऐसे गाजीपुर जिला अस्पताल से जमानिया शव भेजने के लिए 2000 रुपये देकर निजी वाहन की बुकिंग की गई थी। ऐसे रात में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा था।
केस 2
हृदय रोग से पीड़ित बोगना गांव के एक मरीज का इलाज के दौरान निधन 23 जुलाई को गया था। उनके परिजनों को उनका शव ले जाने के लिए निजी वाहन बुक करना पड़ा था। समाज सेवी वीरेंद्र ने बताया कि अगर शव वाहन दुरुस्त रहता तो परिजनों को आर्थिक दंश नहीं झेलना पड़ता।
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दुर्घटना में घायल मरीजों के मौत के बाद शव को मिश्र बाजार स्थित जिला महिला अस्पताल में स्थापित मर्चरी हाउस में शव रखने के लिए और गंभीर बीमारी से मृत व्यक्तियों का शव उनके घर तक पहुंचाने के लिए जिला अस्पताल में दो शव वाहन उपलब्ध कराया गया है। जबकि दोनों शव वाहनों का संचालन चार दिनों से ठप पड़ा हुआ है। ऐसे में शव घर अथवा मर्चरी हाउस पहुंचाने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है, जिससे परिजनों को आर्थिक दंश झेलना पड़ता है।
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सबसे अधिक दिक्कत रात के समय परिजनों को उठानी पड़ती है। शव ले जाने के लिए रात के समय कोई वाहन न मिल पाने की स्थिति में इधर-उधर भटकना पड़ता है। इधर मेडिकल कालेज प्रशासन का दावा है कि एक शव वाहन को दुरुस्त करा दिया गया है, जबकि दूसरे को भी जल्द ठीक करा लिया जाएगा। हालांकि स्थिति यह है कि दोनों शव वाहन अस्पताल परिसर में खडे़ हैं और शव को परिजन अपने निजी वाहन और निजी एंबुलेंस से ले जाने को विवश हैं। वहीं जिला अस्पताल में स्थापित मर्चरी हाउस का संचालन अब तक नहीं कराया जा सका है, जबकि कालेज प्रशासन करीब एक माह से मात्र दस दिनों में ही संचालित करने की बात कहकर पल्ला झाड़ ले रहा है। ऐसे में मिश्र बाजार स्थित जिला महिला अस्पताल परिसर में स्थापित मर्चरी हाउस में शवों को रखा जा रहा है। वहां से पोस्टमार्टम हाउस शव लाने के लिए परिजनों को निजी वाहन भाड़े पर बुक करना पड़ता है। एक तरफ वह जहां अपनों की मौत के दर्द की पीड़ा से परिवार के लोग व्यथित रहते हैं, वहीं आर्थिक दंश इस पीड़ा और भी असहनीय बना देती है। इस संबंध में मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डा. आनंद मिश्रा ने बताया कि एक शव वाहन दुरुस्त करा दिया गया है। जबकि दूसरा भी जल्द ठीक हो जाएगा। अस्पताल में स्थापित मर्चरी हाउस का संचालन भी दस दिनों के अंदर शुरू हो जाएगा।
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केस 1
नगर के नवापुरा कचहरी निवासी मुहम्मद रहमान ने बताया कि उनके रिश्तेदार का उपचार जिला अस्पताल में चल रहा था। बीते 23 जुलाई की रात उनका इलाज के दौरान निधन हो गया था। शव जमानिया उनके घर भेजवाने लिए जब शव वाहन के लिए अस्पताल में तैनात चिकित्सकों से कहा गया तो खराब होने की बात कहकर मना कर दिया गया। ऐसे गाजीपुर जिला अस्पताल से जमानिया शव भेजने के लिए 2000 रुपये देकर निजी वाहन की बुकिंग की गई थी। ऐसे रात में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा था।
केस 2
हृदय रोग से पीड़ित बोगना गांव के एक मरीज का इलाज के दौरान निधन 23 जुलाई को गया था। उनके परिजनों को उनका शव ले जाने के लिए निजी वाहन बुक करना पड़ा था। समाज सेवी वीरेंद्र ने बताया कि अगर शव वाहन दुरुस्त रहता तो परिजनों को आर्थिक दंश नहीं झेलना पड़ता।