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Ghazipur News: गांवों में फैली गंदगी, ब्लॉक में सफाईकर्मी कोई बाबू बना तो काेई ऑपरेटर का काम कर रहा
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पड़ताल की खबर में----चकमहताब गांव को जाने वाले मार्ग पर फैला नाली का पानी व मलबा। संवाद
गाजीपुर। जिले की ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था कागजों में तो ठीक लग रही है, लेकिन जमीनी हकीकत में गांव कूड़े के ढेर और बजबजाती नालियों से भरे हैं। शासन हर महीने 16 विकास खंडों की 1238 ग्राम पंचायतों में करीब 8.40 करोड़ रुपये खर्च कर 2800 सफाईकर्मियों को मानदेय दे रहा है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में सफाईकर्मी ब्लॉक मुख्यालयों और अधिकारियों के दफ्तरों में प्रशासनिक काम कर रहे हैं।
कुछ ऑपरेटर या फाइल संभाल रहे हैं, जबकि अन्य कार्यालयी कार्य कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि जिले के सभी ब्लॉकों में कुल 32 सफाईकर्मी तैनात हैं। पड़ताल में सामने आया कि करंडा, मनिहारी, बिरनो और कासिमाबाद समेत कई विकास खंडों में सफाईकर्मियों को कार्यालयी कार्यों में लगाया गया है। कोई कंप्यूटर ऑपरेटर बना है, तो कोई लेखाकार के रूप में रजिस्टर संभाल रहा है। कुछ कर्मचारी अधिकारियों के निजी सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, जिन गांवों में उनकी तैनाती है, वहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है।
छह से अधिक सफाईकर्मी देख रहे प्रशासनिक कार्य
मनिहारी विकासखंड में आधा दर्जन से अधिक सफाईकर्मी प्रशासनिक कार्यों में लगे हैं। दो सफाईकर्मी निर्वाचन कार्य देख रहे हैं, एक आईजीआरएस निस्तारण में लगा है। एक अन्य कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका निभा रहा है, जबकि एक और कार्यालयी कागजात संभाल रहा है। ऐसे में गांवों की सफाई प्रभावित हो रही है। बीडीओ राकेश कुमार दीपक का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देश पर कंट्रोल रूम में पांच सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं।
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बीडीओ कार्यालय में तैनात है सफाईकर्मी
करंडा विकासखंड में रेवसां गांव का एक सफाईकर्मी एडीओ पंचायत कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर और भुगतान कार्य में लगा है। नारायनपुर के सफाईकर्मी बीडीओ कार्यालय में सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। मकसूदनपाह गांव का एक सफाईकर्मी डाक और कार्यालयी कार्यों में तैनात है, जबकि दूसरा रजिस्टर मेंटेन कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों में नालियों की सफाई ठप पड़ी है और सफाईकर्मी ब्लॉक में प्रशासनिक कार्य कर रहे हैं। बीडीओ सुवेदिता सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के चलते कभी-कभार दो-तीन सफाईकर्मी आवश्यक कार्यों में लगे रहते हैं।
कर्मचारियों की कमी के चलते सफाईकर्मियों को कार्यालय के काम में लगाया गया है, ताकि कार्य प्रभावित न हो। - रमेश चंद्र उपाध्याय, डीपीआरओ
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कुछ ऑपरेटर या फाइल संभाल रहे हैं, जबकि अन्य कार्यालयी कार्य कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि जिले के सभी ब्लॉकों में कुल 32 सफाईकर्मी तैनात हैं। पड़ताल में सामने आया कि करंडा, मनिहारी, बिरनो और कासिमाबाद समेत कई विकास खंडों में सफाईकर्मियों को कार्यालयी कार्यों में लगाया गया है। कोई कंप्यूटर ऑपरेटर बना है, तो कोई लेखाकार के रूप में रजिस्टर संभाल रहा है। कुछ कर्मचारी अधिकारियों के निजी सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, जिन गांवों में उनकी तैनाती है, वहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है।
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छह से अधिक सफाईकर्मी देख रहे प्रशासनिक कार्य
मनिहारी विकासखंड में आधा दर्जन से अधिक सफाईकर्मी प्रशासनिक कार्यों में लगे हैं। दो सफाईकर्मी निर्वाचन कार्य देख रहे हैं, एक आईजीआरएस निस्तारण में लगा है। एक अन्य कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका निभा रहा है, जबकि एक और कार्यालयी कागजात संभाल रहा है। ऐसे में गांवों की सफाई प्रभावित हो रही है। बीडीओ राकेश कुमार दीपक का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देश पर कंट्रोल रूम में पांच सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं।
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बीडीओ कार्यालय में तैनात है सफाईकर्मी
करंडा विकासखंड में रेवसां गांव का एक सफाईकर्मी एडीओ पंचायत कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर और भुगतान कार्य में लगा है। नारायनपुर के सफाईकर्मी बीडीओ कार्यालय में सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। मकसूदनपाह गांव का एक सफाईकर्मी डाक और कार्यालयी कार्यों में तैनात है, जबकि दूसरा रजिस्टर मेंटेन कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों में नालियों की सफाई ठप पड़ी है और सफाईकर्मी ब्लॉक में प्रशासनिक कार्य कर रहे हैं। बीडीओ सुवेदिता सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के चलते कभी-कभार दो-तीन सफाईकर्मी आवश्यक कार्यों में लगे रहते हैं।
कर्मचारियों की कमी के चलते सफाईकर्मियों को कार्यालय के काम में लगाया गया है, ताकि कार्य प्रभावित न हो। - रमेश चंद्र उपाध्याय, डीपीआरओ