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Ghazipur News: बीमा क्लेम को फर्जी लोड-चालान का आधार बताकर खारिज करना सेवा में कमी

Fri, 25 Sep 2026 01:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:59 AM IST
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Rejection of an insurance claim on the grounds of a fake load-challan amounts to a deficiency in service.
गाजीपुर। ट्रक दुर्घटना के बीमा क्लेम को फर्जी लोड-चालान का आधार बताकर खारिज करना ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की सेवा में कमी है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष सुजीत कुमार श्रीवास्तव, सामान्य सदस्य रणविजय मिश्र और महिला सदस्य दीपा रानी की पीठ ने बृहस्पतिवार को मरम्मत खर्च में 25 प्रतिशत कटौती करते हुए शेष 2,51,748.75 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही 10 हजार रुपये मानसिक एवं शारीरिक कष्ट तथा छह हजार रुपये वाद-व्यय के रूप में देने को कहा। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी लोड-चालान को फर्जी साबित करने में विफल रही। इसके आधार पर क्लेम को नो-क्लेम घोषित करना सेवा में कमी है।
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आदेश का पालन निर्धारित समय में नहीं होने पर परिवादी को कानूनी कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी। इस राशि पर आदेश की तिथि से सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 10 हजार और वाद-व्यय के छह हजार रुपये भी देने होंगे। बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए परिवादी को 2.51 लाख रुपये दो महीने के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है।
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मामला करंडा गांव निवासी रामसुंदर यादव पुत्र पलकधारी यादव के ट्रक से जुड़ा है। ट्रक का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की गाजीपुर शाखा से बीमा कराया गया था। 20 अक्तूबर 2016 को बिहार के डेहरी आन सोन (रोहतास) से कोयला लादकर लौटते समय दिलदारनगर क्षेत्र में अचानक भैंस सामने आ गई। उसे बचाने के प्रयास में ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया और क्षतिग्रस्त हो गया।
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घटना की सूचना बीमा कंपनी को दी गई। इसके बाद सर्वेयर मौके पर पहुंचा, फोटो खींचे गए और ट्रक को मरम्मत के लिए भेजा गया। परिवादी के अनुसार ट्रक की मरम्मत पर 3,35,665 रुपये खर्च हुए और इसके बिल व रसीदें आयोग में प्रस्तुत की गईं। बीमा कंपनी ने क्लेम यह कहते हुए खारिज कर दिया कि लोड-चालान और चालक राधाकिशुन की जांच फर्जी थी। आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि कंपनी ने जिस दुकानदार मदन सिंह के बयान के आधार पर लोड-चालान को फर्जी बताया, उसका न तो शपथपत्र प्रस्तुत किया और न ही संबंधित रजिस्टर की प्रमाणित प्रति दाखिल की।
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