{"_id":"5703f93b4f1c1b1636c810d7","slug":"reading-books-will-have-faded","type":"story","status":"publish","title_hn":"फटी-पुरानी किताबों से ही पड़ेगा पढ़ना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फटी-पुरानी किताबों से ही पड़ेगा पढ़ना
अमर उजाला ब्रयूराो,
Updated Tue, 05 Apr 2016 11:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का शिक्षण सत्र पहली अप्रैल से शुरू हो गया है, लेकिन पुस्तकों का आवंटन नहीं हो सका है। नई पुस्तकों के प्रकाशन का टेंडर न होने के कारण विभाग बच्चों से पुरानी किताबें एकत्र कर उन्हें बच्चों को मुहैया कराने की तैयारी में है। मगर पुराने छात्रों से किताबें एकत्र करना जितना कठिन है उससे कहीं अधिक मुसीबत बच्चों के लिए पुरानी किताबों से पढ़ाई करना साबित होगा। जिले के 1953 विद्यालयों में दो लाख 92 और 802 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 59999 बच्चे अध्ययनरत हैं।
प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को एक दशक से मुफ्त पाठ्य पुस्तकें मुहैया करा रही है, लेकिन वर्तमान शैक्षिक सत्र में इन पुस्तकों का आवंटन अधर में है। अभी नई पुस्तकों के प्रकाशन का टेंडर तक नहीं हो सका है। ऐसे में नई पुस्तकें जुलाई में उपलब्ध होने की संभावना है। अप्रैल का एक सप्ताह बीतने को है। विभाग पुस्तकेें उपलब्ध न करा पाने की कमी को छिपाने के लिए पिछले सत्र के अध्ययनरत बच्चों से उनकी किताबें एकत्रित कर उसे ही वर्तमान सत्र में बांटने का प्रयास कर रहा है, हालांकि यह काम बेहद कठिन है। पुरानी किताबों के कई पन्ने फट चुके हैं।
कई बच्चों की किताबों के एक से तीन चार अध्याय तक के पन्ने गायब हो चुके हैं। अगर ऐसी किताबें जुटा कर बांट भी दी जाएं तो बच्चे शुरू के अध्यायों की पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। प्रत्येक शैक्षिक सत्र में मुफ्त पाठ्य पुस्तकें वितरित करने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी समय से किताबें उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। अक्सर सत्र शुरू होने के तीन माह बाद किताबें वितरित की जाती हैं। पिछले कई सत्रों में अक्तूबर तक किताबेें बंटीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को एक दशक से मुफ्त पाठ्य पुस्तकें मुहैया करा रही है, लेकिन वर्तमान शैक्षिक सत्र में इन पुस्तकों का आवंटन अधर में है। अभी नई पुस्तकों के प्रकाशन का टेंडर तक नहीं हो सका है। ऐसे में नई पुस्तकें जुलाई में उपलब्ध होने की संभावना है। अप्रैल का एक सप्ताह बीतने को है। विभाग पुस्तकेें उपलब्ध न करा पाने की कमी को छिपाने के लिए पिछले सत्र के अध्ययनरत बच्चों से उनकी किताबें एकत्रित कर उसे ही वर्तमान सत्र में बांटने का प्रयास कर रहा है, हालांकि यह काम बेहद कठिन है। पुरानी किताबों के कई पन्ने फट चुके हैं।
विज्ञापन
कई बच्चों की किताबों के एक से तीन चार अध्याय तक के पन्ने गायब हो चुके हैं। अगर ऐसी किताबें जुटा कर बांट भी दी जाएं तो बच्चे शुरू के अध्यायों की पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। प्रत्येक शैक्षिक सत्र में मुफ्त पाठ्य पुस्तकें वितरित करने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी समय से किताबें उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। अक्सर सत्र शुरू होने के तीन माह बाद किताबें वितरित की जाती हैं। पिछले कई सत्रों में अक्तूबर तक किताबेें बंटीं।
विज्ञापन