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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Flow of Magai River obstructed by nets at four points; 4,000 bighas of land across 35 villages submerged for two months.

Ghazipur News: चार जगह जाल से थमा मगई नदी का बहाव, 35 गांवों की 4000 बीघे जमीन दो महीने से जलमग्न

Tue, 06 Oct 2026 01:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 01:12 AM IST
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Flow of Magai River obstructed by nets at four points; 4,000 bighas of land across 35 villages submerged for two months.
मसौनी गांव के सिवान में फैला मंगई का पानी। संवाद
दुबिहां। जिले के करईल क्षेत्र में मंगई नदी की जलनिकासी किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। इस बार मछली पकड़ने के लिए नदी में चार स्थानों पर लगाई गई जाल से पानी का बहाव बाधित हो गया है। इसके चलते 35 गांवों की करीब चार हजार बीघा खेती योग्य जमीन दो महीने से पानी में डूबी है।
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नदी का पानी खेतों से होते हुए गांवों के सीवान तक पहुंच गया है। ऐसे में 15 अक्तूबर से रबी की दलहनी फसलों की बोआई का संकट खड़ा हो गया। मंगई नदी की यह समस्या आज की नहीं है।
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किसान 1990 से जलनिकासी के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। 2015 से संबंधित विभागों को लगातार पत्र देने के साथ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने मामला उठाया गया, लेकिन स्थायी व्यवस्था नहीं बन सकी।
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राजापुर निवासी किसान मृत्युंजय राय ने बताया कि करईल क्षेत्र में मसूर, चना, मटर, सरसों और अलसी की बड़े पैमाने पर खेती होती है। इस साल 20 जून को सिंचाई मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह और 17 अगस्त को पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर से मिलकर भी समस्या उठाई गई।
इससे पहले भी मंगई नदी की समस्या के समाधान के लिए 2015 से संबंधित विभागों को पत्र दिए जा रहे हैं। 30 ग्राम सभाओं के प्रधानों और 55 बीडीसी सदस्यों के हस्ताक्षर कराकर भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया गया था।
इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। राजापुर निवासी किसान चंद्रभूषण राय और सरोज राय के अनुसार हाटा से सोनवानी तक मंगई नदी करीब 30 किलोमीटर लंबी है। कई हिस्सों में गाद जमा है। इसके साथ ही शाहबुद्दीनपुर, सोनवानी, बड़ौरा और दौलतपुर में मछली पकड़ने के लिए जाल लगी है।
किसानों का कहना है कि इससे पानी का बहाव रुकता है और नदी का पानी आसपास के खेतों की ओर फैल जाता है।
दूर के बाजारों में जाती थी दाल: करईल क्षेत्र की दलहनी फसलों की मांग बिहार के मुंगेर, पटना और यूपी के गोरखपुर तक रही है। इन जगहों के व्यापारी यहां की दाल खरीदने पहुंचते थे। खेती का रकबा और उत्पादन प्रभावित होने के साथ अब बाहर से आने वाले कारोबारियों की संख्या भी कम हो गई है।
किसानों के मुताबिक, मंगई में रोहू, फरहा, गिरई, कतरा, बरारी, पॉम्फ्रेट और चाइना समेत कई प्रजातियों की मछलियां मिलती हैं। बड़ी मछलियों के कारण मछुआरे सालभर नदी में जाल लगाए रखते हैं। पकड़ी गई मछलियां आसपास के जनपदों में बिक्री के लिए ले जाई जाती हैं।

किसानों की मांग है कि मछली पकड़ने का काम प्रभावित किए बिना जाल ऐसी जगह लगाई जाएं, जिससे नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित न हो।
समस्या के स्थायी समाधान के लिए गाजीपुर के साथ आजमगढ़, मऊ और बलिया के सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और राजस्व विभाग के अधिकारियों व शारदा सहायक नहर के अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाने की मांग की है।

मसौनी गांव के सिवान में फैला मंगई का पानी। संवाद

मसौनी गांव के सिवान में फैला मंगई का पानी। संवाद

मसौनी गांव के सिवान में फैला मंगई का पानी। संवाद

मसौनी गांव के सिवान में फैला मंगई का पानी। संवाद

मसौनी गांव के सिवान में फैला मंगई का पानी। संवाद

मसौनी गांव के सिवान में फैला मंगई का पानी। संवाद

मसौनी गांव के सिवान में फैला मंगई का पानी। संवाद

मसौनी गांव के सिवान में फैला मंगई का पानी। संवाद

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