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15 प्रतिशत कापियों की कराई जा रही रैंडम जांच
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यूपी बोर्ड परीक्षा-2022 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की कापियों का मूल्यांकन बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। मूल्यांकन कार्य शुद्ध और त्रुटिविहीन हो, परीक्षकों की लापरवाही के कारण छात्रों का नुकसान न हो, इसके लिए प्रतिदिन मूल्यांकन केंद्र पर जांची गई 15 प्रतिशत कापियों का रैंडम अंकेक्षण कराया जा रहा है। अंकेक्षण के संबंध में इस तरह का निर्देश बोर्ड की तरफ से मूल्यांकन केंद्रों को भेज दिया गया है। यह जानकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी के उप सचिव ने दी।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर प्रतिदिन जांची गई कापियों में से 15 प्रतिशत कापियों की रैंडम चेकिंग करने की व्यवस्था की गई है। रैंडम निकाली गई कापियों की त्रुटियों को दूर करने के लिए विषयवार अंकेक्षक नामित किए गए हैं। दो-दो अंकेक्षकों का बैच बनाकर त्रुटियों को दूर कराया जा रहा है। जांची हुई कापी में अंकेक्षक यह देखता है कि कोई प्रश्न या खंड अमूल्यांकित तो नहीं है। कापियों के अंदर और बाहर दिए गए अंकों और उसके योग के अंकों में भी भिन्नता तो नहीं है। अगर त्रुटियां मिलती है तो इनको अंकेक्षक द्वारा उप प्रधान एवं परीक्षक से मिलकर दूर कराया जाएगा। इस कमी के लिए परीक्षक को दोषी मानते हुए उसके पारिश्रमिक की धनराशि से आधा प्रतिशत त्रुटि पर 25 प्रतिशत, एक प्रतिशत त्रुटि पर 50 प्रतिशत और दो प्रतिशत त्रुटि पर 85 प्रतिशत राशि काट ली जाएगी। इसके अलावा उसे मूल्यांकन कार्य करने से तीन वर्ष के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। अंकेक्षक करने वाले परीक्षक को एक रुपये प्रति कापी पारिश्रमिक दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अंकेक्षण के फलस्वरूप संशोधित अंक सीसी-25 प्रपत्र पर अंकेक्षक द्वारा चढ़ाया जाएगा। संशोधन करते समय एवार्ड ब्लैंक पर कटिंग नहीं होनी चाहिए। वर्ष 2001 से मूल्यांकन के दौरान अंकेक्षण कार्य कराने की प्रक्रिया शुरू है।
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उन्होंने बताया कि प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर प्रतिदिन जांची गई कापियों में से 15 प्रतिशत कापियों की रैंडम चेकिंग करने की व्यवस्था की गई है। रैंडम निकाली गई कापियों की त्रुटियों को दूर करने के लिए विषयवार अंकेक्षक नामित किए गए हैं। दो-दो अंकेक्षकों का बैच बनाकर त्रुटियों को दूर कराया जा रहा है। जांची हुई कापी में अंकेक्षक यह देखता है कि कोई प्रश्न या खंड अमूल्यांकित तो नहीं है। कापियों के अंदर और बाहर दिए गए अंकों और उसके योग के अंकों में भी भिन्नता तो नहीं है। अगर त्रुटियां मिलती है तो इनको अंकेक्षक द्वारा उप प्रधान एवं परीक्षक से मिलकर दूर कराया जाएगा। इस कमी के लिए परीक्षक को दोषी मानते हुए उसके पारिश्रमिक की धनराशि से आधा प्रतिशत त्रुटि पर 25 प्रतिशत, एक प्रतिशत त्रुटि पर 50 प्रतिशत और दो प्रतिशत त्रुटि पर 85 प्रतिशत राशि काट ली जाएगी। इसके अलावा उसे मूल्यांकन कार्य करने से तीन वर्ष के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। अंकेक्षक करने वाले परीक्षक को एक रुपये प्रति कापी पारिश्रमिक दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अंकेक्षण के फलस्वरूप संशोधित अंक सीसी-25 प्रपत्र पर अंकेक्षक द्वारा चढ़ाया जाएगा। संशोधन करते समय एवार्ड ब्लैंक पर कटिंग नहीं होनी चाहिए। वर्ष 2001 से मूल्यांकन के दौरान अंकेक्षण कार्य कराने की प्रक्रिया शुरू है।
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