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मारे गए खर और दूषण
ब्यूरो/अमर उजाला गाजीपुर
Updated Mon, 19 Oct 2015 11:50 PM IST
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पंचवटी में सुंदर स्त्री के वेश में पहुंची सुर्पणखा ने श्रीराम से जब शादी का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने लक्ष्मण के पास उसे भेज दिया। लक्ष्मण के इनकार करने पर वह फिर राम के पास पहुंचती है। बाद में वह नाराज होकर राक्षसी में वेश में आकर माता सीता पर झपटती है, उसी दौरान लक्ष्मण सूर्पणखा की नाक और काट काट देते हैं।
अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से लंका मैदान में रविवार रात यह प्रसंग देख श्रद्धालु जय श्रीराम का जयकारा लगाने लगे। लहुलूहान होकर सूर्पणखा भाई खर और दूषण के पास गई। दोनों भाइयों ने जब बौखलाहट में पूछा तो सूर्पणखा ने बताया कि उसकी यह दुर्दशा पंचवटी में आए एक राजकुमार ने की है।
खर और दूषण सेना के साथ जाकर राम और लक्ष्मण से युद्ध करने लगे। राम और लक्ष्मण ने खर-दूषण को मार गिराया। सूर्पणखा बिलखते हुए बड़े भाई रावण के दरबार में गई। सूर्पणखा की व्यथा सुनकर रावण मामा मारीच के पास गया और वहां स्वर्ण मृग बनने के लिए आदेश दिया।
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मारीच ने अस्वीकारा तो रावण ने मृत्यु दंड देने की बात कही। मारीच ने सोचा रावण के हाथों मरने से भला श्रीराम के हाथों मरना है ताकि सद्गति हो। मारीच स्वर्ण मृग बनकर पंचवटी के पास मंडराने लगा। उसे देख सीता मोहित हो गईं।
उन्होंने मृग छाला की इच्छा जाहिर की तो राम लक्ष्मण को सीता की रखवाली छोड़कर मृग का शिकार करने जाते हैं। इतने में हाय लक्ष्मण की आवाज सुनकर लक्ष्मण संकट की आशंका जता रेखा खींच कर सीता से उसके अंदर ही रहने के लिए कहते हैं। इसी समय रावण सीता का हरण कर लेता है।
देवकली संवाददाता के मुताबिक श्रीराम मंच देवकली की ओर से श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का मंचन किया गया।
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अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से लंका मैदान में रविवार रात यह प्रसंग देख श्रद्धालु जय श्रीराम का जयकारा लगाने लगे। लहुलूहान होकर सूर्पणखा भाई खर और दूषण के पास गई। दोनों भाइयों ने जब बौखलाहट में पूछा तो सूर्पणखा ने बताया कि उसकी यह दुर्दशा पंचवटी में आए एक राजकुमार ने की है।
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खर और दूषण सेना के साथ जाकर राम और लक्ष्मण से युद्ध करने लगे। राम और लक्ष्मण ने खर-दूषण को मार गिराया। सूर्पणखा बिलखते हुए बड़े भाई रावण के दरबार में गई। सूर्पणखा की व्यथा सुनकर रावण मामा मारीच के पास गया और वहां स्वर्ण मृग बनने के लिए आदेश दिया।
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मारीच ने अस्वीकारा तो रावण ने मृत्यु दंड देने की बात कही। मारीच ने सोचा रावण के हाथों मरने से भला श्रीराम के हाथों मरना है ताकि सद्गति हो। मारीच स्वर्ण मृग बनकर पंचवटी के पास मंडराने लगा। उसे देख सीता मोहित हो गईं।
उन्होंने मृग छाला की इच्छा जाहिर की तो राम लक्ष्मण को सीता की रखवाली छोड़कर मृग का शिकार करने जाते हैं। इतने में हाय लक्ष्मण की आवाज सुनकर लक्ष्मण संकट की आशंका जता रेखा खींच कर सीता से उसके अंदर ही रहने के लिए कहते हैं। इसी समय रावण सीता का हरण कर लेता है।
देवकली संवाददाता के मुताबिक श्रीराम मंच देवकली की ओर से श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का मंचन किया गया।