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Ghazipur News: पीएम मोदी वाली राखी अबकी सबके लिए
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-पहली बार खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने तैयार की है आठ प्रकार की राखियां
-खादी की राखी बनीं बहनों की पहली पसंद, 5 रुपये में बिक रही 22 रुपये की राखी
-प्रमोशन के तौर पर 15 हजार राखी बेचने का है जनपद में लक्ष्य, पीएम को भी है पसंद
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। पहली बार खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग आमजन के लिए राखी बेच रहा है, जो जनपद में बहनों की पहली पसंद बन गई हैं। आठ खास प्रकार की तैयार की गई राखी की लागत 22-22 रुपये हैं, लेकिन इस बार खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की ओर से प्रमोशन के लिए इसे महज 5 रुपये में बेच जा रहा है।
खादी ग्रामीण उद्योग के ब्रांड एंबेसडर और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ये राखियां काफी पसंद आई हैं। इसके चलते यहां से एक दिन पहले राखी कोरियर से उनके लिए विशेष तौर पर भेजी गई है। पिछली बार खादी ग्रामोद्योग की ओर से केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राखी बनाई गई थी। लेकिन, इस बार खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन मनोज कुमार की पहल पर आमजन के लिए भी इस विशेष प्रकार की राखी बनाई गई है।
इस विशेष प्रकार की राखी को जिले में बनाने के लिए खादी के सभी 22 संस्थाओं की कुल 100 कतिन बहनें लगीं थीं। ये राखी आठ प्रकार की अलग-अलग डिजाइन में तैयार की गई है। इसमें केमिकल का प्रयोग नहीं किया गया है। चरखे से खादी के सुत काटने के बाद उसमें अलग-अलग डिजाइन बनाई गई है। इनमें ओम, रुद्राक्ष, मोदी, श्रीयंत्र के आकार वाली राखी आदि शामिल हैं।
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इस राखी को गहमर की संस्था के भंडार (खादी और ग्रामोद्योग भवन दुर्गा चौक, सकलेनाबाद) में बिक्री के लिए रखी गई है। प्रमोशन के तौैर पर खादी और ग्रामोद्योग भवन को सजाया भी गया है। यहां प्रमोशन के तौर पर 5 रुपये के प्रति राखी के हिसाब से 15 हजार राखी की बिक्री का लक्ष्य है।
इनसेट
अगले वर्ष सभी खादी भंडार गृह पर होगी राखी की बिक्री
खादी फेडरेशन वाराणसी क्षेत्र के सचिव जय प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में खादी की ये राखी काफी पसंद की गई है। 15 हजार लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 13 हजार 700 राखी बिक चुकी है। इसे देखते हुए निर्णय लिया गया है कि अगले वर्ष सभी खादी भंडारों पर राखी की बिक्री की जाएगी।
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30 की रात 8ः58 से अगले दिन सुबह 7ः46 तक बांधे राखी... है सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा सूत्र का महापर्व मनाया जाता है। यह पर्व भद्रा में कदापि संपन्न नहीं करना चाहिए। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी भद्रा के चलते तिथियों के उलट फेर से यह पर्व 30 व 31 अगस्त दोनों दिन मनाया जाएगा।
पंडित मुनींद्र उपाध्याय बताते हैं कि 30 अगस्त को दिन में 10.14 बजे से पूर्णिमा तिथि का संयोग मिल रहा है। लेकिन, उसी समय से भद्रा भी लग रहा है। रक्षाबंधन का त्योहार भद्रा काल में निषेध है अतः रक्षाबंधन का पावन पर्व 30 अगस्त को रात में 8:58 के बाद मनाया जाएगा। हालांकि पूर्णिमा तिथि 31 अगस्त की सुबह 07.46 बजे तक ही है।
इस प्रकार 30 अगस्त रात 08.58 बजे से 31 अगस्त सुबह 07.47 बजे तक रक्षा बंधन का पर्व मनाना उचित एवं श्रेष्ठ होगा। उन्होंने भद्रा के बाद पूर्णिमा तिथि के संयोग में पर्व को मनाने की बात बताई है। भद्रा के विषय में वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भद्रा शनि देव की बहन का नाम है, जो भगवान सूर्य और माता छाया की संतान हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भद्रा का जन्म दैत्यों के विनाश के लिए हुआ था।
ऐसा माना जाता है रावण को उसकी बहन ने भद्रा काल में राखी बांधी थी, जिसकी वजह से रावण का अंत भगवान राम के हाथों हुआ। इसीलिए किसी भी शुभ काम को करते समय इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि भद्रा काल न चल रहा हो।
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-खादी की राखी बनीं बहनों की पहली पसंद, 5 रुपये में बिक रही 22 रुपये की राखी
-प्रमोशन के तौर पर 15 हजार राखी बेचने का है जनपद में लक्ष्य, पीएम को भी है पसंद
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। पहली बार खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग आमजन के लिए राखी बेच रहा है, जो जनपद में बहनों की पहली पसंद बन गई हैं। आठ खास प्रकार की तैयार की गई राखी की लागत 22-22 रुपये हैं, लेकिन इस बार खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की ओर से प्रमोशन के लिए इसे महज 5 रुपये में बेच जा रहा है।
खादी ग्रामीण उद्योग के ब्रांड एंबेसडर और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ये राखियां काफी पसंद आई हैं। इसके चलते यहां से एक दिन पहले राखी कोरियर से उनके लिए विशेष तौर पर भेजी गई है। पिछली बार खादी ग्रामोद्योग की ओर से केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राखी बनाई गई थी। लेकिन, इस बार खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन मनोज कुमार की पहल पर आमजन के लिए भी इस विशेष प्रकार की राखी बनाई गई है।
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इस विशेष प्रकार की राखी को जिले में बनाने के लिए खादी के सभी 22 संस्थाओं की कुल 100 कतिन बहनें लगीं थीं। ये राखी आठ प्रकार की अलग-अलग डिजाइन में तैयार की गई है। इसमें केमिकल का प्रयोग नहीं किया गया है। चरखे से खादी के सुत काटने के बाद उसमें अलग-अलग डिजाइन बनाई गई है। इनमें ओम, रुद्राक्ष, मोदी, श्रीयंत्र के आकार वाली राखी आदि शामिल हैं।
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इस राखी को गहमर की संस्था के भंडार (खादी और ग्रामोद्योग भवन दुर्गा चौक, सकलेनाबाद) में बिक्री के लिए रखी गई है। प्रमोशन के तौैर पर खादी और ग्रामोद्योग भवन को सजाया भी गया है। यहां प्रमोशन के तौर पर 5 रुपये के प्रति राखी के हिसाब से 15 हजार राखी की बिक्री का लक्ष्य है।
इनसेट
अगले वर्ष सभी खादी भंडार गृह पर होगी राखी की बिक्री
खादी फेडरेशन वाराणसी क्षेत्र के सचिव जय प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में खादी की ये राखी काफी पसंद की गई है। 15 हजार लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 13 हजार 700 राखी बिक चुकी है। इसे देखते हुए निर्णय लिया गया है कि अगले वर्ष सभी खादी भंडारों पर राखी की बिक्री की जाएगी।
30 की रात 8ः58 से अगले दिन सुबह 7ः46 तक बांधे राखी... है सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा सूत्र का महापर्व मनाया जाता है। यह पर्व भद्रा में कदापि संपन्न नहीं करना चाहिए। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी भद्रा के चलते तिथियों के उलट फेर से यह पर्व 30 व 31 अगस्त दोनों दिन मनाया जाएगा।
पंडित मुनींद्र उपाध्याय बताते हैं कि 30 अगस्त को दिन में 10.14 बजे से पूर्णिमा तिथि का संयोग मिल रहा है। लेकिन, उसी समय से भद्रा भी लग रहा है। रक्षाबंधन का त्योहार भद्रा काल में निषेध है अतः रक्षाबंधन का पावन पर्व 30 अगस्त को रात में 8:58 के बाद मनाया जाएगा। हालांकि पूर्णिमा तिथि 31 अगस्त की सुबह 07.46 बजे तक ही है।
इस प्रकार 30 अगस्त रात 08.58 बजे से 31 अगस्त सुबह 07.47 बजे तक रक्षा बंधन का पर्व मनाना उचित एवं श्रेष्ठ होगा। उन्होंने भद्रा के बाद पूर्णिमा तिथि के संयोग में पर्व को मनाने की बात बताई है। भद्रा के विषय में वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भद्रा शनि देव की बहन का नाम है, जो भगवान सूर्य और माता छाया की संतान हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भद्रा का जन्म दैत्यों के विनाश के लिए हुआ था।
ऐसा माना जाता है रावण को उसकी बहन ने भद्रा काल में राखी बांधी थी, जिसकी वजह से रावण का अंत भगवान राम के हाथों हुआ। इसीलिए किसी भी शुभ काम को करते समय इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि भद्रा काल न चल रहा हो।