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बेटे की शहादत पर फख्र, लेकिन वादों का दर्द भारी

Mon, 21 Nov 2022 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Nov 2022 11:57 PM IST
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Proud of son's martyrdom, but the pain of promises is heavy
कासिमाबाद। शहीद शशांक सिंह की छठवीं पुण्यतिथि मंगलवार को उनके गांव नसीरूद्दीनपुर में मनाई जाएगी। शहीद के माता-पिता और परिवार का कहना है कि उनको बेटे की शहादत पर फख्र है, लेकिन छह साल बाद भी सभी घोषणाएं पूरी नहीं हो सकी हैं।
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मालूम हो कि जम्मू कश्मीर के माछिल सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की बैट टीम ने 22 नवंबर साल 2016 को हमला किया था। इसमें 19 राजपूत रेजीमेंट में राइफल मैन के पद पर तैनात कासिमाबाद क्षेत्र के नसीरुद्दीनपुर गांव के निवासी शशांक के साथ जिले के बद्धूपुर निवासी मनोज कुशवाहा एवं राजस्थान के प्रभु सिंह शहीद हो गए थे। तीन भाइयों में सबसे बड़े भाई हिमांशु सिंह ने शशांक की शहादत के दो वर्ष बाद सेना से वीआरएस ले लिया। दूसरा भाई सुधांशु फिलहाल घर पर है। पिता अरुण कुमार सिंह एवं माता कमलावती देवी की आंखें लाड़ले को याद कर भर आती हैं।
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पिता अरुण सिंह ने बताया कि तत्कालीन महिला कल्याण राज्यमंत्री ने गांव का नाम शहीद पर शशांकपुरम रखने का वादा किया था। इसके साथ ही कासिमाबाद चौक पर शशांक की प्रतिमा लगाने के साथ कासिमाबाद-कठवामोड़ पारा मार्ग का नामकरण शहीद के नाम करने का वादा किया था। इन वादों को जिला प्रशासन को पूरा करना था।
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