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तीन घंटा में 3.31 करोड़ की संपत्ति ध्वस्त
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नगर के श्रीराम कॉलोनी में धराशायी अवैध इमारत।
- फोटो : GHAZIPUR
गाजीपुर। जिला प्रशासन ने सपा नेता प्रापर्टी डीलर के पिता की तीन करोड़ 31 लाख 75 हजार की संपत्ति को सवा तीन घंटे में ही ध्वस्त कर दिया। सुबह सात बजे से तीन पोकलेन ने अवैध छह मंजिला इमारत को तोड़ना शुरू किया। सुबह 10.16 बजे तक ढहाने का कार्य पूरा कर लिया गया। अब तक मुख्तार एवं उनके दो करीबियों के तीन अवैध निर्माण को जहां जमींदोज किया जा चुका है। वहीं एक अवैध निर्माण को करीबी ने स्वयं ही ध्वस्त करा लिया।
सुबह करीब साढ़े पांच बजे बिजली विभाग की टीम श्रीराम कालोनी पहुंची। सुबह छह बजे बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। इसके बाद सुबह 6.10 बजे इमारत को गिराने के लिए एक-एक करके पांच पोकलेन पहुंच गए। छह बजे सीओ सिटी ओजस्वी चावला के नेतृत्व में कोतवाली समेत पांच थानों की पुलिस एवं पीएसी पहुंच गई। पुलिस ने खोवा मंडी से जल निगम होते हुए बद्रीचंद्र पोखरे को जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया। सड़क के दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया गया। किसी भी राहगीर एवं अन्य लोगों के आवागमन पर पूर्णत: पाबंदी लगा दी गई। सुबह 6.30 बजे एडीएम राजेश कुमार, सदर एसडीएम अनिरूद्ध प्रताप सिंह, तहसीलदार मुकेश कुमार के नेतृत्व में लेखपाल एवं राजस्व कर्मियों की टीम पहुंच गई। सुबह 6.45 बजे सीओ एवं सदर एसडीएम के नेतृत्व में फोर्स ने छह मंजिला बिल्डिंग की ऊपर से नीचे छानबीन शुरू की। सुबह सात बजे डीएम की ओर से आदेश मिलते ही तीन पोकलेन ने बिल्डिंग के पिलर एवं दीवारों को तोड़ना शुरू कर दिया। लगातार कार्रवाई चलती रही। सुबह 10.16 बजे पूरा हिस्सा ध्वस्त हो गया। इसके बाद सुबह 10.20 बजे सड़क पर पड़े मलबे को पोकलेन के सहारे हटाया गया।
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अपील खारिज होते ही राजस्व की टीम ने किया चिन्हांकन
गाजीपुर। सदर एसडीएम कोर्ट ने बीते 12 नवंबर को एक सप्ताह का समय देते हुए आदेश दिया था। आदेशित किया था कि अगर निर्धारित अवधि तक स्वयं निर्माण नहीं गिराया गया तो प्रशासन इसे ध्वस्त कर देगा। एसडीएम कोर्ट ने बिल्डिंग को मानक विहीन एवं बिना मास्टर प्लान स्वीकृति के निर्मित होना बताया था। इस पर मालिकान ने जिलाधिकारी एमपी सिंह के यहां अपील दाखिल की थी। इस पर पांच दिसंबर को सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई थी। डीएम की अगुवाई वाले बोर्ड ने भवन मालिकान की अपील को शनिवार की देर रात खरिज कर दिया था। इसके बाद रात में ही राजस्व विभाग की टीम ने अवैध निर्माण का चिन्हांकन करने के साथ लाल निशान बना दिया था। साथ ही भवन के मुख्य द्वार पर नोटिस भी चस्पा कर दी गई थी।
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छतों से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई देखते रहे लोग
गाजीपुर। जिला प्रशासन के बुलडोजर के गरजने की आवाज सुनकर मुहल्ले के आस-पास के लोग अपनी-अपनी छतों पर चढ़ गए। बिल्डिंग को तोडे़ जाने की कार्रवाई को मुहल्ले के लोगों ने अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करना शुरू कर दिया। इधर आस-पास के कई मुहल्ले के लोग जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को देखने के लिए वहां पहुंच गए थे, लेकिन पुलिस ने किसी को उस परिक्षेत्र में घुसने नहीं दिया।
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कूदकर पोकलेन चालक ने बचाई जान
गाजीपुर। बहुमंजिला इमारत के आस-पास सटे कई भवन बने हुए थे। इंजीनियरों की टीम एवं उनके इशारे पर पोकलेन द्वारा निचले हिस्से को ध्वस्त किया जा रहा था। सभी पिलरों को ध्वस्त करने के बाद सभी पोकलेन काफी दूर हट गए। मुख्य गेट के एक पिलर को जैसे ही एक पोकलेन ने तोड़ा पूरी इमारत देखते ही देखते ध्वस्त हो गई। इस दौरान काफी नजदीक से मलबा गिरते देख पोकलेन में मौजूद चालक बाहर कूदकर जान बचाई।
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सुबह करीब साढ़े पांच बजे बिजली विभाग की टीम श्रीराम कालोनी पहुंची। सुबह छह बजे बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। इसके बाद सुबह 6.10 बजे इमारत को गिराने के लिए एक-एक करके पांच पोकलेन पहुंच गए। छह बजे सीओ सिटी ओजस्वी चावला के नेतृत्व में कोतवाली समेत पांच थानों की पुलिस एवं पीएसी पहुंच गई। पुलिस ने खोवा मंडी से जल निगम होते हुए बद्रीचंद्र पोखरे को जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया। सड़क के दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया गया। किसी भी राहगीर एवं अन्य लोगों के आवागमन पर पूर्णत: पाबंदी लगा दी गई। सुबह 6.30 बजे एडीएम राजेश कुमार, सदर एसडीएम अनिरूद्ध प्रताप सिंह, तहसीलदार मुकेश कुमार के नेतृत्व में लेखपाल एवं राजस्व कर्मियों की टीम पहुंच गई। सुबह 6.45 बजे सीओ एवं सदर एसडीएम के नेतृत्व में फोर्स ने छह मंजिला बिल्डिंग की ऊपर से नीचे छानबीन शुरू की। सुबह सात बजे डीएम की ओर से आदेश मिलते ही तीन पोकलेन ने बिल्डिंग के पिलर एवं दीवारों को तोड़ना शुरू कर दिया। लगातार कार्रवाई चलती रही। सुबह 10.16 बजे पूरा हिस्सा ध्वस्त हो गया। इसके बाद सुबह 10.20 बजे सड़क पर पड़े मलबे को पोकलेन के सहारे हटाया गया।
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अपील खारिज होते ही राजस्व की टीम ने किया चिन्हांकन
गाजीपुर। सदर एसडीएम कोर्ट ने बीते 12 नवंबर को एक सप्ताह का समय देते हुए आदेश दिया था। आदेशित किया था कि अगर निर्धारित अवधि तक स्वयं निर्माण नहीं गिराया गया तो प्रशासन इसे ध्वस्त कर देगा। एसडीएम कोर्ट ने बिल्डिंग को मानक विहीन एवं बिना मास्टर प्लान स्वीकृति के निर्मित होना बताया था। इस पर मालिकान ने जिलाधिकारी एमपी सिंह के यहां अपील दाखिल की थी। इस पर पांच दिसंबर को सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई थी। डीएम की अगुवाई वाले बोर्ड ने भवन मालिकान की अपील को शनिवार की देर रात खरिज कर दिया था। इसके बाद रात में ही राजस्व विभाग की टीम ने अवैध निर्माण का चिन्हांकन करने के साथ लाल निशान बना दिया था। साथ ही भवन के मुख्य द्वार पर नोटिस भी चस्पा कर दी गई थी।
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छतों से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई देखते रहे लोग
गाजीपुर। जिला प्रशासन के बुलडोजर के गरजने की आवाज सुनकर मुहल्ले के आस-पास के लोग अपनी-अपनी छतों पर चढ़ गए। बिल्डिंग को तोडे़ जाने की कार्रवाई को मुहल्ले के लोगों ने अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करना शुरू कर दिया। इधर आस-पास के कई मुहल्ले के लोग जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को देखने के लिए वहां पहुंच गए थे, लेकिन पुलिस ने किसी को उस परिक्षेत्र में घुसने नहीं दिया।
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कूदकर पोकलेन चालक ने बचाई जान
गाजीपुर। बहुमंजिला इमारत के आस-पास सटे कई भवन बने हुए थे। इंजीनियरों की टीम एवं उनके इशारे पर पोकलेन द्वारा निचले हिस्से को ध्वस्त किया जा रहा था। सभी पिलरों को ध्वस्त करने के बाद सभी पोकलेन काफी दूर हट गए। मुख्य गेट के एक पिलर को जैसे ही एक पोकलेन ने तोड़ा पूरी इमारत देखते ही देखते ध्वस्त हो गई। इस दौरान काफी नजदीक से मलबा गिरते देख पोकलेन में मौजूद चालक बाहर कूदकर जान बचाई।