गाजीपुर। संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदेश में बिजली के निजीकरण को जन विरोधी और कारपोरेट्स का मुनाफा बढ़ाने वाला बताते हुए बुधवार को सरजू पांडेय पार्क में धरना-प्रदर्शन कर विरोध किया। इस मौके पर आयोजित सभा में मोर्चा की कोर कमेटी के सदस्य अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि पावर कारपोरेशन के घाटे के कारण निजीकरण की दलीलें बेबुनियाद और जनता की आंख में धूल झोंकने वाली है। ये कदम कारपोरेट के पक्ष में है। अंत में राज्यपाल को संबोधित सात सूत्री ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए पिछले कई वर्षों से प्रयास कर रही थी, जो संयुक्त किसान मोर्चा और बिजली कर्मचारियों-मजदूरों के कड़े विरोध के चलते सफल नहीं हो पाई। अब प्रथम चरण में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत निगमों को पूंजीपतियों को सौंपकर बिजली निजीकरण के काम को चालाकी से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि जहां तक बिजली के बकाया का प्रश्न है 2023-24 तक 1 लाख 10 हजार करोड़ का बकाया बताया जा रहा है, जबकि बिजली बिलों का बकाया 1 लाख 15825 करोड़ रुपये है। इसका बड़ा हिस्सा सरकारी दफ्तरों, इंडस्ट्रीज आदि पर है। अगर इसे वसूल कर लिया जाए तो भी 5825 करोड़ फायदे में बिजली निगम रहेंगे। सभा में अखिल भारतीय किसान फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुभव दास, किसान सभा के जिलाध्यक्ष नसीरुद्दीन, सत्येन्द्र प्रजापति, योगेंद्र यादव आदि ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता अंबिका प्रसाद श्रमिक और संचालन किसान महासभा के राज्य सहसचिव शशिकांत कुशवाहा ने किया।