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कद-काठी और खूबसूरती के लिहाज से लग रही कीमत

Tue, 20 Jul 2021 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 11:24 PM IST
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Price looking in terms of height and beauty
ईदुल-अजहा (कुर्बानी) का पर्व नजदीक आते ही जानवरों की खरीद-फरोख्त का सिलसिला गाजीपुर नगर सहित मुस्लिम बहुल कस्बों और गांवों में बढ़ गया है। जानवरों की कद-काठी और खूबसूरती के लिहाज से उनकी कीमत लग रही है। देशी, जौनपुरी, जमुनापारी, राजस्थानी नस्लों सहित विभिन्न प्रजातियों के बकरे मंडियों में सैकड़ों की संख्या में उपलब्ध हैं। कुछ बकरों की कीमत उसके डील-डौल और खूबसूरती को देखते हुए उनके वास्तविक मूल्य से काफी अधिक मूल्य पर बिक जा रहे हैं। पशु व्यवसायी जमील अहमद ने बताया कि इस वर्ष बकरा मंडी की स्थिति सामान्य है। अब तक लगभग छह हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक के बकरे बिके हैं। उल्लेखनीय है कि मुस्लिम समुदाय के लोग इब्राहिमी सुन्नत ईदुल-अजहा का पर्व जायज जानवरों की कुर्बानी कर मनाते हैं। जामा मस्जिद के इमाम हाफिज अब्दुल खालिक ने बताया कि बड़े जानवर जैसे भैंस या भैंसा सात लोगों के नाम से होते हैं। जबकि छोटे जानवर बकरा, बकरी, भेंड़ आदि एक व्यक्ति के नाम से होती है। इसी के साथ शर्त यह भी है कि जानवर मोटा तगड़ा और स्वस्थ हो। उस जानवर में किसी प्रकार का ऐब न हो। यहां तक कि न उसके कान कटे हों न आंख में ऐब हो। जानवर स्वयं घर पर पाल कर उसकी कुर्बानी दी जाए तो और बेहतर है। कुर्बानी तीन दिनों तक लगातार होती है जो पहले दिन ईद की नमाज के बाद प्रारंभ होती है।
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