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सरलता और उदारता के प्रतिमूर्ति थे प्रेमचंद
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Fri, 31 Jul 2015 11:18 PM IST
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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 135वीं जयंती पर विचार गोष्ठी शुक्रवार को आयोजित की गई। उनके चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद वक्ताओं ने समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष
करने का संकल्प लिया। उन्हें भारत रत्न के सम्मान से सम्मानित करने की मांग पुरजोर ढंग से उठाई। सरजू पांडेय पार्क में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने उन्हें सरलता और उदारता की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि उन्हें ग्रामीण जीवन
से काफी लगाव था। आडंबर और दिखावे से वह मीलों दूर रहते थे। पूरी दुनिया उनकी रचनाओं की कायल है। उनकी रचित कहानियों और उपन्यासों की लोग आज भी मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं। वह अव्यवस्था के खिलाफ अलख
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जगाते रहे। इस अवसर पर मुख्य वक्ता पूर्व विधायक जयराम सिंह ने कहा कि हमें उनके विचारों को आत्मसात कर उनके बताए रास्ते पर चलने की जरूरत है। गोष्ठी में सपा जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा, रामधारी यादव, पारस नाथ
सिंह, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, परमानंद श्रीवास्तव, गुलाम कादिर राईनी, सदानंद यादव, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिष के जिलाध्यक्ष अंबिका दूबे, ओमप्रकाश यादव, विजय कुमार श्रीवास्तव, जितेंद्र घोष उपस्थित थे। अध्यक्षता मुक्तेश्वर
प्रसाद श्रीवास्तव और संचालन अरुण कुमार श्रीवास्तव ने किया। साहित्य चेतना समाज के तत्वाधान में जागेश्वर नाथ मंदिर सभागार में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष
डा. अजय मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद्र उस कालजयी युग पुरूष का नाम है जिन्होंने पहली बार साहित्य को उसकी पहचान दी। डा. रामप्रकाश कुशवाहा ने उन्हें कालजयी रचनाकार बताते हुए युग दृष्टा कहा। इस अवसर पर
डा. बालेश्वर विक्रम, डा. व्यास मुनी राय, अनंत देव पांडेय, भोला सिंह, आनंद प्रकाश अग्रवाल, मणिराम मिश्र, शेखजैनुल आब्दीन, अरुण सिंह, बंजरंगी यादव, राजेश यादव, आकाश विजय त्रिपाठी उपस्थित थे। संगोष्ठी का संचालन डा. संतोष कुमार तिवारी ने किया।
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करने का संकल्प लिया। उन्हें भारत रत्न के सम्मान से सम्मानित करने की मांग पुरजोर ढंग से उठाई। सरजू पांडेय पार्क में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने उन्हें सरलता और उदारता की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि उन्हें ग्रामीण जीवन
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से काफी लगाव था। आडंबर और दिखावे से वह मीलों दूर रहते थे। पूरी दुनिया उनकी रचनाओं की कायल है। उनकी रचित कहानियों और उपन्यासों की लोग आज भी मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं। वह अव्यवस्था के खिलाफ अलख
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जगाते रहे। इस अवसर पर मुख्य वक्ता पूर्व विधायक जयराम सिंह ने कहा कि हमें उनके विचारों को आत्मसात कर उनके बताए रास्ते पर चलने की जरूरत है। गोष्ठी में सपा जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा, रामधारी यादव, पारस नाथ
सिंह, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, परमानंद श्रीवास्तव, गुलाम कादिर राईनी, सदानंद यादव, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिष के जिलाध्यक्ष अंबिका दूबे, ओमप्रकाश यादव, विजय कुमार श्रीवास्तव, जितेंद्र घोष उपस्थित थे। अध्यक्षता मुक्तेश्वर
प्रसाद श्रीवास्तव और संचालन अरुण कुमार श्रीवास्तव ने किया। साहित्य चेतना समाज के तत्वाधान में जागेश्वर नाथ मंदिर सभागार में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष
डा. अजय मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद्र उस कालजयी युग पुरूष का नाम है जिन्होंने पहली बार साहित्य को उसकी पहचान दी। डा. रामप्रकाश कुशवाहा ने उन्हें कालजयी रचनाकार बताते हुए युग दृष्टा कहा। इस अवसर पर
डा. बालेश्वर विक्रम, डा. व्यास मुनी राय, अनंत देव पांडेय, भोला सिंह, आनंद प्रकाश अग्रवाल, मणिराम मिश्र, शेखजैनुल आब्दीन, अरुण सिंह, बंजरंगी यादव, राजेश यादव, आकाश विजय त्रिपाठी उपस्थित थे। संगोष्ठी का संचालन डा. संतोष कुमार तिवारी ने किया।