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प्रभु के पैर पखार नम हुईं निषादराज की आंखें

Thu, 15 Oct 2015 11:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/गाजीपुर
ब्यूरो/अमर उजाला/गाजीपुर Updated Thu, 15 Oct 2015 11:32 PM IST
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 Pakhar his feet were wet eyes Nishadraj
वन गमन के लिए अयोध्या से तमसा नदी पर पहुंचे प्रभु श्रीराम पत्नी सीता, भाई लक्ष्मण के साथ गंगा पार जाते हैं। इससे पहले निषादराज प्रभु श्रीराम के पैर पखारते हैं। इस दौरान श्रीराम-केवट संवाद को सुनकर लोग भक्ति भाव में डूब
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गए। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से बुधवार की शाम विशेश्वरगंज स्थित पहाड़ खां के पोखरा पर श्रीराम-केवट संवाद का मंचन देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
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अयोध्यावासियों को समझा कर लौटाने के बाद श्रीराम पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ तमसा नदी के तट पर रात्रि विश्राम करते हैं। प्रभु संदेश भेजकर निषादराज को बुलवाते हैं। निषादराज संदेश पाते ही दौड़े चले आते हैं। वह आशंका जताते हुए प्रभु श्रीराम से कहते हैं कि आपके स्पर्श से शिला नारी बन गई, ऐसे में वह बगैर आपका पैर पखारे नाव पर नहीं बैठाएंगे नहीं तो नाव भी नारी बन जाएगी। श्री राम पांव पखारने की आज्ञा देते हैं। भगवान का पैर पखारते समय निषाद राज की आंखें भक्ति में नम हो गईं। उसके आंखों से आंसू भी बहने लगा। यह देख प्रभु ने उनको गले से लगा लिया। श्रीराम  सीता द्वारा दी गई अंगूठी केवट को उतरवाई के रूप में देने लगे तो निषाद राज ने कहा कि प्रभु ‘ अब कछु नाथ न चाहिइ मोरे, दीनदयाल अनुग्रह तोरे’। केवट ने कहा कि ‘फिरती बार मोह जो देवा तो प्रसाद में सिर धरि लेवा’ अर्थात प्रभु जब मैं आपके धाम में आऊंगा तो आप मुझे भी भवसागर पार कर दीजिएगा। कोई मल्लाह दूसरे मल्लाह से खेवाई नहीं लेता है। मैं छोटी नदी पार कराता हूं और आप तो भवसागर से पार कराने वाले हैं। यह दृश्य देख भक्ति भाव में श्रद्धालु जयकारा लगाने लगे।
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