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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Opposition to the mandatory verification of share, possession, and transaction details prior to the execution of a sale deed.

Ghazipur News: बैनामा से पहले अंश, कब्जा और लेनदेन की जांच की अनिवार्यता का विरोध

Wed, 12 Aug 2026 01:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 01:03 AM IST
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Opposition to the mandatory verification of share, possession, and transaction details prior to the execution of a sale deed.
भूमि के बैनामा से पूर्व सर्किल रेट, क्रेता-विक्रेता के बीच लेनदेन, भूमि पर कब्जा और विक्रेता के
गाजीपुर। भूमि के बैनामा से पूर्व सर्किल रेट, क्रेता-विक्रेता के बीच लेनदेन, भूमि पर कब्जा और विक्रेता के अंश निर्धारण की जांच अनिवार्य किए जाने के डीएम के निर्देश के विरोध में मंगलवार को अधिवक्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा।
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अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार कर तहसील परिसर से नगर स्थित सब रजिस्ट्री कार्यालय तक जुलूस निकाला। इस दौरान अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए डीएम के निर्देश का विरोध किया। साथ ही पत्रक सौंप आदेश वापस लेने की मांग की।
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पांच अगस्त को डीएम अनुपम शुक्ला ने जनपद के सभी एसडीएम और सब रजिस्ट्रारों को पत्र जारी कर भूमि के बैनामे से संबंधित जांच के संबंध में निर्देश दिया था।
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पत्र में डीएम ने कहा है कि जिले में अंश से अधिक भूमि बेचने, बिना कब्जे वाली भूमि का बैनामा करने और सर्किल रेट से कम मूल्य पर भूमि का लेनदेन करने के मामले बढ़ रहे हैं। इससे भूमि विवादों में वृद्धि हो रही है और आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण प्रभावित हो रहा है।
इसी के मद्देनजर डीएम ने भूमि के बैनामा से पूर्व विक्रेता के अंश का निर्धारण, सर्किल रेट के सापेक्ष क्रेता-विक्रेता के बीच हुए वास्तविक लेनदेन और भूमि पर कब्जे की स्थिति की जांच अनिवार्य कर दी है।
निर्देश में यह भी कहा गया है कि रजिस्ट्री कार्यालय की ओर से जांच के लिए पत्र जारी किए जाने के 72 घंटे के भीतर तहसील प्रशासन को जांच आख्या रजिस्ट्री कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी। डीएम के इस निर्देश को अधिवक्ताओं ने तुगलकी फरमान बताते हुए इसका विरोध किया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि तहसील क्षेत्र की आधे से अधिक खतौनियों में अभी तक अंश निर्धारण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ऐसे में प्रत्येक बैनामे से पहले अंश निर्धारण की जांच अनिवार्य किए जाने से लोगों को जमीन की रजिस्ट्री कराने में अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
अधिवक्ता प्रेम नारायण सिंह यादव व राजेश सिंह ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ही भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण में काफी समय लगता है। अगर प्रत्येक बैनामे से पहले अंश, कब्जे और लेनदेन की जांच अनिवार्य कर दी गई तो इससे प्रक्रिया और जटिल होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे मुकदमों की संख्या बढ़ सकती है और राजस्व की भी क्षति होने की आशंका है। साथ ही आम वादकारियों और भूमि खरीदने-बेचने वाले लोगों के लिए भी यह व्यवस्था प्रतिकूल साबित होगी।

अधिवक्ताओं ने कहा कि अगर प्रशासन को भूमि संबंधी विवादों और गलत बैनामों पर रोक लगानी है तो इसके लिए पहले लंबित अंश निर्धारण की प्रक्रिया पूरी कराई जानी चाहिए। इसके बाद ही व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक होगा। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने डीएम के आदेश को वापस लेने की मांग की। इस मौके पर आलोक पांडेय, राजेंद्र प्रसाद, उमाशंकर सिंह यादव, तैय्यब सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।।
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