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चार वर्ष में मात्र 155 ही हेल्थ वेलनेस सेंटर हुए क्रियाशील
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छोटे नगरों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को नजदीक ही स्वास्थ्य सेवाएं महुैया कराने के लिए जिले में कुल 452 हेल्थ वेलनेस सेंटर शुरू किए जाने थे लेकिन चार वर्ष में सिर्फ 155 सेंटर ही चालू हो सके हैं। 91 सेंटर तैयार हो चुके हैं लेकिन सीएचओ (कम्युनिटी हेथ अफसर) की तैनाती नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं की जा सकी हैं। जबकि 206 सेंटरों का कार्य अभी पूरा नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि इन इलाकों के लोगों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याएं होने पर नीम हकीमों का सहारा लेना पड़ रहा है।
कस्बों और गांवों के लोगों को सामान्य बीमारियों से पीड़ित होने पर नीम हकीमों का सहारा न लेना पड़े, इसके लिए शासन ने जिले के 394 उपकेंद्र और 58 न्यू पीएचसी को हेल्थ वेलनेस सेंटर में परिवर्तित करने का निर्देश 2018 में दिया था। इसके तहत 394 स्वास्थ्य उपकेंद्रों और 58 न्यू पीएचसी को चिह्नित किया गया था। चार वर्ष बीत गए लेकिन 246 सेंटर बनकर तैयार हुए जिसमें 155 चालू हो गए हैं जबकि 91 सेंटर में सीएचओ की तैनाती नहीं हो सकी है। इसकी वजह से यहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं की जा सकी हैं। वहीं 206 हेल्थ वेलनेस सेंटर का कार्य पूरा नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को देखा जाए तो 394 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में 116 और 58 न्यू पीएचसी में 39 ही हेल्थ वेलनेस सेंटर में परिवर्तित होने के साथ संचालित हो सके हैं। शेष को पूर्ण कराने एवं सीएचओ की तैनाती करने का प्रयास किया जा रहा है।
वेलनेस सेंटर में मिलती हैं ये सुविधाएं
केंद्रों में मातृत्व स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, किशोर स्वास्थ्य, मधुमेह, रक्तचाप की जांच, संचारी और गैर संचारी रोग प्रबंधन और उपचार की व्यवस्था होती है। साथ ही योग और एक्सरसाइज, काउंसिलिंग, स्कूल हेल्थ एजुकेशन, आपात कालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। साथ ही टीकाकरण और मातृत्व स्वास्थ्य की जांच और इलाज के अलावा मौसमी बीमारी, टीबी, मलेरिया की रोकथाम के उपाय बताने के साथ उपचार की सुविधा प्रदान की जाती है।
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न्यू पीएचसी पर 2.95 और उपकेंद्र पर खर्च हो रहे सात लाख रुपये
एक न्यू पीएचसी को हेल्थ वेलनेस सेंटर में परिवर्तित करने के लिए दो लाख 95 हजार रुपये का खर्च आता है। वहीं एक उपकेंद्र पर सात लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। साथ ही यहां अत्याधुनिक जांच मशीन एवं उपचार की सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं ताकि जांच के बाद गंभीर बीमारी के मरीजों तत्काल उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। मरीज की स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल रेफर करने की भी व्यवस्था है।
जिले में 155 हेल्थ वेलनेस सेंटर चालू हैं। अन्य 206 सेंटर जल्द ही बनकर तैयार हो जाएंगे। जो सेंटर तैयार हो चुके हैं वहां सीएचओ की तैनाती कर चिकित्सा सेवा शुरू कराई जाएगी। - डॉ. केके वर्मा, एसीएमओ
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कस्बों और गांवों के लोगों को सामान्य बीमारियों से पीड़ित होने पर नीम हकीमों का सहारा न लेना पड़े, इसके लिए शासन ने जिले के 394 उपकेंद्र और 58 न्यू पीएचसी को हेल्थ वेलनेस सेंटर में परिवर्तित करने का निर्देश 2018 में दिया था। इसके तहत 394 स्वास्थ्य उपकेंद्रों और 58 न्यू पीएचसी को चिह्नित किया गया था। चार वर्ष बीत गए लेकिन 246 सेंटर बनकर तैयार हुए जिसमें 155 चालू हो गए हैं जबकि 91 सेंटर में सीएचओ की तैनाती नहीं हो सकी है। इसकी वजह से यहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं की जा सकी हैं। वहीं 206 हेल्थ वेलनेस सेंटर का कार्य पूरा नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को देखा जाए तो 394 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में 116 और 58 न्यू पीएचसी में 39 ही हेल्थ वेलनेस सेंटर में परिवर्तित होने के साथ संचालित हो सके हैं। शेष को पूर्ण कराने एवं सीएचओ की तैनाती करने का प्रयास किया जा रहा है।
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वेलनेस सेंटर में मिलती हैं ये सुविधाएं
केंद्रों में मातृत्व स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, किशोर स्वास्थ्य, मधुमेह, रक्तचाप की जांच, संचारी और गैर संचारी रोग प्रबंधन और उपचार की व्यवस्था होती है। साथ ही योग और एक्सरसाइज, काउंसिलिंग, स्कूल हेल्थ एजुकेशन, आपात कालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। साथ ही टीकाकरण और मातृत्व स्वास्थ्य की जांच और इलाज के अलावा मौसमी बीमारी, टीबी, मलेरिया की रोकथाम के उपाय बताने के साथ उपचार की सुविधा प्रदान की जाती है।
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न्यू पीएचसी पर 2.95 और उपकेंद्र पर खर्च हो रहे सात लाख रुपये
एक न्यू पीएचसी को हेल्थ वेलनेस सेंटर में परिवर्तित करने के लिए दो लाख 95 हजार रुपये का खर्च आता है। वहीं एक उपकेंद्र पर सात लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। साथ ही यहां अत्याधुनिक जांच मशीन एवं उपचार की सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं ताकि जांच के बाद गंभीर बीमारी के मरीजों तत्काल उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। मरीज की स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल रेफर करने की भी व्यवस्था है।
जिले में 155 हेल्थ वेलनेस सेंटर चालू हैं। अन्य 206 सेंटर जल्द ही बनकर तैयार हो जाएंगे। जो सेंटर तैयार हो चुके हैं वहां सीएचओ की तैनाती कर चिकित्सा सेवा शुरू कराई जाएगी। - डॉ. केके वर्मा, एसीएमओ