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Ghazipur News: हे भगवान! ई कइसन दिन देखवला...हमहन का बिगड़ले रहली
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अरे हमार लाल कहां बाटे, काहे नाहीं खोल के मुहवा दिखावत हव। इतना दिन से नेपाल में तोहन क का करत रहल... हे भगवान! ई कइसन दिन देखवला.....। हमहन का बिगड़ले रहली हं कि अपने लाइकन क अर्थी देखे के भी ना मिलल....बिलखते परिजनों की ये दर्द भरी गुहार जिसने भी सुनी उसके आंसू रुक न सके। नेपाल में हुए विमान हादसे में अपने बेटों को खोने के बाद उनके अंतिम दर्शन भी न कर पाने वाली मांए कभी अपने भाग्य को कोस रहीं थीं तो कभी ऊपर वाले से न्याय की गुहार लगा रही थीं। हृदयविदारक दृश्य ने कड़े दिल के लोगों के आंखों में भी आंसू ला दिया।
मंगलवार दस दिन बाद जैसे ही चारों दोस्तों के शव उनके पैतृक गांव पहुंचे तो एक बार फिर दर्द हरा हो गया। लाल के अंतिम दर्शन की इच्छा मन में ही रह गई। हादसे में शवों की हालत बेहद खराब हो गई थी जिसकी वजह से ताबूत खोलने नहीं दिया। परिजन छटपटाते रह गए और उनका कोई बस नहीं चला।
अभी 12 जनवरी को ही तो उन मांओं ने बेटों को आशीर्वाद देकर पशुपतिनाथ दर्शन के लिए घर से रवाना किया था। 15 जनवरी को पोखरा में विमान के उतरने से चंद मिनट पहले ही तो सोनू जायसवाल फेसबुक पर लाइव था और दोस्तों और परिजनों को पोखरा का नजारा दिखा रहा था। लेकिन तीसरे ही दिन चारों के परिवार की दुनिया में तक अंधेरा छा गया जब खबर मिली कि काठमांडू से पोखरा जा रहा उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और सभी यात्री मारे गए।
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परिजन 16 जनवरी को अपने लाडले के शव को लेने के लिए काठमांडू गए। वहां पर नौ दिन शव की शिनाख्त के लिए रुकना पड़ा। शायद ही किसी का भी शव सही सलामत मिला हो। परिजन आधा-अधूरा शरीर ताबूत में लेकर एंबुलेंस से 23 जनवरी को काठमांडू से रवाना हुए। सुबह 9 बजे जैसे ही सभी के शव गांव पहुंचे, अंतिम दर्शन करने के लिए मां-बहनें एवं परिजन छाती पीट-पीटकर देखने के लिए व्याकुल हो गए, लेकिन वहां पर मौजूद लोगों ने अपने हृदय पर पत्थर रख केवल ताबूत को दिखाकर लौटा दे रहे थे। एक घंटे के आपाधापी के बाद प्रशासन सभी के शव अलग अलग गाड़ियों के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए गंगा घाट भेजवा दिया। फिर भी अपने लाडले के अंतिम दर्शन के लिए चारों युवकों की मां एवं बहाने तरसती रह गई।
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मंगलवार दस दिन बाद जैसे ही चारों दोस्तों के शव उनके पैतृक गांव पहुंचे तो एक बार फिर दर्द हरा हो गया। लाल के अंतिम दर्शन की इच्छा मन में ही रह गई। हादसे में शवों की हालत बेहद खराब हो गई थी जिसकी वजह से ताबूत खोलने नहीं दिया। परिजन छटपटाते रह गए और उनका कोई बस नहीं चला।
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अभी 12 जनवरी को ही तो उन मांओं ने बेटों को आशीर्वाद देकर पशुपतिनाथ दर्शन के लिए घर से रवाना किया था। 15 जनवरी को पोखरा में विमान के उतरने से चंद मिनट पहले ही तो सोनू जायसवाल फेसबुक पर लाइव था और दोस्तों और परिजनों को पोखरा का नजारा दिखा रहा था। लेकिन तीसरे ही दिन चारों के परिवार की दुनिया में तक अंधेरा छा गया जब खबर मिली कि काठमांडू से पोखरा जा रहा उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और सभी यात्री मारे गए।
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परिजन 16 जनवरी को अपने लाडले के शव को लेने के लिए काठमांडू गए। वहां पर नौ दिन शव की शिनाख्त के लिए रुकना पड़ा। शायद ही किसी का भी शव सही सलामत मिला हो। परिजन आधा-अधूरा शरीर ताबूत में लेकर एंबुलेंस से 23 जनवरी को काठमांडू से रवाना हुए। सुबह 9 बजे जैसे ही सभी के शव गांव पहुंचे, अंतिम दर्शन करने के लिए मां-बहनें एवं परिजन छाती पीट-पीटकर देखने के लिए व्याकुल हो गए, लेकिन वहां पर मौजूद लोगों ने अपने हृदय पर पत्थर रख केवल ताबूत को दिखाकर लौटा दे रहे थे। एक घंटे के आपाधापी के बाद प्रशासन सभी के शव अलग अलग गाड़ियों के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए गंगा घाट भेजवा दिया। फिर भी अपने लाडले के अंतिम दर्शन के लिए चारों युवकों की मां एवं बहाने तरसती रह गई।