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नवंबर से पहले पुल बनने के आसार नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Mon, 13 Jun 2016 11:00 PM IST
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नवंबर से पहले पुल बनने के आसार नहीं
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प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव ने गाजीपुर की सीमा को जोड़ने वाली सैदपुर-सकलडीहा वाया चंदौली मार्ग तथा गंगा नदी पर बनने वाले पक्का पुल का निर्माण एक माह में पूरा कराने की बात कही है। लेकिन निर्माण की गति देखकर इसे एक माह में तैयार होने की संभावना कम ही दिख रही है। हालांकि विभागीय अफसर नवंबर तक कार्य पूरा करने की संभावना जता रहे हैं। उनका कहना है कि गंगा पर मारूफपुर घाट से चहनिया होते हुए चंदौली के लिए बनाए जा रहे पक्का पुल से वाराणसी में होने वाली जाम की समस्या से लोगों को मुक्ति मिल जाएगी।
सैदपुर-चंदौली मार्ग बनकर लगभग तैयार है। नदी पर बनने वाले पुल के साथ चंदौली क्षेत्र में एप्रोच का निर्माण जरूरी है, ताकि यह मार्ग जिले को जोड़ सके। उधर सैदपुर से मारूफपुर (चहनिया होते हुए चंदौली) पुल का भी निर्माण कार्य चल रहा है। इस पुल का शिलान्यास सात जून 1997 को सैदपुर विधानसभा के विधायक (वर्तमान में चंदौली के सांसद) तथा पंचायतीराज मंत्री डा. महेंद्रनाथ पांडेय के प्रयास से तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री कलराज मिश्र ने किया था।
मई 2000 में कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की तरफ से कार्य शुरू किया गया। लेकिन 2002 में धन की कमी के चलते कार्य बंद कर दिया गया। सामान अन्य निर्माण स्थानों को भेजे जाने लगा। तब सैदपुर एवं चंदौली क्षेत्र के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया था। वर्ष 2005 में जन दबाव के चलते निर्माण कार्य आरंभ हुआ। धीमी गति से होते काम के बाद भी वर्ष 2012 तक लगभग 65 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया।
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वर्ष 2012-13 में निर्माण कार्य सिंपलेक्स प्रोजेक्ट लिमिटेड को दे दिया गया। लगभग डेढ़ वर्ष तक कार्य प्रगति शून्य रहने पर सेतु निगम को फिर निर्माण सौंपा गया। गंगा नदी पर 43 पाए पर बनने वाले इस पुल की लंबाई 1755 मीटर और चौड़ाई साढ़े 7 मीटर है। नदी के पांच पाए नदी के निरंतर प्रवाह के क्षेत्र में हैं।
जबकि 32 से 37 पाए बाढ़ के समय पानी से प्रभावित होंगे। एक अरब रुपये से ज्यादा की लागत के इस पुल के नवंबर तक बनने की पूरी संभावना है। दिसंबर में यातायात के लिए पुल को संबंधित एजेंसी (लोक निर्माण विभाग) को हस्तांतरित किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड की ओर से बनाए जा रहे इस पुल का निर्माण कार्य 95 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।
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सैदपुर-चंदौली मार्ग बनकर लगभग तैयार है। नदी पर बनने वाले पुल के साथ चंदौली क्षेत्र में एप्रोच का निर्माण जरूरी है, ताकि यह मार्ग जिले को जोड़ सके। उधर सैदपुर से मारूफपुर (चहनिया होते हुए चंदौली) पुल का भी निर्माण कार्य चल रहा है। इस पुल का शिलान्यास सात जून 1997 को सैदपुर विधानसभा के विधायक (वर्तमान में चंदौली के सांसद) तथा पंचायतीराज मंत्री डा. महेंद्रनाथ पांडेय के प्रयास से तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री कलराज मिश्र ने किया था।
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मई 2000 में कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की तरफ से कार्य शुरू किया गया। लेकिन 2002 में धन की कमी के चलते कार्य बंद कर दिया गया। सामान अन्य निर्माण स्थानों को भेजे जाने लगा। तब सैदपुर एवं चंदौली क्षेत्र के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया था। वर्ष 2005 में जन दबाव के चलते निर्माण कार्य आरंभ हुआ। धीमी गति से होते काम के बाद भी वर्ष 2012 तक लगभग 65 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया।
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वर्ष 2012-13 में निर्माण कार्य सिंपलेक्स प्रोजेक्ट लिमिटेड को दे दिया गया। लगभग डेढ़ वर्ष तक कार्य प्रगति शून्य रहने पर सेतु निगम को फिर निर्माण सौंपा गया। गंगा नदी पर 43 पाए पर बनने वाले इस पुल की लंबाई 1755 मीटर और चौड़ाई साढ़े 7 मीटर है। नदी के पांच पाए नदी के निरंतर प्रवाह के क्षेत्र में हैं।
जबकि 32 से 37 पाए बाढ़ के समय पानी से प्रभावित होंगे। एक अरब रुपये से ज्यादा की लागत के इस पुल के नवंबर तक बनने की पूरी संभावना है। दिसंबर में यातायात के लिए पुल को संबंधित एजेंसी (लोक निर्माण विभाग) को हस्तांतरित किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड की ओर से बनाए जा रहे इस पुल का निर्माण कार्य 95 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।