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Ghazipur News: पराली जलाने की जरूरत नहीं, कैप्सूल से बनेगी खाद, बढ़ेगी उर्वरा शक्ति

Sun, 24 Nov 2024 04:38 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 24 Nov 2024 04:38 AM IST
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No need to burn stubble, capsules will make fertilizer, fertility will increase
गाजीपुर। किसानों को खेत में पराली जलाने की जरूरत नहीं है, बल्कि डी-कंपोजर कैप्सूल के जरिए इसको खाद बनाया जा सकता है। विशेष बात ये है कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। कृषि विभाग के पास 5000 डी-कंपोजर कैप्सूल आई है। विभाग की ओर से इसे 16 ब्लाॅकों पर स्थित राजकीय कृषि बीज भंडारों पर भेजवा दिया गया है।
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पराली को जलाया जाना ज्वलंत समस्या बनी हुई है। इसको लेकर न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी कीमत पर पराली जलने न पाए। इसे लेकर जिला प्रशासन व कृषि विभाग गंभीर है। वैसे पराली के निस्तारण को लेकर उसको जला दिया जाता है। इससे वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है। लेकिन, अब शासन स्तर पर पहल करते हुए जिले में डी-कंपोजर कैप्सूल भेजवाई गई है। इसके जरिए जैविक तरीके से पराली का निस्तारण संभव है। विशेष बात ये है कि डी-कंपोजर कैप्सूल पूरी तरह से निशुल्क है। वहीं एक महीने के अंदर जिले के सात स्थानों पर पराली जलाने का मामला प्रकाश में आ चुका है। कार्रवाई करते हुए सभी पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कुल 35 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। पराली व कूड़ा जलाने वालों की मानीटरिंग सेटेलाइट के जरिए की जा रही है।
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एक कैप्सूल एक एकड़ पराली को बना देगा खाद
गाजीपुर। एक डी कंपोजर कैप्सूल के जरिए एक एकड़ में पराली को जैविक खाद में बदलने की क्षमता होती है। 200 लीटर पानी में दो किलो गुड़ के साथ डी कंपोजर कैप्सूल का घोल तैयार करना चाहिए। इसके बाद इसका पराली के ऊपर छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव के बाद पराली में तेजी से छेदन प्रक्रिया होती है। 12 दिनों के अंदर पराली जैविक खाद के रूप में तब्दील हो जाती है।
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किसानों की आय में होगा इजाफा
गाजीपुर। डी कंपोजर कैप्सूल से पराली को जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया के दौरान खेत की मृदा की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। इससे उत्पादन में वृद्धि होगी। उत्पादन में इजाफा होने से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। जिले में साढ़े पांच लाख किसान हैं। दो लाख हेक्टेयर में धान, गेहूं, सब्जी, मक्का, टीसी, जौ, सरसो आदि फसलों की खेती की जाती है। जिले की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है।

जिले में पांच हजार डी-कंपोजर कैप्सूल आई है। इसको जनपद के 16 ब्लाॅकों पर स्थित राजकीय कृषि बीज भंडारों पर भेजवा दिया गया है। इसका वितरण पूरी तरह से निशुल्क किया जाएगा। कैप्सूल पराली को जैविक खाद के रूप में परिवर्तित कर देगा। अतींद्र सिंह, उप कृषि निदेशक
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