Nepal Plane Crash: गोरखपुर के रास्ते गाजीपुर लौटने वाले थे चारों दोस्त, उन युवकों की कहानी जिन्होंने गंवाई जान
नेपाल में जिन पांच भारतीयों की विमान हादसे में मौत हुई उसमें से चार युवक गाजीपुर जिले के बरेसर क्षेत्र के आस-पास के गांव के रहने वाले हैं। वो कई बार ऐसी यात्राओं पर जा चुके थे। उनके एक साथ यात्रा करने और दोस्ती से पूरा बरेसर क्षेत्र वाकिफ था। 10 किमी के दायरे में गांव होने से उनके परिवार, रिश्तेदार और आस-पास के लोग एक-दूसरे को बखूबी जानते थे।
इससे सभी उनकी किसी भी यात्रा को लेकर बेहद सुरक्षित महसूस करते थे। वह पोखरा के बाद गोरखपुर के रास्ते घर लौटने ही वाले थे कि रविवार को अनहोनी की सूचना मिल गई। चार मित्रों की मौत की खबर से गाजीपुर सहित पूरा इलाका मर्माहत हो गया। देर रात से लेकर सोमवार सुबह तक लोग 10 किमी के दायरे में एक से दूसरे गांव आंसुओं का सैलाब लेकर पहुंचते रहे। मंजर ऐसा था कि गलियां, मकान, दुकान सब काटने को दौड़ रहा था।
सोनू जायसवाल से पांच साल बड़े और मामा के लड़के सिऊरी अमहट निवासी अरुण जायसवाल ने बताया कि हादसे के कुछ देर बाद ही फेसबुक पर उसका वीडियो देखा। करीब एक मिनट का वीडियो था। पहले तो मैं समझ नहीं पाया कि हुआ क्या है। लेकिन आग जलती देख हादसे की आशंका में डूब गया। तब तक थाने से हादसे की जानकारी मिली।
बगल का गांव होने से तुरंत चकजैनब पहुंचा। वहां हादसे की जानकारी आ चुकी थी। उन्होंने बताया कि करीब 11.15 बजे विमान वहां पहुंचा था। तभी हादसा हुआ है। बीते शुक्रवार को ही वो काठमांडू पहुंचे थे। इसके बाद झील देखने और पर्यटक स्थल घूमने पोखरा जा रहे थे। इससे पहले पशुपतिनाथ के नजदीक एक होटल में रुके थे। पोखरा घूमने के बाद उनका गोरखपुर के रास्ते घर आने की योजना थी।
चकजैनब निवासी राजेंद्र जायसवाल के पुत्र सोनू जायसवाल पांच भाइयों में सबसे छोटे थे। वह वाराणसी में शराब की दुकान का संचालन करते थे। सारनाथ में पत्नी रागिनी जायसवाल, एक पुत्र और पुत्रियों के साथ रहते थे। हादसे के बाद पिता राजेंद्र जायसवाल और मां द्रौपदी देवी रोते-रोते अचेत हो जा रहे हैं। परिवार के लोग सोनू जायसवाल की पत्नी और बच्चों को सोमवार को लेकर घर पहुंचे।
अलावलपुर अफ्गां निवासी विशाल शर्मा टीवीएस बाइक एजेंसी में फाइनेंस का काम करते थे। चकजैनब गांव से करीब आठ किलोमीटर रहने वाले विशाल शर्मा भी मित्रों के साथ पोखरा गए थे। तीन बहनों और भाई विश्वजीत, पिता संतोष शर्मा और माता सरिता देवी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। गांव के लोग उन्हें समझाने में जुटे रहे।