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Ghazipur News: बारिश रूठी, बिजली भी खफा...ट्यूबवेल के दम पर धान रोपाई
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जुलाई माह में नौ दिन ही शेष, कम बारिश से अब तक 70 फीसदी ही हो सकी धान की रोपाई
1.47 लाख हेक्टेयर में धान की खेती, जून और जुलाई माह रोपाई के लिए तय
अब तक जिले में 119 मिलीमीटर हुई बारिश, पिछली बार से 35 एमएम है कम
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जुलाई माह खत्म होने में नौ दिन ही शेष हैं, ऐसे में जनपद में अब तक लक्ष्य का मात्र 70 फीसदी ही खेतों में धान की रोपाई हो सकी है। वजह पर्याप्त बारिश न होने के कारण धान रोपाई की स्थिति ठीक नहीं हैं। करीब 1.47 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होनी हैं, जो जून और जुलाई माह में पूरी हो जाती थी। लेकिन बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार मात्र 119 मिलीमीटर ही बारिश ने रोपाई प्रभावित होने की चिंता किसानों के चेहरे पर साफ झलक रही हैं। यहीं नहीं कहीं लो वोल्टेज तो कहीं ट्रांसफार्मर जलने से पानी की समस्या तो परेशानी का सबब तो बनी ही हुई है, वहीं मजदूरों के ना मिलने की समस्या भी धान रोपाई के आड़े आ रही है।
जनपद में करीब दो लाख हेक्टेयर से अधिक खेती योग्य भूमि पर किसान अनाज और सब्जी का उत्पादन करते हैं। इस बार एक लाख 47 हजार हेक्टेयर पर धान की खेती होनी है। जबकि शेष खेती योग्य भूमि अन्य फसल की खेती की जाती है। ऐसे में पर्याप्त बारिश न होने के कारण अभी भी अधिकांश क्षेत्रों में धान की रोपाई नहीं हो सकी है।
यह वैसे क्षेत्र हैं, जहां न तो सरकारी ट्यूबवेल हैं और न ही नहर की सुविधा हैं। निजी ट्यूबवेल के सहारे उनकी खेती होती है, लेकिन ऐसे में एक पखवारे से जले ट्रांसफार्मर और पर्याप्त बिजली आपूर्ति न होने से रोपाई प्रभावित हो रही है। मुहम्मदाबाद के नोनहरा गांव में करीब 15 दिनों से ट्रांसफार्मर जला हुआ, जिससे अधिकांश किसानों की धान रोपाई नहीं हो सकी है।
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अगर बारिश की बात की जाए तो वर्ष 2022 के जुलाई माह में 154.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि इस बार इस माह में 119 मिलीमीटर ही बारिश होना परेशानी का मुख्य कारण बना हुआ है। ऐसे में लक्ष्य के अनुरूप धान की रोपाई न होने से उत्पादन पर भी असर पड़ने की संभावना किसानों द्वारा जताई जा रही है।
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जिले में अब तक 70 फीसद धान की रोपाई हुई है। बारिश कम होने से प्रभावित हुई है। वैसे किसान ट्यूबवेल के पानी से खेतों की सिंचाई कर धान रोपाई में जुटे हुए हैं।
- उमेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी गाजीपुर।
कहीं उड़ रही धूल तो खाली पड़े खेत
बारा। पिछले कई दिनों से बारिश न होने और तेज धूप निकलने से जहां लोग बेहाल हैं, वहीं किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। वह धान की रोपाई पंपिंग सेट से करने के लिए विवश हैं। वहीं अधिकांश किसान मूसलधार बारिश होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बारा, कुतुबपुर, मगरखाई, हरिकरनपुर, भतौरा, दलपतपुर, रोइनी, गहमर, खुदरा, करहिया, सायर, बरेजी, मनिया, गोड़सरा आदि गांवों में धान की रोपाई न हो पाने से खेत खाली पड़े हुए हैं। बिरनो क्षेत्र के कई गांवों में बारिश के अभाव में खेतों में धूल उड़ रही है। सामान्य बोरिंग वाले ट्यूबवेलों ने पानी छोड़ दिया है। ऐसे में ये किसान या तो हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं या फिर आजिज होकर महंगे दर पर सिंचाई करने को विवश हैं।
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बरसात कम होने से धान की रोपाई करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। निजी ट्यूबवेल का सहारा ले पड़ रहा है। ऐसे में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।- गोपाल जी राय
बरसात तो कम हुई ही है, रोपाई न होने और पिछड़ने का एक और कारण है मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में अभी कई खेत धान रोपाई से वंचित हैं।- बब्बन कुशवाहा।
एक तरफ बारिश ने धोखा दिया तो दूसरी तरफ पर्याप्त बिजली आपूर्ति न होने की स्थिति में खेत की सिंचाई नहीं हो पा रही है और धान की खेती इस बार पिछड़ने का भय सता रहा है।- मनोज राजभर
धान की कम रोपाई का सबसे बड़ा कारण मौसम की बेरूखी है। समय से कम बरसात और बिजली कटौती किसानों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। ओमप्रकाश राय।
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1.47 लाख हेक्टेयर में धान की खेती, जून और जुलाई माह रोपाई के लिए तय
अब तक जिले में 119 मिलीमीटर हुई बारिश, पिछली बार से 35 एमएम है कम
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जुलाई माह खत्म होने में नौ दिन ही शेष हैं, ऐसे में जनपद में अब तक लक्ष्य का मात्र 70 फीसदी ही खेतों में धान की रोपाई हो सकी है। वजह पर्याप्त बारिश न होने के कारण धान रोपाई की स्थिति ठीक नहीं हैं। करीब 1.47 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होनी हैं, जो जून और जुलाई माह में पूरी हो जाती थी। लेकिन बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार मात्र 119 मिलीमीटर ही बारिश ने रोपाई प्रभावित होने की चिंता किसानों के चेहरे पर साफ झलक रही हैं। यहीं नहीं कहीं लो वोल्टेज तो कहीं ट्रांसफार्मर जलने से पानी की समस्या तो परेशानी का सबब तो बनी ही हुई है, वहीं मजदूरों के ना मिलने की समस्या भी धान रोपाई के आड़े आ रही है।
जनपद में करीब दो लाख हेक्टेयर से अधिक खेती योग्य भूमि पर किसान अनाज और सब्जी का उत्पादन करते हैं। इस बार एक लाख 47 हजार हेक्टेयर पर धान की खेती होनी है। जबकि शेष खेती योग्य भूमि अन्य फसल की खेती की जाती है। ऐसे में पर्याप्त बारिश न होने के कारण अभी भी अधिकांश क्षेत्रों में धान की रोपाई नहीं हो सकी है।
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यह वैसे क्षेत्र हैं, जहां न तो सरकारी ट्यूबवेल हैं और न ही नहर की सुविधा हैं। निजी ट्यूबवेल के सहारे उनकी खेती होती है, लेकिन ऐसे में एक पखवारे से जले ट्रांसफार्मर और पर्याप्त बिजली आपूर्ति न होने से रोपाई प्रभावित हो रही है। मुहम्मदाबाद के नोनहरा गांव में करीब 15 दिनों से ट्रांसफार्मर जला हुआ, जिससे अधिकांश किसानों की धान रोपाई नहीं हो सकी है।
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अगर बारिश की बात की जाए तो वर्ष 2022 के जुलाई माह में 154.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि इस बार इस माह में 119 मिलीमीटर ही बारिश होना परेशानी का मुख्य कारण बना हुआ है। ऐसे में लक्ष्य के अनुरूप धान की रोपाई न होने से उत्पादन पर भी असर पड़ने की संभावना किसानों द्वारा जताई जा रही है।
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जिले में अब तक 70 फीसद धान की रोपाई हुई है। बारिश कम होने से प्रभावित हुई है। वैसे किसान ट्यूबवेल के पानी से खेतों की सिंचाई कर धान रोपाई में जुटे हुए हैं।
- उमेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी गाजीपुर।
कहीं उड़ रही धूल तो खाली पड़े खेत
बारा। पिछले कई दिनों से बारिश न होने और तेज धूप निकलने से जहां लोग बेहाल हैं, वहीं किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। वह धान की रोपाई पंपिंग सेट से करने के लिए विवश हैं। वहीं अधिकांश किसान मूसलधार बारिश होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बारा, कुतुबपुर, मगरखाई, हरिकरनपुर, भतौरा, दलपतपुर, रोइनी, गहमर, खुदरा, करहिया, सायर, बरेजी, मनिया, गोड़सरा आदि गांवों में धान की रोपाई न हो पाने से खेत खाली पड़े हुए हैं। बिरनो क्षेत्र के कई गांवों में बारिश के अभाव में खेतों में धूल उड़ रही है। सामान्य बोरिंग वाले ट्यूबवेलों ने पानी छोड़ दिया है। ऐसे में ये किसान या तो हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं या फिर आजिज होकर महंगे दर पर सिंचाई करने को विवश हैं।
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बरसात कम होने से धान की रोपाई करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। निजी ट्यूबवेल का सहारा ले पड़ रहा है। ऐसे में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।- गोपाल जी राय
बरसात तो कम हुई ही है, रोपाई न होने और पिछड़ने का एक और कारण है मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में अभी कई खेत धान रोपाई से वंचित हैं।- बब्बन कुशवाहा।
एक तरफ बारिश ने धोखा दिया तो दूसरी तरफ पर्याप्त बिजली आपूर्ति न होने की स्थिति में खेत की सिंचाई नहीं हो पा रही है और धान की खेती इस बार पिछड़ने का भय सता रहा है।- मनोज राजभर
धान की कम रोपाई का सबसे बड़ा कारण मौसम की बेरूखी है। समय से कम बरसात और बिजली कटौती किसानों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। ओमप्रकाश राय।