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टूटी माइनर में छोड़ा पानी, फसल डूबी
ब्यूरो अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Mon, 18 Jan 2016 11:27 PM IST
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मौसम की मार से किसान बेजार हैं। सिंचाई विभाग की लापरवाही ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। गत 12 जनवरी को सुगवलिया के पास पूरी क्षमता से पानी छोड़ने के कारण माइनर टूट गई और किसानों की फसलेें डूब गई थीं। किसानों
की शिकायत पर पानी बंद कर दिया गया लेकिन मरम्मत नहीं की गई। रविवार की देर शाम फिर माइनर में पानी छोड़ दिया गया, जिससे सारा पानी खेतों में फैल गया। तीन गांवों के करीब 28 किसानों की लगभग 80 बीघे की गेहूं, सरसों, मटर, चना और मसूर की फसल डूब गई है।
मंगलवार को नहर टूटने के बाद किसानों ने उपजिलाधिकारी धीरेंद्र प्रताप से शिकायत की थी। जमानिया के उप जिलाधिकारी ने नहर विभाग के अधिकारियों को तुरंत पानी बंद करने और माइनर की मरम्मत कराने के बाद ही
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पानी छोड़ने को कहा था। इसके बाद भी एसडीएम के आदेश को दरकिनार करते हुए विभागीय लोगों ने बड़ौरा माइनर से रविवार की देर शाम पूरी क्षमता से पानी छोड़ दिया। इसके चलते सुगवलिया, सोनवल और खजुहा गांव में 28
किसानों की करीब 80 बिघे में बोई गई गेहूं, सरसों, चना, मटर, मसूर आदि की फसलें डूब गईं। पानी रेलवे लाइन तक जा पहुंचा है। नहर विभाग की उदासीनता के चलते फसल बर्बाद होने को लेकर किसानों में नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग दो दशक पूर्व इस माइनर का निर्माण लाखों की लागत से कराया गया था। ताड़ीघाट रजवाहा से लिंक यह माइनर अंधियारा, सोनवल, खजुहां, सुगवलियां, सुहवल, पटखौलिया होते बड़ौरा तक बननी थी
लेकिन इसका काम बीच में ही छोड़ दिया गया। इसकी कुल लंबाई लगभग ढाई किमी है। गांव के जामवंत सिंह, मंगन यादव, राम औतार यादव, नागेंद्र यादव, चन्नर सिंह, भागवत कुश्वाहा, झूल्लन राम, रामाधार, सिकंदर, हरिनाथ
यादव ने कहा कि मौसम की बेरुखी के चलते पहले ही फसलों को काफी नुकसान पहुंच चुका है और नहर विभाग की मनमानी इसी तरह जारी रही तो रही-सही खेती भी नष्ट हो जाएगी। उन्होंने नुकसान की भरपाई करने की मांग की है।
माइनर की मरम्मत किए बगैर पानी छोड़ने से किसानों को पहुंचे नुकसान को गंभीरता से लिया गया है। पानी तत्काल बंद करा दिया गया है। पानी छोड़ने के लिए जिम्मेदार विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।-धीरेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम जमानिया
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की शिकायत पर पानी बंद कर दिया गया लेकिन मरम्मत नहीं की गई। रविवार की देर शाम फिर माइनर में पानी छोड़ दिया गया, जिससे सारा पानी खेतों में फैल गया। तीन गांवों के करीब 28 किसानों की लगभग 80 बीघे की गेहूं, सरसों, मटर, चना और मसूर की फसल डूब गई है।
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मंगलवार को नहर टूटने के बाद किसानों ने उपजिलाधिकारी धीरेंद्र प्रताप से शिकायत की थी। जमानिया के उप जिलाधिकारी ने नहर विभाग के अधिकारियों को तुरंत पानी बंद करने और माइनर की मरम्मत कराने के बाद ही
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पानी छोड़ने को कहा था। इसके बाद भी एसडीएम के आदेश को दरकिनार करते हुए विभागीय लोगों ने बड़ौरा माइनर से रविवार की देर शाम पूरी क्षमता से पानी छोड़ दिया। इसके चलते सुगवलिया, सोनवल और खजुहा गांव में 28
किसानों की करीब 80 बिघे में बोई गई गेहूं, सरसों, चना, मटर, मसूर आदि की फसलें डूब गईं। पानी रेलवे लाइन तक जा पहुंचा है। नहर विभाग की उदासीनता के चलते फसल बर्बाद होने को लेकर किसानों में नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग दो दशक पूर्व इस माइनर का निर्माण लाखों की लागत से कराया गया था। ताड़ीघाट रजवाहा से लिंक यह माइनर अंधियारा, सोनवल, खजुहां, सुगवलियां, सुहवल, पटखौलिया होते बड़ौरा तक बननी थी
लेकिन इसका काम बीच में ही छोड़ दिया गया। इसकी कुल लंबाई लगभग ढाई किमी है। गांव के जामवंत सिंह, मंगन यादव, राम औतार यादव, नागेंद्र यादव, चन्नर सिंह, भागवत कुश्वाहा, झूल्लन राम, रामाधार, सिकंदर, हरिनाथ
यादव ने कहा कि मौसम की बेरुखी के चलते पहले ही फसलों को काफी नुकसान पहुंच चुका है और नहर विभाग की मनमानी इसी तरह जारी रही तो रही-सही खेती भी नष्ट हो जाएगी। उन्होंने नुकसान की भरपाई करने की मांग की है।
माइनर की मरम्मत किए बगैर पानी छोड़ने से किसानों को पहुंचे नुकसान को गंभीरता से लिया गया है। पानी तत्काल बंद करा दिया गया है। पानी छोड़ने के लिए जिम्मेदार विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।-धीरेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम जमानिया