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Ghazipur News: ब
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ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) जिले की जूट वॉल हैंगिंग की विदेशों में मांग है। पड़ोसी देश नेपाल में जूट वाॅल हैंगिंग की मांग ज्यादा है। जिले के उद्यमी सालाना 25 लाख से अधिक का जूट वॉल हैगिंग नेपाल निर्यात करते हैं।
जनपद के ध्रुवार्जुन, तराव, उतरौल, सौरी, पहाड़पुर, भितरी, शादियाबाद, कोलवर, मुस्लिमपुर, सम्मनपुर, पहाड़पुर आदि गांवों में जूट वॉल हैंगिंग बनाने का कार्य किया जाता है। इन गांवों में ज्यादातर लोगों के घरों में जूट वॉल हैंगिंग का काम होता है।
व्यवसाय से जिले में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 10 हजार लोग जुड़े हुए हैं। लॉकडाउन से पहले तक जिले से इटली तक जूट वॉल हैंगिंग निर्यात होता था। लॉकडाउन में इटली से निर्यात बंद हो गया। अब फिर से ऑर्डर पर सैंपल इटली भेजे गए हैं।
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सैंपल यूके व कतर में भी भेजे गएं हैं। वहीं बिचौलियों के माध्यम से जूट वॉल हैंगिंग का अभी भी आस्ट्रेलिया, टर्की आदि देशों में निर्यात किया जा रहा है।
बांग्लादेश में भी जूट वॉल हैंगिंग भेजा जाता था। हाल में बांग्लादेश में तख्तापलट होने के बाद इसका सीधा असर जूट वॉल हैंगिंग पर पड़ा है। देश के अंदर शिमला, मसूरी, मनाली, देहरादून, कोलकाता हैदराबाद आदि जगहों पर भी जूट वॉल हैंगिंग की काफी मांग है।
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जनपद के ध्रुवार्जुन, तराव, उतरौल, सौरी, पहाड़पुर, भितरी, शादियाबाद, कोलवर, मुस्लिमपुर, सम्मनपुर, पहाड़पुर आदि गांवों में जूट वॉल हैंगिंग बनाने का कार्य किया जाता है। इन गांवों में ज्यादातर लोगों के घरों में जूट वॉल हैंगिंग का काम होता है।
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व्यवसाय से जिले में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 10 हजार लोग जुड़े हुए हैं। लॉकडाउन से पहले तक जिले से इटली तक जूट वॉल हैंगिंग निर्यात होता था। लॉकडाउन में इटली से निर्यात बंद हो गया। अब फिर से ऑर्डर पर सैंपल इटली भेजे गए हैं।
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सैंपल यूके व कतर में भी भेजे गएं हैं। वहीं बिचौलियों के माध्यम से जूट वॉल हैंगिंग का अभी भी आस्ट्रेलिया, टर्की आदि देशों में निर्यात किया जा रहा है।
बांग्लादेश में भी जूट वॉल हैंगिंग भेजा जाता था। हाल में बांग्लादेश में तख्तापलट होने के बाद इसका सीधा असर जूट वॉल हैंगिंग पर पड़ा है। देश के अंदर शिमला, मसूरी, मनाली, देहरादून, कोलकाता हैदराबाद आदि जगहों पर भी जूट वॉल हैंगिंग की काफी मांग है।