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Lok Sabha Election: जब नेहरू व इंदिरा ने सरजू को दिया था मंत्री पद का ऑफर; गाजीपुर में CPI के संस्थापक रहे

Mon, 22 Apr 2024 08:27 PM IST
अमन विश्वकर्मा अंकुर शुक्ला, अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अंकुर शुक्ला, अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 22 Apr 2024 08:27 PM IST
सार

Lok Sabha Election: 1967 के आम चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के वीएस गहमरी एवं 1971 के चुनाव में श्रीनारायण सिंह को परास्त कर संसद पहुंचे। हालांकि 1977 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 

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Lok Sabha Election When jawahar lal Nehru and Indira gandhi offered ministerial post to Sarju Pandey
सरजू पांडेय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजीपुर कलेक्ट्रेट स्थित तहसील के सामने एक पार्क है, जिसे लोग सरजू पांडेय पार्क के नाम से जानते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले सरजू पांडेय गाजीपुर और रसड़ा सीट से दो-दो बार सांसद रहे हैं। यह पार्क जिले में आंदोलन स्थल के रूप में भी जाना जाता है।

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आए दिन यहां से धरना-प्रदर्शन की खबरें सामने आती हैं। हो भी क्यों न जिस सरजू पांडेय के नाम से पार्क है, वे हमेशा जुल्म के खिलाफ आवाज उठाते थे, और दूसरों को भी प्रेरणा देते थे। वे कहते थे, डरो मत, जुल्म के खिलाफ आवाज उठाओ। उन्होंने जीवन में विचारों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। जवाहर लाल नेहरू ने कांग्रेस में आने और मंत्री पद का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
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सरजू पांडेय ने जीवन पर्यंत दलितों व पिछड़ों के साथ रहकर उनके उत्थान के लिए संघर्ष किया। 1936 में वह कासिमाबाद में चल रहे कांग्रेस कौमी सेवादल में प्रशिक्षण प्राप्त कर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। उन्हें सामंतों से काफी चिढ़ थी। जमींदारों के जुल्म के घोर विरोधी थे। 1942 में उनके नेतृत्व में भीड़ ने कासिमाबाद थाने को फूंक कर उस पर तिरंगा फहरा दिया था। इस आंदोलन में उन्हें सर्वाधिक 42 साल की सजा हुई।

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लोकप्रियता भी बढ़ती गई

सरजू पांडेय जेल में वामपंथी साहित्य का अध्ययन किए। उसका प्रभाव उनके जीवन पर हमेशा रहा। करीब पांच साल जेल में रहने के बाद 1947 में देश के आजाद होने के बाद वह रिहा हुए।

उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की गाजीपुर शाखा का गठन किया, हारी बेगारी नजराना और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ सघन आंदोलन छेड़ दिए। उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई।

1957 में दूसरी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के शौकत उल्लाह अंसारी और मोहम्मदाबाद से विधानसभा का चुनाव एक साथ जीत कर सबको चकित कर दिए। कांग्रेस की प्रचंड लहर में भी चुनाव जीतने पर नेहरू ने संसद में पूछा था कौन है सरजू पाण्डेय। तब वह पीछे से हाथ उठाकर बोले मैं हूं। 

नेहरू ने उन्हें अपने कोट का गुलाब निकाल कर दिया। नेहरू और उनके बाद इंदिरा ने उन्हें कांग्रेस में आने मंत्री पद संभालने का ऑफर दिया। लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।

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