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कासिमाबाद क्षेत्र हजारों क्रांतिकारियों की सत्यनिष्ठा का गवाह

Thu, 13 Aug 2020 09:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2020 09:36 PM IST
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Kasimabad region witness the integrity of thousands of revolutionaries
कासिमाबाद। जब पूरा जनपद अंग्रेजी हुकूमत और उसकी क्रूरता से कराह रहा था। उस समय कासिमाबाद के क्रांतिकारी ने अपनी वीरता से इतिहास रच दिया। तब गोरों का अत्याचार चारो तरफ फैला हुआ था। बहुतों को जेल में बंद कर दिया गया था। पुरुष और महिलाएं घर छोड़ने को मजबूर थे। बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला पस्त नहीं हुआ और लड़ाई जारी रही। अंतत: क्रांति की ज्वाला ने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दी। उस दौर को गांव गिराव के लोग आज भी याद करके बखान करते सुने जाते हैं।
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नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया। इसके बाद उनके आह्वान पर 15 अगस्त 1942 को सरजू पांडेय के नेतृत्व में कासिमाबाद थाना परिसर में आग लगाकर हजारों क्रांतिकारियों ने थाने के सभी भाग को अपने कब्जे में ले लिया और तिरंगा लहरा दिया था। तब पूरा क्षेत्र जश्न के माहौल में डूब गया था। सबसे पहली आजादी पाने का गौरव इसी क्षेत्र ने प्राप्त किया। थाने में लूटपाट और आगजनी की घटना के बाद उन लोगों पर थाना फूंकने के आरोप में भारत सुरक्षा अधिनियम की धारा 35 और भारतीय दंड विधान की धारा 395 और 436 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। मुकदमे में सरजू पांडेय सहित 16 लोगों को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई गई। जिसमें छह-छह माह की कठोर सजा हुई थी। सरजू पांडेय ही एकमात्र ऐसे अभियुक्त थे जिन्होंने सीना चौड़ा करते हुए थाना फूूंकने में अपनी भूमिका को स्वीकार किया था। लेकिन लूटपाट करने से इनकार किया था। थाना फूंकने और लूटपाट करने के मामले में जिला न्यायाधीश ने 21 जनवरी 1943 को सरजू पांडेय सहित नवरंग, शक्कल, हरिद्वार, देवनंदन, मुरली पांडेय को 6 वर्ष की सजा सुनाई। वहीं महादेव और शिव को दस-दस वर्ष की सजा हुई थी। इस मामले में कुल 22 लोगों को दो-दो वर्ष जेल की हवा खानी पड़ी थी। कासिमाबाद क्षेत्र हजारों क्रांतिकारियों की सत्यनिष्ठा का गवाह बना और यहां के लोगों ने जिले में सबसे पहले तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाने में सफल रहे। सरजू पांडेय सहित सभी आंदोलनकारियों ने गाजीपुर जिला कारागार में ही अपनी सजा काटी थी। क्रांतिकारियों के इस साहस भरे कार्य के बाद आजादी के 70 वर्ष से ऊपर होने जा रहे हैं लेकिन कासिमाबाद थाना परिसर में आज तक आंदोलन से संबंधित कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ।
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पंडित जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति और अशोक स्तंभ स्थापना की मांग-
कासिमाबाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व सांसद कामरेड सरजू पांडेय के पौत्र सुमन पांडेय जो वर्तमान में अपनी ग्राम पंचायत उरहां जगदीशपुर के ग्राम प्रधान हैं, ने बताया कि हमारे ग्राम पंचायत में कुल पांच स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और हमारी न्याय पंचायत कटयां में कुल 36 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं। लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने भी देश के स्वतंत्रता आंदोलन को दलगत भावना से देखकर काम किया। यही कारण है कि स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाला क्षेत्र काफी पिछड़ गया। इनकी यादें जीवित रखने के लिए कासिमाबाद थाना परिसर के सामने स्थित तालाब को स्वतंत्रा संग्राम सेनानियों के नाम से पूर्ण रूप से विकसित किया जाना चाहिए तथा यहां पर तोड़ी गई प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति और अशोक स्तंभ के साथ आंदोलनकारियों की मूर्ति और पुस्तकालय की स्थापना होनी चाहिए । जिससे क्षेत्र के लोंगों को जानकारी हो सके कि यहां के लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी ।
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