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‘कबीर समरसता बनाए रखने वाले साहसी कवि ’
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साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में नगर के विवेकानंद कालोनी स्थित कैंप कार्यालय पर कबीर जयंती के मौके पर विचार गोष्ठी-सह कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कामेश्वर द्विवेदी की सरस वाणी वंदना से हुई। इसके बाद नवगीतकार डॉ. अक्षय पांडेय ने वर्तमान समय में कबीर की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए उनके जीवन संदर्भों से जुड़े तमाम प्रसंगों के द्वारा कबीर को जीवन भर सामाजिक संतुलन एवं समरसता बनाए रखने वाला साहसी कवि कहा।
कवि कामेश्वर द्विवेदी ने कबीर के काव्य की भाषिक संरचना पर प्रकाश डालते हुए अपने प्रबंध काव्य ‘गंगा’ से गंगा के महात्म्य को रेखांकित किया। अमरनाथ तिवारी अमर ने कबीर को निर्गुण ब्रह्म के उपासक, वाह्य आडंबरों का विरोधी, समाज-सुधारक संत कवि कहा। कवयित्री डॉ. सोनी पांडेय ने कबीर-काव्य में नारी निरूपण पर विशद् परिचर्चा की। कबीर के सामाजिक अवदान को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए अपनी नारी-विमर्श पर आधारित कई कविताओं को सुनाकर श्रोताओं को सोचने के लिए मजबूर कर दिया। अध्यक्षता करते हुए कवि हरिनारायण हरीश ने कबीर को हिंदी के श्रेष्ठ संत कवि के रूप में स्थापित करते हुए उनके काव्यात्मक अवदान के साथ ही भक्तिकाल की निर्गुण काव्य-धारा का श्रेष्ठ कवि सिद्ध किया। उन्होंने कर्ण एवं शकुंतला जैसे चरित्रों पर आधारित अपनी कविताओं को सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया। संगोष्ठी में प्रवीण तिवारी, संगीता तिवारी, संगीता श्रीवास्तव, हर्षिता तिवारी, आशुतोष पांडेय, राकेश श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।
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कवि कामेश्वर द्विवेदी ने कबीर के काव्य की भाषिक संरचना पर प्रकाश डालते हुए अपने प्रबंध काव्य ‘गंगा’ से गंगा के महात्म्य को रेखांकित किया। अमरनाथ तिवारी अमर ने कबीर को निर्गुण ब्रह्म के उपासक, वाह्य आडंबरों का विरोधी, समाज-सुधारक संत कवि कहा। कवयित्री डॉ. सोनी पांडेय ने कबीर-काव्य में नारी निरूपण पर विशद् परिचर्चा की। कबीर के सामाजिक अवदान को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए अपनी नारी-विमर्श पर आधारित कई कविताओं को सुनाकर श्रोताओं को सोचने के लिए मजबूर कर दिया। अध्यक्षता करते हुए कवि हरिनारायण हरीश ने कबीर को हिंदी के श्रेष्ठ संत कवि के रूप में स्थापित करते हुए उनके काव्यात्मक अवदान के साथ ही भक्तिकाल की निर्गुण काव्य-धारा का श्रेष्ठ कवि सिद्ध किया। उन्होंने कर्ण एवं शकुंतला जैसे चरित्रों पर आधारित अपनी कविताओं को सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया। संगोष्ठी में प्रवीण तिवारी, संगीता तिवारी, संगीता श्रीवास्तव, हर्षिता तिवारी, आशुतोष पांडेय, राकेश श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।
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