{"_id":"bb9f2106fb8ebb6e29dde5a76a6fcb78","slug":"japanese-mission-to-fulfill-reached-dream-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जापानी पहंुचे ड्रीम मिशन पूरा करने ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जापानी पहंुचे ड्रीम मिशन पूरा करने
संवाददाता/अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Thu, 08 Oct 2015 11:43 PM IST
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गंगा को निर्मल व अविरल बनाने के लिए जापान सरकार के सहयोग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम मिशन पर काम शुरू हो गया है। नमामि गंगे परियोजना के तहत शुक्रवार को जापानी दल ने नगर पंचायत के अध्यक्ष शशि सोनकर
और ईओ के साथ गंगा तटों का जायजा लिया। गंगा में मिलने वाले नालों की जानकारी ली और एसटीपी के चिह्नित भूखंड को देखा।
गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए तैयार किए गए प्रोजेक्ट के तहत जापान की टीम शुक्रवार को नगर में आई। जापानी टीम ने प्रोजेक्ट से जुड़े विभिन्न बिंदुओं का ब्योरेवार आंकलन किया। दल के प्रमुख जीफूजी एवं नीवाटीक्यो
के सह नेतृत्व में 17 सदस्यीय टीम ने पहले चरण में स्थानीय नगर पंचायत कार्यालय में नगर पंचायत अध्यक्ष शशि सोनकर और अधिशासी अधिकारी रामबचन यादव से नगर के गंगा तट पर बसावट और प्रतिदिन उसमें गिरने वाले
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अपशिष्टों की जानकारी ली। इसके बाद टीम के सदस्यों ने नगर के मध्य पानी टंकी में सेक्शन पंपिंग स्टेशन के लिए जगह देखी जिसे बाद में दल के सदस्यों ने निरस्त कर दिया। दल ने नगर के जौहर के जौहरगंज से रौजा महाल तक
के नगर पंचायत क्षेत्र में गिरने वाले कुल नौ नालों का निरीक्षण किया और दैनिक डिस्चार्ज के बारे में जानकारी ली। नगर के सभी अपशिष्टों के शोधन के लिए बनाए जाने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए गायघाट और कोट
घाट क्षेत्र में प्रस्तावित भूखंडों को देखा। दल के साथ जल निगम के कार्यकारी परियोजना अधिकारी एसके बर्मन, अतुल गुप्ता, नगर पंचायत के लेखा लिपिक सुरेंद्र सोनकर, विद्याधर, सभासद रविकांत साहनी, जीऊत यादव मौजूद थे।
सैदपुर की तस्वीर बदलने के आसार
क्योटो से काशी की तारतम्यता के बीच भविष्य में सैदपुर नगर की तस्वीर बदलने की संभावना है। गंगा संरक्षण मिशन (नमामि गंगे) परियोजना के क्रम में सैदपुर नगर क्षेत्र में शौचालयों और एसटीपी का निर्माण होना प्रस्तावित
है। नाले के पानी को गंगा में नहीं जाने दिया जाएगा।
जापानी टीम में शामिल एकमात्र भारतीय सदस्य विद्याधर सोनटके ने प्रोजेक्ट के बारे में बताया कि 2037 करोड़ रुपये
की आरंभिक राशि से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में काम होगा। यहां कई सौ नगरीय क्षेत्रों की बसावट है। वहीं राजस्थान, हिमाचल, हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और दिल्ली राज्यों के तमाम नगरीय क्षेत्रों का
अपशिष्ट सहायक नदियों के माध्यम से गंगा में गिरता है। ऐसे में गंगा संरक्षण मिशन (नमामि गंगे) परियोजना का स्वरूप और बृहद हो जाता है। जापान सरकार के सहयोग के क्रम में इससे जुटे 112 नगरों को क्रमबद्ध किया गया है।
इसके प्रथम चरण में वाराणसी, मिर्जापुर, चुनार, रामनगर, सैदपुर और गाजीपुर सहित छह तटीय नगरों पर कार्य कर उसके परिणामों का आंकलन किया जाएगा। इसके बाद 106 अन्य तटीय नगर क्षेत्रों में कार्य को मूर्त रूप दिया
जाएगा।
इस योजना के तहत सैदपुर में शौचालयों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा। गंगा में मिलने वाले नालों को एकल ड्रेन के माध्यम से एक जगह ले जाकर उसे एसटीपी में संशोधित किया जाएगा और पानी का बहाव
गंगा में नहीं होने दिया जाएगा। इससे निकलने वाले अपशिष्टों से खाद बनाई जाएगी। इसके लिए जलनिगम डीपीआर बना रहा है। नगर पंचायत अध्यक्ष शशि सोनकर ने बताया कि कोल्हुआघाट से रौजा के कोलघाट तक गिरने वाले नौ
नालो के गंदे पानी को एसटीपी तक लाया जाएगा। इसके माध्यम से संगत घाट के पास पानी को लिफ्ट करने के लिए पंपिंग स्टेेशन बनाया जाएगा। नगर के पूर्वी क्षेत्र में तीन एकड़ क्षेत्र में शोधन संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
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और ईओ के साथ गंगा तटों का जायजा लिया। गंगा में मिलने वाले नालों की जानकारी ली और एसटीपी के चिह्नित भूखंड को देखा।
गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए तैयार किए गए प्रोजेक्ट के तहत जापान की टीम शुक्रवार को नगर में आई। जापानी टीम ने प्रोजेक्ट से जुड़े विभिन्न बिंदुओं का ब्योरेवार आंकलन किया। दल के प्रमुख जीफूजी एवं नीवाटीक्यो
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के सह नेतृत्व में 17 सदस्यीय टीम ने पहले चरण में स्थानीय नगर पंचायत कार्यालय में नगर पंचायत अध्यक्ष शशि सोनकर और अधिशासी अधिकारी रामबचन यादव से नगर के गंगा तट पर बसावट और प्रतिदिन उसमें गिरने वाले
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अपशिष्टों की जानकारी ली। इसके बाद टीम के सदस्यों ने नगर के मध्य पानी टंकी में सेक्शन पंपिंग स्टेशन के लिए जगह देखी जिसे बाद में दल के सदस्यों ने निरस्त कर दिया। दल ने नगर के जौहर के जौहरगंज से रौजा महाल तक
के नगर पंचायत क्षेत्र में गिरने वाले कुल नौ नालों का निरीक्षण किया और दैनिक डिस्चार्ज के बारे में जानकारी ली। नगर के सभी अपशिष्टों के शोधन के लिए बनाए जाने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए गायघाट और कोट
घाट क्षेत्र में प्रस्तावित भूखंडों को देखा। दल के साथ जल निगम के कार्यकारी परियोजना अधिकारी एसके बर्मन, अतुल गुप्ता, नगर पंचायत के लेखा लिपिक सुरेंद्र सोनकर, विद्याधर, सभासद रविकांत साहनी, जीऊत यादव मौजूद थे।
सैदपुर की तस्वीर बदलने के आसार
क्योटो से काशी की तारतम्यता के बीच भविष्य में सैदपुर नगर की तस्वीर बदलने की संभावना है। गंगा संरक्षण मिशन (नमामि गंगे) परियोजना के क्रम में सैदपुर नगर क्षेत्र में शौचालयों और एसटीपी का निर्माण होना प्रस्तावित
है। नाले के पानी को गंगा में नहीं जाने दिया जाएगा।
जापानी टीम में शामिल एकमात्र भारतीय सदस्य विद्याधर सोनटके ने प्रोजेक्ट के बारे में बताया कि 2037 करोड़ रुपये
की आरंभिक राशि से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में काम होगा। यहां कई सौ नगरीय क्षेत्रों की बसावट है। वहीं राजस्थान, हिमाचल, हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और दिल्ली राज्यों के तमाम नगरीय क्षेत्रों का
अपशिष्ट सहायक नदियों के माध्यम से गंगा में गिरता है। ऐसे में गंगा संरक्षण मिशन (नमामि गंगे) परियोजना का स्वरूप और बृहद हो जाता है। जापान सरकार के सहयोग के क्रम में इससे जुटे 112 नगरों को क्रमबद्ध किया गया है।
इसके प्रथम चरण में वाराणसी, मिर्जापुर, चुनार, रामनगर, सैदपुर और गाजीपुर सहित छह तटीय नगरों पर कार्य कर उसके परिणामों का आंकलन किया जाएगा। इसके बाद 106 अन्य तटीय नगर क्षेत्रों में कार्य को मूर्त रूप दिया
जाएगा।
इस योजना के तहत सैदपुर में शौचालयों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा। गंगा में मिलने वाले नालों को एकल ड्रेन के माध्यम से एक जगह ले जाकर उसे एसटीपी में संशोधित किया जाएगा और पानी का बहाव
गंगा में नहीं होने दिया जाएगा। इससे निकलने वाले अपशिष्टों से खाद बनाई जाएगी। इसके लिए जलनिगम डीपीआर बना रहा है। नगर पंचायत अध्यक्ष शशि सोनकर ने बताया कि कोल्हुआघाट से रौजा के कोलघाट तक गिरने वाले नौ
नालो के गंदे पानी को एसटीपी तक लाया जाएगा। इसके माध्यम से संगत घाट के पास पानी को लिफ्ट करने के लिए पंपिंग स्टेेशन बनाया जाएगा। नगर के पूर्वी क्षेत्र में तीन एकड़ क्षेत्र में शोधन संयंत्र स्थापित किया जाएगा।