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क्या यह बिजली खैरात की है!
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गाजीपुर। नवरात्र में पूजा पंडाल बिजली की रोशनी से जगमग हैं। बिजली विभाग के रिकॉर्ड में नवरात्र में अकेले शहर क्षेत्र में चार सौ किलोवाट बिजली का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। जिले की एक भी पूजा समिति ने दुर्गापूजा के निमित्त बिजली कनेक्शन नहीं लिया है। समितियों का दावा है कि वे लाइट और साउंड के लिए जेनरेटर का इस्तेमाल कर रहीं हैं। ऐसे में चार सौ किलोवाट बिजली का अतिरिक्त लोड आया कहां से, यह बिजली विभाग भी नहीं समझ पा रहा है। जबकि, इसके एवज में विभाग को एक रुपये का राजस्व नहीं मिलने वाला।
कोयला संकट और लड़खड़ाए बिजली उत्पादन के बीच बिजली विभाग अतिरिक्त दबाव झेल रहा है। बिजली विभाग की मानें तो नवरात्र में बिजली आपूर्ति का लोड काफी बढ़ गया है। शहरी क्षेत्र में अकेले प्रतिदिन करीब 400 किलोवाट का लोड बढ़ा है। शहरी क्षेत्र में 61 पंडाल लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर पूरे जिले में कुल 396 बड़े-छोटे पंडाल लगे हैं। लेकिन, इन पंडालों पर बिजली आपूर्ति के लिए कोई कनेक्शन नहीं लिया गया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मौकों पर आयोजन समिति को किलोवाट के हिसाब से अस्थायी कनेक्शन दिया जाता है। समिति आवेदन करती है तो विभाग तुरंत कनेक्शन उपलब्ध कराता है। इस संबंध में शहर के कई आयोजकों का कहना है कि पंडालों में जेनरेटर की व्यवस्था की गई है। तीन से चार जेनरेटर भाड़े पर मंगाए गए हैं, और ज्यादातर जेनरेटर का ही उपयोग किया जा रहा है। हालांकि इससे इतर शहरी क्षेत्र में किसी भी पंडाल पर जेनरेटर चालू नहीं दिखा। वहां बिजली आपूर्ति होती रही।
कोयला संकट के बीच जिले में भी कई दिनों से रोस्टर सिस्टम अपनाकर बिजली आपूर्ति की जा रही है। कई क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर बिजली आपूर्ति ठप कर दी जाती है, जिससे आजकल कहीं भी 10 से 12 घंटे ही बिजली आपूर्ति हो पा रही है। विभाग की मानें तो बिजली को लेकर मचे हंगामे के बीच आयोजकों की ओर से कनेक्शन लेने में कोताही बरतना समस्या बढ़ाने वाला है। जबकि अमूमन एक किलोवाट का बिजली कनेक्शन लेने पर एक हजार रुपये का खर्च आता है। जो बहुत ज्यादा नहीं है, कोई भी समिति आसानी से इस खर्च को वहन कर सकती है।
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कोयला संकट और लड़खड़ाए बिजली उत्पादन के बीच बिजली विभाग अतिरिक्त दबाव झेल रहा है। बिजली विभाग की मानें तो नवरात्र में बिजली आपूर्ति का लोड काफी बढ़ गया है। शहरी क्षेत्र में अकेले प्रतिदिन करीब 400 किलोवाट का लोड बढ़ा है। शहरी क्षेत्र में 61 पंडाल लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर पूरे जिले में कुल 396 बड़े-छोटे पंडाल लगे हैं। लेकिन, इन पंडालों पर बिजली आपूर्ति के लिए कोई कनेक्शन नहीं लिया गया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मौकों पर आयोजन समिति को किलोवाट के हिसाब से अस्थायी कनेक्शन दिया जाता है। समिति आवेदन करती है तो विभाग तुरंत कनेक्शन उपलब्ध कराता है। इस संबंध में शहर के कई आयोजकों का कहना है कि पंडालों में जेनरेटर की व्यवस्था की गई है। तीन से चार जेनरेटर भाड़े पर मंगाए गए हैं, और ज्यादातर जेनरेटर का ही उपयोग किया जा रहा है। हालांकि इससे इतर शहरी क्षेत्र में किसी भी पंडाल पर जेनरेटर चालू नहीं दिखा। वहां बिजली आपूर्ति होती रही।
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कोयला संकट के बीच जिले में भी कई दिनों से रोस्टर सिस्टम अपनाकर बिजली आपूर्ति की जा रही है। कई क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर बिजली आपूर्ति ठप कर दी जाती है, जिससे आजकल कहीं भी 10 से 12 घंटे ही बिजली आपूर्ति हो पा रही है। विभाग की मानें तो बिजली को लेकर मचे हंगामे के बीच आयोजकों की ओर से कनेक्शन लेने में कोताही बरतना समस्या बढ़ाने वाला है। जबकि अमूमन एक किलोवाट का बिजली कनेक्शन लेने पर एक हजार रुपये का खर्च आता है। जो बहुत ज्यादा नहीं है, कोई भी समिति आसानी से इस खर्च को वहन कर सकती है।
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