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नहरों से उड़ रही धूल सिंचाई करना मुश्किल
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Mon, 06 Jun 2016 12:21 AM IST
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नहरों से उड़ रही धूल सिंचाई करना मुश्किल
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किसानों को सिंचाई की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। कभी बारिश का अभाव तो कभी बेतहाशा बिजली कटौती। रही सहीं कसर सिंचाई के संसाधनों की बदहाली पूरी कर दे रही है। जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लगे राजकीय नलकूप जहां खराब पड़े हैं वहीं कई जगहों पर स्थित नहरों से धूल उड़ रही है। अगस्ता गांव स्थित नहर, जखनिया के शारदा सहायक नहर, दिलदारनगर से होते हुए कर्मनाशा तक जाने वाली प्रमुख नहर, देवकली पंप कैनाल से दलपतपुर रजवाहा में इन दिनों धूल उड़ रही है।
दिलदारनगर ः क्षेत्र की प्रमुख नहर जमानिया के चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल से निकलती है। यह प्रमुख नहर जमानिया, दिलदारनगर, भदौरा, गहमर और बारा होते हुए कर्मनाशा क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई का साधन है। इसके सूख जाने से इन प्रमुख क्षेत्रों के किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान की नर्सरी डालने के लिए वह काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं। इस प्रमुख नहर से पचोखर, कुशी, ताजपुर कुर्रा और लहुआर गांव के क्षेत्रों में शाखाएं निकली हुई हैं लेकिन जब प्रमुख नहर में ही धूल उड़ रही है तो छोटी नहर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दुबिहा ः क्षेत्र के 15 गांवों की सिंचित भूमि की सिंचाई करने के लिए कई दशकों पहले देवकली पंप कैनाल से गड़ार ड्रेन होते हुए सरयू नदी में गिरने वाली दलपतपुर रजवाहा की कुल लंबाई करीब दस किलोमीटर है। जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते कई वर्षों से इस नहर में पानी ही नहीं छोड़ गया। इसके चलते नहर से जुटे किसान फसलों की सिंचाई के लिए निजी नलकूपों का सहारा ले रहे हैं।
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जखनिया ः क्षेत्र में आने वाली शारदा सहायक नहर में पानी न होने से किसानों को फसलों की सिंचाई करने में परेशानी उठानी पड़ रही है। कई दशक पहले ठेकमा रजवाहा से खुदाई कराकर करीब 60 किलोमीटर की दूरी तय कर नहर क्षेत्र के ताल के खेतों की सिंचाई करता है। प्रतिवर्ष नहर की सफाई एवं खुदाई के नाम पर लाखों रूपये खर्च किए जाते हैं लेकिन किसानों को कोई लाभ नहीं मिलता है। नहर का पानी क्षेत्र में नहीं आने से खेती प्रभावित हो रही है।
भदौरा ः क्षेत्र से होकर गहमर, बारा होते हुए कर्मनाशा में गिरने वाली प्रमुख नहर के सूख जाने से किसान धान की नर्सरी डालने से कतरा रहे हैं। इस प्रमुख नहर से भदौरा, बारा और गहमर के ताल की खेतों की सिंचाई किसानों की ओर से की जाती है। इन क्षेत्रों में धान की ही खेती अधिक होती है। इन क्षेत्रों के किसान मानसून शुरू होने से पहले ही नहर के पानी से धान की नर्सरी तैयार करने का काम करते थे लेकिन नहर में धूल उड़ने से किसान चिंतित हैं।
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दिलदारनगर ः क्षेत्र की प्रमुख नहर जमानिया के चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल से निकलती है। यह प्रमुख नहर जमानिया, दिलदारनगर, भदौरा, गहमर और बारा होते हुए कर्मनाशा क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई का साधन है। इसके सूख जाने से इन प्रमुख क्षेत्रों के किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान की नर्सरी डालने के लिए वह काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं। इस प्रमुख नहर से पचोखर, कुशी, ताजपुर कुर्रा और लहुआर गांव के क्षेत्रों में शाखाएं निकली हुई हैं लेकिन जब प्रमुख नहर में ही धूल उड़ रही है तो छोटी नहर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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दुबिहा ः क्षेत्र के 15 गांवों की सिंचित भूमि की सिंचाई करने के लिए कई दशकों पहले देवकली पंप कैनाल से गड़ार ड्रेन होते हुए सरयू नदी में गिरने वाली दलपतपुर रजवाहा की कुल लंबाई करीब दस किलोमीटर है। जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते कई वर्षों से इस नहर में पानी ही नहीं छोड़ गया। इसके चलते नहर से जुटे किसान फसलों की सिंचाई के लिए निजी नलकूपों का सहारा ले रहे हैं।
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जखनिया ः क्षेत्र में आने वाली शारदा सहायक नहर में पानी न होने से किसानों को फसलों की सिंचाई करने में परेशानी उठानी पड़ रही है। कई दशक पहले ठेकमा रजवाहा से खुदाई कराकर करीब 60 किलोमीटर की दूरी तय कर नहर क्षेत्र के ताल के खेतों की सिंचाई करता है। प्रतिवर्ष नहर की सफाई एवं खुदाई के नाम पर लाखों रूपये खर्च किए जाते हैं लेकिन किसानों को कोई लाभ नहीं मिलता है। नहर का पानी क्षेत्र में नहीं आने से खेती प्रभावित हो रही है।
भदौरा ः क्षेत्र से होकर गहमर, बारा होते हुए कर्मनाशा में गिरने वाली प्रमुख नहर के सूख जाने से किसान धान की नर्सरी डालने से कतरा रहे हैं। इस प्रमुख नहर से भदौरा, बारा और गहमर के ताल की खेतों की सिंचाई किसानों की ओर से की जाती है। इन क्षेत्रों में धान की ही खेती अधिक होती है। इन क्षेत्रों के किसान मानसून शुरू होने से पहले ही नहर के पानी से धान की नर्सरी तैयार करने का काम करते थे लेकिन नहर में धूल उड़ने से किसान चिंतित हैं।