सूडान से लौटे भारतीयों की आपबीती: एक सप्ताह नहीं सोए, घर की सताती रही याद, सरकार का जताया आभार
जब देश की नौ सेना की जहाज में सवार हुए तो जान में जान आई। देश वापसी पर सरकार और प्रधानमंत्री का जितना तहे दिल से धन्यवाद किया जाए, कम है। यह कहना था सूडान से घर वापस लौटे महेश राजभर और लालजी राजभर का।
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एक सप्ताह तक नहीं सोए थे, सुबह- शाम भोजन मिल जाता था, लेकिन डर और भय का आलम ऐसा था कि रूह कांप उठती थी। जब देश की नौ सेना की जहाज में सवार हुए तो जान में जान आई। देश वापसी पर सरकार और प्रधानमंत्री का जितना तहे दिल से धन्यवाद किया जाए, कम है। यह कहना था सूडान से घर वापस लौटे महेश राजभर और लालजी राजभर का।
गाजीपुर के बाराचवर ब्लाक के मटवा गांव निवासी लालजी राजभर ने बताया कि वह अक्टूबर माह में स्टील प्लांट में काम करने के गए थे। बताया कि बीते 23 अप्रैल सूडान में दंगा होने लगा। स्थिति काफी भयावह हो गई थी। अब समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे घर पहुंचा जाए, लेकिन जब बीते 25 अप्रैल को देश की नौसेना का जहाज आया तो ऐसा लगा कि ईश्वर ने प्रार्थना सुन ली और अब घर वापस लौट जाएंगे। बीते 26 तारीख को दिल्ली आए और वहां से सरकार ने वाराणसी भिजवाया। अब वाराणसी से प्रशासन द्वारा वाहन से घर छोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री का जितना धन्यवाद किया जाए कम हैं।
बैरान भदेसर के रहने वाले महेश राजभर ने बताया कि वह बीते 19 मार्च को एल्यूमिनयम प्लांट कंपनी में काम करने गए थे, लेकिन सूडान में गृह युद्ध की भयावहता को देख रूह कांप उठी। इस दृश्य को देख और सुनकर डर से बीते 15 अप्रैल से 22 अप्रैल तक सोया ही नहीं था। अब बस घर पहुंचने की चिंता सता रही थी। जब नौसेना का जहाज आया तो वह दृश्य देवदूत से कम नहीं था, जिन्होंने वहां से निकालकर सुरक्षित आज घर पहुंचाया।
लौलहा निवासी राधेश्याम यादव की पत्नी बृजबाला ने बताया कि पति छड़ बनाने की कंपनी में काम करने सूडान बीते अक्टूबर- नवंबर माह में गए थे। सरकार का धन्यवाद है कि वह घर सुरक्षित आ रहे हैं। मालूम हो कि गाजीपुर जनपद के सूडान में फंसे लालजी राजभर, राधेश्याम यादव, जितेंद्र और महेश राजभर को सरकार ने सुरक्षित घर वापसी करा दी है। देर शाम सभी लोग वाराणसी आ गए थे। वहां से स्थानीय प्रशासन द्वारा सकुशल घर पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था की गई थी।