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रेवतीपुर और देवकली में शुरू नहीं छात्रावास का निर्माण कार्य
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रेवतीपुर में स्थित जर्जर कस्तूरबा विद्यालय का भवन। संवाद
- फोटो : GHAZIPUR
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को बारहवीं तक की शिक्षा प्रदान की जानी है। इसके लिए दस ब्लाकों में इन विद्यालयों के छात्रावास का निर्माण कराया जाना है। इनमें से दो ब्लाकों रेवतीपुर एवं देवकली में अलग-अलग कारणों से हास्टल का निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। जबकि तीन ब्लाकों में आधा से अधिक तथा तीन विकास खंडों में अभी नींव तक ही काम हो सका है।
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से तमाम जतन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिले के सोलह में से चौदह विकासखंडों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना की गई है। इनमें कक्षा छह से आठ तक की छात्राओं को मुफ्त आवासीय शिक्षा दी जा रही है। आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद रहने की समस्या आदि होने के कारण कई छात्राएं आगे की शिक्षा से वंचित हो जाती थीं। उनकी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए इंटर तक की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विद्यालयों का उच्चीकरण कराया जा रहा है। इसके तहत जिले के दस विकासखंडों में छात्रावास का निर्माण कराया जाना है। जबकि इन दस में से तीन ब्लाकों में छात्रावास और एकेडमिक ब्लाक दोनों का निर्माण होगा। मरदह, जमानिया, सैदपुर, रेवतीपुर, सादात, देवकली, बाराचंवर, कासिमाबाद, जखनिया, सदर में छात्रावास का निर्माण होना है। एक करोड़ 77 लाख की लागत से प्रत्येक छात्रावास का निर्माण होना है। इससे सौ बेड का छात्रावास, वार्डेन एवं गार्ड रूम के अलावा पानी टंकी, शौचालय एवं मेस का निर्माण होगा। बताया गया है कि मनिहारी और बिरनो में इसका निर्माण पूरा हो चुका है।
रेवतीपुर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय का ध्वस्तीकरण न होने एवं देवकली में वन विभाग की लकड़ी डीएम के आदेश के बावजूद न हटाए जाने से यहां निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इसके अलावा सैदपुर में 60 प्रतिशत, जखनिया 75 तथा मरदह ब्लाक में करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सादात, कासिमाबाद और जमानिया में अभी नींव तक ही काम हो सका है।
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विद्यालयों में सौ-सौ सीटें निर्धारित
गाजीपुर। जिले में शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े जिन चौदह ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय खोले गए हैं वहां महिला साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत दर से कम है। जेंडर गैप राष्ट्रीय औसत दर से अधिक है। इन विद्यालयों में सौ-सौ सीटें निर्धारित की गई हैं। इसमें 75 प्रतिशत सीटें पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के प्रवेश के लिए निर्धारित हैं। जबकि 25 प्रतिशत सीटें सामान्य वर्ग की गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की बालिकाओं के प्रवेश के लिए है।
सबसे पहला विद्यालय सैदपुर में हुआ था स्थापित
गाजीपुर। जिले में पहला कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय सैदपुर विकासखंड क्षेत्र स्थित डायट परिसर में वर्ष 2005 में स्थापित हुआ था। इसके बाद अन्य ब्लाकों में इसकी स्थापना हुई। दो ब्लाकों भदौरा और करंडा में बालिकाओं की साक्षरता दर अधिक होने के कारण यहां पर यह विद्यालय नहीं खोले गए हैं।
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रेवतीपुर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय का ध्वस्तीकरण न होने और देवकली में वन विभाग की लकड़ी डीएम के आदेश के बाद भी नहीं हटाए जाने से यहां निर्माण शुरू नहीं हो सका है। यहां निर्माण का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।- अमित कुमार राय, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा।
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बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से तमाम जतन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिले के सोलह में से चौदह विकासखंडों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना की गई है। इनमें कक्षा छह से आठ तक की छात्राओं को मुफ्त आवासीय शिक्षा दी जा रही है। आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद रहने की समस्या आदि होने के कारण कई छात्राएं आगे की शिक्षा से वंचित हो जाती थीं। उनकी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए इंटर तक की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विद्यालयों का उच्चीकरण कराया जा रहा है। इसके तहत जिले के दस विकासखंडों में छात्रावास का निर्माण कराया जाना है। जबकि इन दस में से तीन ब्लाकों में छात्रावास और एकेडमिक ब्लाक दोनों का निर्माण होगा। मरदह, जमानिया, सैदपुर, रेवतीपुर, सादात, देवकली, बाराचंवर, कासिमाबाद, जखनिया, सदर में छात्रावास का निर्माण होना है। एक करोड़ 77 लाख की लागत से प्रत्येक छात्रावास का निर्माण होना है। इससे सौ बेड का छात्रावास, वार्डेन एवं गार्ड रूम के अलावा पानी टंकी, शौचालय एवं मेस का निर्माण होगा। बताया गया है कि मनिहारी और बिरनो में इसका निर्माण पूरा हो चुका है।
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रेवतीपुर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय का ध्वस्तीकरण न होने एवं देवकली में वन विभाग की लकड़ी डीएम के आदेश के बावजूद न हटाए जाने से यहां निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इसके अलावा सैदपुर में 60 प्रतिशत, जखनिया 75 तथा मरदह ब्लाक में करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सादात, कासिमाबाद और जमानिया में अभी नींव तक ही काम हो सका है।
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विद्यालयों में सौ-सौ सीटें निर्धारित
गाजीपुर। जिले में शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े जिन चौदह ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय खोले गए हैं वहां महिला साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत दर से कम है। जेंडर गैप राष्ट्रीय औसत दर से अधिक है। इन विद्यालयों में सौ-सौ सीटें निर्धारित की गई हैं। इसमें 75 प्रतिशत सीटें पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के प्रवेश के लिए निर्धारित हैं। जबकि 25 प्रतिशत सीटें सामान्य वर्ग की गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की बालिकाओं के प्रवेश के लिए है।
सबसे पहला विद्यालय सैदपुर में हुआ था स्थापित
गाजीपुर। जिले में पहला कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय सैदपुर विकासखंड क्षेत्र स्थित डायट परिसर में वर्ष 2005 में स्थापित हुआ था। इसके बाद अन्य ब्लाकों में इसकी स्थापना हुई। दो ब्लाकों भदौरा और करंडा में बालिकाओं की साक्षरता दर अधिक होने के कारण यहां पर यह विद्यालय नहीं खोले गए हैं।
0 कोट
रेवतीपुर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय का ध्वस्तीकरण न होने और देवकली में वन विभाग की लकड़ी डीएम के आदेश के बाद भी नहीं हटाए जाने से यहां निर्माण शुरू नहीं हो सका है। यहां निर्माण का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।- अमित कुमार राय, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा।