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Ghazipur News: चार बेड का है अस्पताल, सुविधाएं नदारद
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बारा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बारा का नामकरण वीर अब्दुल हमीद के नाम से किया गया है। लेकिन, यहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। रोजाना दोपहर दो बजे के बाद इस अस्पताल में ताला लटका मिलता है और शाम को शाम को अंधेरा छा जाता है। ऐसे में यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को पड़ोसी राज्य बिहार के अस्पतालों में जाना पड़ता है। इसे लेकर लोगों में काफी नाराजगी है।
चालीस हजार की आबादी वाले क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नामकरण वीर अब्दुल हमीद के नाम से किया गया है, जो चार बेड का अस्पताल है। लाखों रुपये की लागत से तैयार इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है, जबकि जननी सुरक्षा एएनएम के हवाले है। नियमित के रूप में चौकीदार दो बजे पीएचसी पर ताला लगा देते हैं। रही बात सुविधा की तो यहां बिजली उपकरण खराब पड़े हैं। जेनरेटर की भी सुविधा नहीं है। शाम को आने वाले मरीजों को किसी स्वास्थ्य कर्मियों के न रहने पर विवश होकर बिहार प्रांत जाना पड़ता है। शाम होते ही पूरा पीएचसी परिसर अंधेरे में डूब जाता है। यूं तो अस्पताल में 24 घंटे सेवाओं का दावा किया जाता है, लेकिन यहां दिन के 11 बजे से दो बजे तक ही सेवाएं दी जाती हैं। जबकि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से कर्मनाशा के तटवर्ती गांव कुतुबपुर, मगरखाई, हरिकरनपुर, भतौरा, दलपतपुर, रोइनी-कारोबीर आदि जुड़े हुए हैं।
बारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक के रहने के लिए न आवास है और न ही पेयजल की व्यवस्था। ऐसे में चिकित्सक 24 घंटे सेवा कैसे दे सकते हैं। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा गया है। - डॉ. धनंजय आनंद, चिकित्साधीक्षक सीएचसी भदौरा
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चालीस हजार की आबादी वाले क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नामकरण वीर अब्दुल हमीद के नाम से किया गया है, जो चार बेड का अस्पताल है। लाखों रुपये की लागत से तैयार इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है, जबकि जननी सुरक्षा एएनएम के हवाले है। नियमित के रूप में चौकीदार दो बजे पीएचसी पर ताला लगा देते हैं। रही बात सुविधा की तो यहां बिजली उपकरण खराब पड़े हैं। जेनरेटर की भी सुविधा नहीं है। शाम को आने वाले मरीजों को किसी स्वास्थ्य कर्मियों के न रहने पर विवश होकर बिहार प्रांत जाना पड़ता है। शाम होते ही पूरा पीएचसी परिसर अंधेरे में डूब जाता है। यूं तो अस्पताल में 24 घंटे सेवाओं का दावा किया जाता है, लेकिन यहां दिन के 11 बजे से दो बजे तक ही सेवाएं दी जाती हैं। जबकि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से कर्मनाशा के तटवर्ती गांव कुतुबपुर, मगरखाई, हरिकरनपुर, भतौरा, दलपतपुर, रोइनी-कारोबीर आदि जुड़े हुए हैं।
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बारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक के रहने के लिए न आवास है और न ही पेयजल की व्यवस्था। ऐसे में चिकित्सक 24 घंटे सेवा कैसे दे सकते हैं। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा गया है। - डॉ. धनंजय आनंद, चिकित्साधीक्षक सीएचसी भदौरा
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