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Ghazipur News: गोशालाओं में स्थापित होंगी गोकाष्ठ बनाने की मशीनें
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सैदपुर क्षेत्र के पिपनार गांव के निर्माणाधीन वृहद गोशाला में गोबर से गोकाष्ठ बनाने की मशीन जल्द ही स्थापित की जाएगी। गोबर से बने गोकाष्ठ की बिक्री के लिए बाजार भी प्रशासन ही उपलब्ध कराएगा। इसकी आपूर्ति श्मशान घाटों और ईंट भट्ठों के अलावा कई स्थानों पर की जाएगी।
क्षेत्र में समस्या बनते जा रहे निराश्रित गोवंशों के निवारण के लिए सैदपुर के पिपनार गांव में 350 पशुओं को रखने की क्षमता वाले वृहद गोशाला का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो गोशालाओं को रोजगार से जोड़ने का खाका लगभग तैयार कर लिया गया है। इससे गोशाला का सिर्फ खर्च ही नहीं बल्कि लोगों के लिए रोजगार भी निकलेगा।
गोकाष्ठ बनाकर जिले के श्मशान घाट, ईट भट्टों और अन्य जगहों पर उसकी आपूर्ति की जाएगी। हवन आदि के लिए भी गोकाष्ठ उपलब्ध कराया जाएगा। गोकाष्ठ की बिक्री के लिए ऑनलाइन बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। लोगों का कहना है कि इस योजना के सफल होने पर कीमती पेड़ों की लकड़ियों को भी बचाया जा सकता है।
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अधिकारियों ने बताया कि गोशाला में उत्पादित होने वाले दूध को परिषदीय स्कूलों में आपूर्ति करने की भी योजना है। इससे अमृत समान कहे जाने वाले गाय के दूध का लाभ बच्चों को मिलेगा। वहीं डेयरी आदि पर भी दूध बेचने की योजना चल रही है
पहले पिपनार स्थित वृहद गो-आश्रय स्थल पर गोकाष्ठ बनाने वाली मशीन लगाई जाएगी। इसे सारे जिले के गो शालाओं में लगाने की योजना है। इसके बाद गाय के गोबर से पूजा के कंडे और धूपबत्ती आदि भी तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य गो शालाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
-डा. शुक्ला सुनील कुमार, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सैदपुर
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क्षेत्र में समस्या बनते जा रहे निराश्रित गोवंशों के निवारण के लिए सैदपुर के पिपनार गांव में 350 पशुओं को रखने की क्षमता वाले वृहद गोशाला का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो गोशालाओं को रोजगार से जोड़ने का खाका लगभग तैयार कर लिया गया है। इससे गोशाला का सिर्फ खर्च ही नहीं बल्कि लोगों के लिए रोजगार भी निकलेगा।
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गोकाष्ठ बनाकर जिले के श्मशान घाट, ईट भट्टों और अन्य जगहों पर उसकी आपूर्ति की जाएगी। हवन आदि के लिए भी गोकाष्ठ उपलब्ध कराया जाएगा। गोकाष्ठ की बिक्री के लिए ऑनलाइन बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। लोगों का कहना है कि इस योजना के सफल होने पर कीमती पेड़ों की लकड़ियों को भी बचाया जा सकता है।
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अधिकारियों ने बताया कि गोशाला में उत्पादित होने वाले दूध को परिषदीय स्कूलों में आपूर्ति करने की भी योजना है। इससे अमृत समान कहे जाने वाले गाय के दूध का लाभ बच्चों को मिलेगा। वहीं डेयरी आदि पर भी दूध बेचने की योजना चल रही है
पहले पिपनार स्थित वृहद गो-आश्रय स्थल पर गोकाष्ठ बनाने वाली मशीन लगाई जाएगी। इसे सारे जिले के गो शालाओं में लगाने की योजना है। इसके बाद गाय के गोबर से पूजा के कंडे और धूपबत्ती आदि भी तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य गो शालाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
-डा. शुक्ला सुनील कुमार, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सैदपुर