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Ghazipur News: गंगा का जलस्तर स्थिर, चार गांवों का संपर्क टूटा, जीवन सड़क और नाव पर
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रेवतीपुर गांव में मकान में बाढ़ पानी का पानी घुसने के बाद सड़क पर गृहस्थी के सामान के साथ जीवन
- फोटो : सांकेतिक
गाजीपुर। वर्ष 2024 का उच्च बाढ़ स्तर 63.670 मीटर के रिकॉर्ड को तोड़ने से 10 सेमी पहले ही गंगा का जलस्तर शुक्रवार को 63.660 मीटर पर स्थिर हो गया। हालांकि गंगा का जलस्तर जनपद के निचले इलाकों के खेतों व गांवों में पसर रहा है। इससे बाढ़ प्रभावित लोगों की दुश्वारियों पर विराम नहीं लग पाया है। वहीं रेवतीपुर में चार गांवों का संपर्क टूट गया है। वहीं 2350 बीघे फसल जलमग्न हो गई है। साथ ही बाढ़ प्रभावित लोग सुरक्षित स्थानों पर सड़कों पर भोजन बना रहे हैं।
सुबह आठ बजे से 63.660 मीटर पर गंगा का जलस्तर स्थिर हो गया। यह खबर जनपद के निचले इलाकों के लिए राहतभरी रही। दूसरी तरफ शहर के निचले इलाके इलाके में बाढ़ का पानी पसर गया है। शहर के शास्त्रीनगर स्थित लो लैंड परिसर में निर्मित एक मकान के बाहर दो फीट तक बाढ़ का पानी पसरा हुआ है। इसी तरह शहर के लकड़ी के टाल स्थित एक खेत में जलभराव का दायरा डेढ़ फीट से दो फीट तक पहुंच गया है। हालांकि अभी तक शहर की सड़कों व गलियों पर बाढ़ का पानी नहीं पसरा है। लेकिन शहर के नाले जरूर बैकफ्लो हो रहे हैं। इससे शहर के लोगों की भी धुकधुकी बढ़ी हुई है, क्योंकि सड़कों पर बाढ़ का पानी पसरने से आवागमन प्रभावित होगा।
छह संपर्क मार्ग डूबे, 600 बीघा फसल जलमग्न
रेवतीपुर में बाढ़ की वजह से हसनपुरा, नसीरपुर, रामपुर और वीरउपुर का जिला मुख्यालय से मार्ग का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। अब इन गांवों के लोगों के लिए आवागमन के लिए एकमात्र सहारा नाव ही बचा है। बाढ़ से सबसे ज्यादा चिंता पशुपालकों को सता रही है। गांवों में चारे का भारी संकट पैदा हो गया है। 600 बीघा में किसानों द्वारा बोई गई धान, मक्का सहित पशुओं के चारे की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा बाढ़ का पानी कल्याणपुर, नरायनापुर, टौगा, पटकनिया, युवराजपुर, कालूपुर, तिलवा, गोपालपुर आदि गांवों के सिवान से होते हुए आबादी की ओर पसर रहा है। बाढ़ की वजह से इलाके के छह संपर्क मार्ग पूरी तरह पानी में डूब गए हैं, जिसके कारण आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।
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खेतों में तीन फीट तक पसरा पानी, गौरहट-तेतारपुर का रास्ता बंद
खानपुर में गंगा व गोमती के बाढ़ से गौरहट, तेतारपुर, गोरखा और गौरी में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। करीब 1500 बीघा फसल पानी में डूबने से किसानों को नुकसान हुआ है। गौरहट और तेतारपुर को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता भी बाढ़ के पानी में डूब गया है। इससे ग्रामीणों को गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए करीब चार किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। खेतों में कई दिनों से पानी भरा होने के कारण दलहन और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। मूंग, अरहर, उड़द, बाजरा, धान और तिल समेत कई फसलें पानी में डूब गई हैं। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से भुजाड़ी मल्लाह बस्ती के करीब 35 घरों के लोगों को भी बाढ़ और कटान का डर सताने लगा है। गंगा के बाढ़ से खरौना, कुसहीं, हथौड़ा, पटना, छपरा और मंझरिया समेत कई गांव प्रभावित हैं।
उफान पर भांगड़ नाला, गांवों की ओर पसरा पानी
भांवरकोल में वीपुर से निकला भांगड़ नाला का पानी भरकर अब सिवान व गांवों की ओर पसर रहा है। शेरपुर, धर्मपुरा, फिरोजपुर, कठार, निकरोजपुर, जगहतपुर, शेरपूर खुर्द, नकटीकोल, आमघाट, महेशपुर, पचासी, सतर, माघि, मुबारकपुर, रानीपुर, परखनपुरा कबीरपुर, कुंडेसर, लालूपुर, बाठा आदि गांवों के खेतों तक बाढ़ का पानी पसर चुका है। 50 एकड़ मिर्च, टमाटर, चरी, बाजरा, तिल की फसल डूब चुकी है।
वृद्धा आश्रम में घुसा बाढ़ का पानी
औड़िहार में बाराह घाट स्थित निर्माणाधीन वृद्धा आश्रम में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। वहीं लगभग 500 किसानों की 250 बीघा खेती जलमग्न हो चुकी है, जिसमें नेनुआ, करेला, लौकी, बैंगन, परवल, भिंडी आदि की सब्जियां शामिल हैं। पटना, खरौना, हथौड़ा, औड़िहार, जौहरगंज, सैदपुर, फुलवारी खुर्द, फुलवारी कला, देवचंदपुर, चकेरी, रामपुर मांझा आदि में किनारे के क्षेत्रों में पानी फैल चुका है। फुलवारी में शिव मंदिर बाढ़ के खतरे में है।
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नदी के जलस्तर और तटवर्ती गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व एवं संबंधित विभागों की टीमों को निगरानी के लिए लगाया गया है। ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। स्थिति के अनुसार आगे जरूरी कार्रवाई की जाएगी। - ज्योति चौरसिया, सैदपुर एसडीएम
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सुबह आठ बजे से 63.660 मीटर पर गंगा का जलस्तर स्थिर हो गया। यह खबर जनपद के निचले इलाकों के लिए राहतभरी रही। दूसरी तरफ शहर के निचले इलाके इलाके में बाढ़ का पानी पसर गया है। शहर के शास्त्रीनगर स्थित लो लैंड परिसर में निर्मित एक मकान के बाहर दो फीट तक बाढ़ का पानी पसरा हुआ है। इसी तरह शहर के लकड़ी के टाल स्थित एक खेत में जलभराव का दायरा डेढ़ फीट से दो फीट तक पहुंच गया है। हालांकि अभी तक शहर की सड़कों व गलियों पर बाढ़ का पानी नहीं पसरा है। लेकिन शहर के नाले जरूर बैकफ्लो हो रहे हैं। इससे शहर के लोगों की भी धुकधुकी बढ़ी हुई है, क्योंकि सड़कों पर बाढ़ का पानी पसरने से आवागमन प्रभावित होगा।
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छह संपर्क मार्ग डूबे, 600 बीघा फसल जलमग्न
रेवतीपुर में बाढ़ की वजह से हसनपुरा, नसीरपुर, रामपुर और वीरउपुर का जिला मुख्यालय से मार्ग का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। अब इन गांवों के लोगों के लिए आवागमन के लिए एकमात्र सहारा नाव ही बचा है। बाढ़ से सबसे ज्यादा चिंता पशुपालकों को सता रही है। गांवों में चारे का भारी संकट पैदा हो गया है। 600 बीघा में किसानों द्वारा बोई गई धान, मक्का सहित पशुओं के चारे की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा बाढ़ का पानी कल्याणपुर, नरायनापुर, टौगा, पटकनिया, युवराजपुर, कालूपुर, तिलवा, गोपालपुर आदि गांवों के सिवान से होते हुए आबादी की ओर पसर रहा है। बाढ़ की वजह से इलाके के छह संपर्क मार्ग पूरी तरह पानी में डूब गए हैं, जिसके कारण आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।
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खेतों में तीन फीट तक पसरा पानी, गौरहट-तेतारपुर का रास्ता बंद
खानपुर में गंगा व गोमती के बाढ़ से गौरहट, तेतारपुर, गोरखा और गौरी में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। करीब 1500 बीघा फसल पानी में डूबने से किसानों को नुकसान हुआ है। गौरहट और तेतारपुर को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता भी बाढ़ के पानी में डूब गया है। इससे ग्रामीणों को गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए करीब चार किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। खेतों में कई दिनों से पानी भरा होने के कारण दलहन और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। मूंग, अरहर, उड़द, बाजरा, धान और तिल समेत कई फसलें पानी में डूब गई हैं। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से भुजाड़ी मल्लाह बस्ती के करीब 35 घरों के लोगों को भी बाढ़ और कटान का डर सताने लगा है। गंगा के बाढ़ से खरौना, कुसहीं, हथौड़ा, पटना, छपरा और मंझरिया समेत कई गांव प्रभावित हैं।
उफान पर भांगड़ नाला, गांवों की ओर पसरा पानी
भांवरकोल में वीपुर से निकला भांगड़ नाला का पानी भरकर अब सिवान व गांवों की ओर पसर रहा है। शेरपुर, धर्मपुरा, फिरोजपुर, कठार, निकरोजपुर, जगहतपुर, शेरपूर खुर्द, नकटीकोल, आमघाट, महेशपुर, पचासी, सतर, माघि, मुबारकपुर, रानीपुर, परखनपुरा कबीरपुर, कुंडेसर, लालूपुर, बाठा आदि गांवों के खेतों तक बाढ़ का पानी पसर चुका है। 50 एकड़ मिर्च, टमाटर, चरी, बाजरा, तिल की फसल डूब चुकी है।
वृद्धा आश्रम में घुसा बाढ़ का पानी
औड़िहार में बाराह घाट स्थित निर्माणाधीन वृद्धा आश्रम में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। वहीं लगभग 500 किसानों की 250 बीघा खेती जलमग्न हो चुकी है, जिसमें नेनुआ, करेला, लौकी, बैंगन, परवल, भिंडी आदि की सब्जियां शामिल हैं। पटना, खरौना, हथौड़ा, औड़िहार, जौहरगंज, सैदपुर, फुलवारी खुर्द, फुलवारी कला, देवचंदपुर, चकेरी, रामपुर मांझा आदि में किनारे के क्षेत्रों में पानी फैल चुका है। फुलवारी में शिव मंदिर बाढ़ के खतरे में है।
नदी के जलस्तर और तटवर्ती गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व एवं संबंधित विभागों की टीमों को निगरानी के लिए लगाया गया है। ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। स्थिति के अनुसार आगे जरूरी कार्रवाई की जाएगी। - ज्योति चौरसिया, सैदपुर एसडीएम

रेवतीपुर गांव में मकान में बाढ़ पानी का पानी घुसने के बाद सड़क पर गृहस्थी के सामान के साथ जीवन - फोटो : सांकेतिक

रेवतीपुर गांव में मकान में बाढ़ पानी का पानी घुसने के बाद सड़क पर गृहस्थी के सामान के साथ जीवन - फोटो : सांकेतिक

रेवतीपुर गांव में मकान में बाढ़ पानी का पानी घुसने के बाद सड़क पर गृहस्थी के सामान के साथ जीवन - फोटो : सांकेतिक