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गंगा में पलटी नाव, किशोरी डूबी, 20 बचाए गए
संवाददाता/अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Thu, 15 Oct 2015 11:53 PM IST
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कोतवाली क्षेत्र के सेमरा गांव के सामने गुरुवार की सुबह नौ बजे गंगा पार जा रही नाव गंगा में डूब गई। घटना में डोंगी (छोटी नाव) पलटने से उसपर सवार 21 खेतिहर मजदूर गंगा में डूब गए। मल्लाहों ने 20 मजदूरों को बचा लिया जबकि एक मजदूर की बेटी उर्मिला (14) डूब गई, जिसका देर शाम तक पता नहीं चल पाया था।
गंगा पार रामपुर गांव में परवल के खेत में काम करने जाने के लिए 21 खेतिहर मजदूर सेमरा गांव के घाट से सुबह नौ बजे डोंगी (छोटी नाव) पर सवार होकर रवाना हुए। नाव दूसरे किनारे से कुछ पहले पहुंची ही थी कि अनियंत्रित होकर पलट गई जिससे उसपर सवार मजदूर गंगा में डूब गए। मजदूरों के चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर गंगा में
चल रही दो नावों के नाविकों और उसपर सवार लालबचन, शिवकुमार, रंगलाल, सुरेश खरवार, उदय खरवार एवं जवाहिर चौधरी ने डूबते लोगों को एक-एक कर अपनी नाव पर खींच पर बचाना शुरू किया। 21 में से कुल 20
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मजदूरों को बचा लिया गया लेकिन जवाहिर चौधरी की चौदह वर्षीय पुत्री उर्मिला चौधरी का पता नहीं चल सका। गोताखोर पूरे दिन तलाश करते रहे लेकिन उर्मिला नहीं मिली। नाव डूबने की खबर आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई
और भारी संख्या में ग्रामीण गंगा तट पर जमा हो गए। एसडीएम त्रिभुवन विश्वकर्मा, क्षेत्राधिकारी मनमोहन पांडेय, तहसीलदार उमेश चंद्र निगम व कोतवाल दिलीप सिंह मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य कराने में जुट गए। पानी में से
निकाले गये चार लोगों संजय राम, रीता, लक्ष्मी और रीना को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुहम्मदाबाद में भर्ती कराया गया है। नाव चला रहा गौसपुर निवासी नाविक लालू चौधरी ने तैरकर अपनी जान बचाई और अन्य लोगों को बचाने
में भी सहयोग किया। ग्रामीणों के अनुसार नाव में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की वजह से हादसा हुआ।
हादसे के समय नाव पर सवार सेमरा निवासी जवाहिर चौधरी ने तैर कर न सिर्फ अपनी जान बचाई बल्कि डूब रहे चार अन्य लोगों को भी बचाया था लेकिन वह अपनी बेटी उर्मिला को नहीं बचा सका। उर्मिला नाव पर उसके बगल में
ही बैठी थी। गंगा में डूबी बेटी का पता नहीं चलने पर वह गंगा किनारे बैठकर बिलखता रहा। जबकि उर्मिला की मां सुरेमन देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। जवाहिर की छह लड़कियों में उर्मिला दूसरे नंबर पर थी। सबसे छोटा एक लड़का रोशन है।
सेमरा के पास खेतिहर मजदूरों को गंगा पार ले जाते समय नवा पलटने की यह तीसरी घटना है। इसके पूर्व एक नाव दुर्घटना में 15 लोग डूबे थे लेकिन सभी को बचा लिया गया। वर्ष 2005 में हुई नाव दुर्घटना में युवक श्रवण के अलावा
महिला दसंती तथा प्रेमा की मृत्यु हो गई थी। इसके अलावा बच्छलपुर पीपा पुल पर मटर की फली तोड़ने के लिए मजदूरों को कुंडेसर ले जा रही पिकअप बीच गंगा में गिर गई है जिसमें आधा दर्जन मजदूरों की डूबने से मौत हो गई थी। चार दिन तक लगातार ढूंढने के बाद उनका शव बीरपुर, गहमर एवं बक्सर के पास गंगा के तट पर मिला था।
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गंगा पार रामपुर गांव में परवल के खेत में काम करने जाने के लिए 21 खेतिहर मजदूर सेमरा गांव के घाट से सुबह नौ बजे डोंगी (छोटी नाव) पर सवार होकर रवाना हुए। नाव दूसरे किनारे से कुछ पहले पहुंची ही थी कि अनियंत्रित होकर पलट गई जिससे उसपर सवार मजदूर गंगा में डूब गए। मजदूरों के चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर गंगा में
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चल रही दो नावों के नाविकों और उसपर सवार लालबचन, शिवकुमार, रंगलाल, सुरेश खरवार, उदय खरवार एवं जवाहिर चौधरी ने डूबते लोगों को एक-एक कर अपनी नाव पर खींच पर बचाना शुरू किया। 21 में से कुल 20
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मजदूरों को बचा लिया गया लेकिन जवाहिर चौधरी की चौदह वर्षीय पुत्री उर्मिला चौधरी का पता नहीं चल सका। गोताखोर पूरे दिन तलाश करते रहे लेकिन उर्मिला नहीं मिली। नाव डूबने की खबर आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई
और भारी संख्या में ग्रामीण गंगा तट पर जमा हो गए। एसडीएम त्रिभुवन विश्वकर्मा, क्षेत्राधिकारी मनमोहन पांडेय, तहसीलदार उमेश चंद्र निगम व कोतवाल दिलीप सिंह मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य कराने में जुट गए। पानी में से
निकाले गये चार लोगों संजय राम, रीता, लक्ष्मी और रीना को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुहम्मदाबाद में भर्ती कराया गया है। नाव चला रहा गौसपुर निवासी नाविक लालू चौधरी ने तैरकर अपनी जान बचाई और अन्य लोगों को बचाने
में भी सहयोग किया। ग्रामीणों के अनुसार नाव में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की वजह से हादसा हुआ।
हादसे के समय नाव पर सवार सेमरा निवासी जवाहिर चौधरी ने तैर कर न सिर्फ अपनी जान बचाई बल्कि डूब रहे चार अन्य लोगों को भी बचाया था लेकिन वह अपनी बेटी उर्मिला को नहीं बचा सका। उर्मिला नाव पर उसके बगल में
ही बैठी थी। गंगा में डूबी बेटी का पता नहीं चलने पर वह गंगा किनारे बैठकर बिलखता रहा। जबकि उर्मिला की मां सुरेमन देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। जवाहिर की छह लड़कियों में उर्मिला दूसरे नंबर पर थी। सबसे छोटा एक लड़का रोशन है।
सेमरा के पास खेतिहर मजदूरों को गंगा पार ले जाते समय नवा पलटने की यह तीसरी घटना है। इसके पूर्व एक नाव दुर्घटना में 15 लोग डूबे थे लेकिन सभी को बचा लिया गया। वर्ष 2005 में हुई नाव दुर्घटना में युवक श्रवण के अलावा
महिला दसंती तथा प्रेमा की मृत्यु हो गई थी। इसके अलावा बच्छलपुर पीपा पुल पर मटर की फली तोड़ने के लिए मजदूरों को कुंडेसर ले जा रही पिकअप बीच गंगा में गिर गई है जिसमें आधा दर्जन मजदूरों की डूबने से मौत हो गई थी। चार दिन तक लगातार ढूंढने के बाद उनका शव बीरपुर, गहमर एवं बक्सर के पास गंगा के तट पर मिला था।