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गंगा का जलस्तर स्थिर, जौहरगंज में बदला गया अंत्येष्टि का स्थान

Tue, 14 Jul 2020 10:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2020 10:30 PM IST
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Ganga's water level stagnant, funeral location changed at Joharganj
गाजीपुर/भीमापार। बीते सप्ताह मोक्षदायिनी गंगा का पानी लगातार बढ़ते रहने के बाद पिछले चौबीस घंटे से 52.1 मीटर पर स्थिर है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर और हुई बारिश का नतीजा यह हुआ है गंगा नदी पिछले कई दिनों तक लगातार बढ़ाव पर रहीं। इसके बाद सोमवार से नदी में घटाव जारी है। जिला मुख्यालय अंतर्गत कलेक्टर घाट, स्टीमर घाट, महादेवा घाट, ददरी घाट, नवापुरा घाट आदि के किनारे बसे लोग नदी के घटवा से राहत में हैं। उधर सैदपुर तहसील के जौहरगंज स्थित श्मशान घाट पर होने वाले शवदाह के स्थल को बदल दिया गया है। गंगा के जलस्तर में 29 सेंटीमीटर के घटाव के बाद औड़िहार के वराह धाम स्थित आदित्य घाट की 13 सीढ़ियां अभी भी गंगा में जलमग्न हैं।
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मंगलवार को गंगा का जलस्तर गाजीपुर में 55.360 मीटर रहा। जबकि चेतावनी बिंदु 61.550 तथा खतरा बिंदु 63.105 मीटर से अभी नदी काफी नीचे बह रही हैं। लेकिन घट-बढ़ की वजह से तटवर्ती लोगों की सांसें बाढ़ के खतरे को लेकर अटकी हुई है। सैदपुर स्थित बूढ़ेनाथ महादेव सहित वहां गंगा किनारे के सारे घाटों पर जलस्तर स्थिर है। इसके बाद भी खतरा बना हुआ है। नदी किनारों पर रहने वाले खरौना, पटना, शादी-भादी, कुसहीं, हथौड़ी आदि गांव के ग्रामवासियों का कहना है कि गंगा का पानी भले ही दूर दिख रहा है लेकिन जिस तरह नदी के पानी ने अपने किनारे की तीन फीट से अधिक जमीन को अपने आगोश में ले लिया है। वह चिंताजनक है। दूसरी ओर गांगी नदी के कारण ऊचौरी, भुंवरपुर, भीमापार, दौलतपुर, सोनियापार, कूढ़ालंबी, नायकडीह, मौधा, मकरसन, नसीरपुर, सोनरान आदि गांवों के लोगों की नींद उड़ी हुई है। तटवर्ती इलाकों में बसे लोगों की धड़कनें अब तेज होने लगी हैं। उधर गोमती नदी के तटवर्ती गांव तेतारपुर, भुजाड़ी, गौरी और गोरखा गांव के पप्पू यादव, लालजी यादव, भोला सिंह, धीरज सिंह, पन्ना राम, संजय शुक्ल, देवी चौधरी, रामसिंह, अरविंद कुमार, अशोक यादव आदि का कहना है कि बारिश के चलते इलाकाई नदियों में पानी बढ़ने के बाद इस बार गोमती में भी बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में ग्रामवासियों को बहुत सचेत रहने की जरूरत है। लोगों का कहना है कि गंगा में जल स्तर के बढ़ने का प्रमुख कारण केन, बेतवा और चंबल नदियों में पानी का छोड़ा जाना है। यही पानी यमुना में मिलकर उसे रिचार्ज करता है और प्रयागराज में पहुंचकर मोक्षदायिनी गंगा में मिल जाता है। लोगों का अनुमान है कि बीते सप्ताह जिस तरह से गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई थी। अगरवहीं स्थिति पुन: लौट कर आती है तो गाजीपुर, बलिया के सैकड़ों गांवों, हजारों एकड़ तटीय खेतों और शहरी इलाकों में भी पानी प्रवेश कर जाएगा।
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