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Ghazipur News: तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रही गंगा,बाढ़ का पानी उतरने से सड़कों पर कीचड़

Sat, 09 Aug 2025 12:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 09 Aug 2025 12:00 AM IST
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Ganga is receding at the rate of 3 cm per hour, mud on the roads due to receding of flood water
शहर के नवापुरा घाट के पास गंगा में नाव से घुमते लोग। - फोटो : संवाद
गाजीपुर। जनपद में गंगा का जलस्तर 8 जुलाई को 3 सेमी प्रति घंटे के हिसाब से घट रहा था। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 63.770 मीटर दर्ज किया गया। बाढ़ का पानी उतरने से सड़कों पर कीचड़ फैल गया है, जिससे लोगों का चलना मुश्किल हो गया है। लकड़ी के टाल मोहल्ले की सड़क से बाढ़ का पानी पूरी तरह से उतर चुका है। सड़क पर पसरा कीचड़ बता रहा कि नगर पालिका प्रशासन की ओर से सफाई नहीं की गई है। ब्लीचिंग का भी छिड़काव नहीं किया गया है। कीचड़ से उठ रही दुर्गंध से आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो गया है। शास्त्री नगर मोहल्ले में एक दिन पहले ही बाढ़ का पानी उतर गया था। कलेक्टर घाट पर भी कीचड़़ फैला है। इससे घाट पर फिसलन हो गई है। बाढ़ का पानी हटने के बाद दीवार भी ढह गई है। वहीं, बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित सेवराई तहसील क्षेत्र के 4 गांव हैं। इनमें हसनपुरा, नगदीलपुर, वीरऊपुर व नसीरपुर शामिल है। स्थिति यह है कि गंगा के जलस्तर में लगातार घटाव होने के बाद भी इन गांवों के मुख्य मार्गों पर 6 से 7 फीट तक बाढ़ का पानी है।
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8 नावों के भरोसे 10 हजार की आबादी-गहमर। बाढ़ प्रभावित हसनपुरा, नगदीलपुर, वीरऊपुर व नसीरपुर की आबादी लगभग 10 हजार है। इन गांवों के मुख्य मार्गों पर अभी तक बाढ़ का पानी है। ग्रामीणों के आवागमन के लिए 8 नाव की व्यवस्था की गई है। नाव से ग्रामीण बाजार जा रहे हैं। पशु पालकों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से पर्याप्त भूसा का वितरण नहीं किया जा रहा है। इसी क्रम में 8 जुलाई को भोजन का वितरण भी नहीं किया गया। इससे गरीब तबके के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। रेवतीपुर-गहमर बाइपास मार्ग से बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है। लेकिन, अभी भी बाईपास मार्ग पर 5 से 6 फीट तक पानी पसरा हुआ है। बाढ़ प्रभावित गांवों में मेडिकल कैंप तक की व्यवस्था नहीं है। इससे ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा सता रहा है। भांवरकोल क्षेत्र के बाढ़ के कारण महेशपुर द्वितीय, नकटी कोल, बढनपुरा, सुनपुरा, रानीपुर, दोनपा, लोचाईन, मच्छटी, गोडऊर, सोनवानी, महेंद आदि गांवों की फसलें टमाटर, मिर्चा, धान, अरहर, बाजरा पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है।
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सभी लोगों में वितरित नहीं हुई राहत सामग्री-औड़िहार। पटना गांव के पश्चिमी रास्ते पर डेढ़ फीट तक बाढ़ का पानी है। जबकि पूर्वी रास्ता बाढ़ के पानी से मुक्त है। गोपालपुर गांव के मुख्य मार्ग पर नाम मात्र पानी शेष रह गया है। पशु पालकों के समक्ष मुख्य रूप से चारे का संकट है। पटना गांव के गरीब तबके के लोगों का कहना है कि सभी लोगों को राहत सामग्री का वितरण नहीं किया गया। बाढ़ का पानी उतर रहा है, लेकिन दवा का छिड़काव नहीं किया जा रहा है।
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गोमती का भी घट रहा जलस्तर-मौधा। गंगा की तरह गोमती का भी जलस्तर कम हो रहा है। गोमती में घटाव के कारण खेतों में इकट्ठा बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। लेकिन, दुर्गंध व संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए दवा व ब्लीचिंग का छिड़काव नहीं किया जा रहा है।

सड़कें क्षतिग्रस्त, प्रशासन बना मूकदर्शक-मुहम्मदाबाद। गंगा के जलस्तर में कमी आने के कारण मुहम्मदाबाद-सेमरा मार्ग से पानी हट गया है। लेकिन, सड़क जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे आवागमन में लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
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