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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Ganga is just 35 cm away from the danger point, 5000 animals stranded

Ghazipur News: खतरा बिंदु से महज 35 सेमी दूर गंगा, 5000 पशु फंसे

Sun, 20 Jul 2025 11:46 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jul 2025 11:46 PM IST
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Ganga is just 35 cm away from the danger point, 5000 animals stranded
गाजीपुर। गंगा उफान पर है। खतरा बिंदु से महज 35 सेंटीमीटर दूर है। शाम छह बजे जलस्तर 63.070 मीटर पर स्थिर हो गया था। खतरा बिंदु 63.105 मीटर है।
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तटवर्ती इलाके के करीब 500 किसानों की 335 बीघा खेती जलमग्न हो चुकी है। जमानिया इलाके में बाढ़ प्रभावित गांवों में 5000 पशु फंस गए हैं, जबकि 200 पशुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
वहीं रविवार को डेढ़ बीघा खेती योग्य भूमि गंगा में समाहित हो गई। अब तक छह बीघा भूमि समाहित हो चुकी है। इधर गंगा घाटों की सीढि़यां जलमग्न हो चुकी हैं। नालों में बाढ़ का पानी भरने के कारण गंगा का रुख अब शहर की तरफ हो गया है।
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गंगा का जलस्तर शनिवार को डेढ़ सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। रविवार को शाम छह बजे के बाद पानी स्थिर हो गया। इधर शहर का स्टीमरघाट बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब चुका है। पानी सड़क की तरफ बढ़ रहा है। यही हाल चीतनाथ घाट का था। लोगों ने घाट की गली में स्नान किया। कलक्टर घाट की केवल नौ सीढि़यां शेष रह गई हैं। घाटों के नालों में बाढ़ का पानी भर चुका है।
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डीएम आवास के बगल में स्थित नाले में भी पानी का दायरा पहले की अपेक्षा बढ़ गया है। रेवतीपुर-पकड़ी गांव के लिंक मार्ग पर एक से डेढ़ फीट तक पानी लग गया है।
भांवरकोल क्षेत्र के मुबारकपुर मौजा से गहमर सिवान तक कटान के कारण डेढ़ बीघा भूमि गंगा में समाहित हो गई। धर्मपुरा, फिरोजपुर, कठार, आमघाट, नक्कीटोल, रानीपुर, फखनपुरा, कुंडेसर में चरी, अरहर, बाजरा तिल की 50 बीघा खेती बर्बाद हो गई है। इससे 50 किसान प्रभावित हुए हैं।
गहमर : क्षेत्र में 300 किसानों का 125 बीघा खेत जलमग्न हुआ है। सब्जी और चरी की खेती चौपट हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो रात तक हसनपुरा व विरऊपुर गांव में बाढ़ का पानी आ जाएगा।
औड़िहार : स्थानीय बाराह घाट पर बाढ़ का पानी निर्माणाधीन वृद्धा आश्रम में घुस गया है। इसके कारण निर्माण कार्य बंद हो गया है। सैदपुर के पटना, शादी-भादी, फुलवारी, फुलवारी कला, चकेरी, देवचंदपुर में 110 किसानों के 130 बीघे खेत में पानी पसर चुका है।
फुलवारी गांव के मुहाने पर बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। बाराह घाट की सीढि़यां डूबने से लोग सड़क पर स्नान करते दिखे। आठ वर्ष पूर्व कानपुर से आकर 10 निषाद परिवार रेहन पर खेत लेकर खेती करता था। खेत में झोपड़ी डालकर वे रहते थे। खेत में बाढ़ का पानी आने से अब परिवार मंदिर के पास सड़क किनारे टेंट लगाने की तैयारी कर रहा है।

मौधा : गौरहट, गौरी, खरौना, तेतारपुर में 40 किसानों ने 30 बीघा में बाजारा, चरी, सब्जी आदि की खेती की थी। गोमती का जलस्तर बढ़ने से खेती बर्बाद हो गई। वहीं सिधाैना के पास गंगा के बाढ़ का पानी वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन के करीब पहुंच चुका है।
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