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Ghazipur News: जिला जेल के इतिहास में पहली बार कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने निकलीं सजायाफ्ता की दो बेटियां

Thu, 17 Jul 2025 12:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jul 2025 12:17 AM IST
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For the first time in the history of the district jail, two daughters of a convict went to study in a convent school
गाजीपुर। स्थान : जिला जेल, समय : सुुबह करीब आठ बजे। दो लड़कियां जेल के गेट से हंसते हुए कंधे पर स्कूल बैग लिए बाहर निकलीं, जिनके चेहरे पर अलग ही खुशी तैर रही थी। बच्चियों के साथ जेल के अधिकारियोें ने भी फोटो खिंचवाई और अपनी कार से पहले दिन स्कूल पढ़ने के लिए भेजा। इसी के साथ जिला जेल के इतिहास के पन्नों में यह दिन दर्ज हो गया। वजह यह कि इसके पहले कभी किसी बंदी या सजायाफ्ता कैदी के बच्चों को जेल के बाहर कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने का मौका नहीं मिला।
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जिला कारागार में अलग-अलग आरोपों और गुनाहों में बंद तीन माताओं के पांच बच्चे भी रहते हैं। इनमें जिले के सबुआ निवासी दंपती के तीन बच्चे हैं, जो अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ डेढ़ साल से डीपी एक्ट में बंद हैं। जेल में दंपती और उसके तीन परिजन भी बंद हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक ज्योति की देवरानी की मौत के मामले में इन सभी को सजा हुई है, जो डेढ़ साल से जेल में ही बंद हैं। ज्योति की तीन संतान हैं, जिनमें क्रमश: पांच और चार साल की दो बेटियां और चार तीन साल से कम उम्र का एक बेटा है। वह अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चितिंत रहती है। बाल कल्याण समिति के सुझाव और किमिनल मिसलेनियस बेल अप्लीकेशन संतोष बनाम उत्तर प्रदेश राज्य अन्य में पारित आदेश के अनुपालन में जेल प्रशासन ने बड़ी बेटी का दाखिला यूकेजी और छोटी का केजी में सरस्वती विद्या मंदिर में कराया। जिन्हें जिला कारागार प्रशासन की देखरेख में स्कूल भेजा गया। इस मौके पर जेलर शेषनाथ यादव, डिप्टी जेलर राजेश कुमार, रवींद्र सिंह, शिक्षाध्यापक अभय कुमार मौर्य, धर्मेद्र श्रीवास्तव व अन्य जेल वार्डर उपस्थित रहे।
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दोनों बच्चियां पहले दिन स्कूल जाकर बहुत खुश नजर आईं। हालांकि दोनों की सुविधा और सुरक्षा का जेल प्रशासन विशेष ध्यान दे रहा है। पहले दिन दोनों को नए ड्रेस, जूता-मोजा, टिफिन बैग, किताब-कॉपी आदि दिलाई गई। टिफिन में खाने के लिए पराठा, सब्जी, गुझिया, बिस्किट, चॉकलेट और थर्मस में आरओ का पानी दिया गया। वे स्कूल में पढ़ाई के दौरान सामान्य बच्चों की तरह खेले-कूदे भी।
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जिला जेल में बंद दो अन्य महिला बंदियों के एक-एक बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र तीन साल से कम है। इनमें चोरी के मामले में बंद ममता का सवा साल का बेटा भी शामिल है, जो जेल में ही पैदा हुआ था। हालांकि अभी उसका नामकरण नहीं हुआ है। जेल प्रशासन के मुताबिक बच्चों के खेलने और पढ़ने की सुविधा भी जेल के अंदर है। खिलौने के साथ-साथ पढ़ानेे के लिए दो शिक्षक भी तैनात हैं।
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