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ढीले नहीं पड़ रहे उदंती, टोंस और मगई नदियों के तेवर

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 10:03 PM IST
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शादियाबाद इलाके में उदंती नदी में बाढ़ आने से धान की फसल डूबी, नष्ट हो रही फसलों को निहारते किसान।
शादियाबाद इलाके में उदंती नदी में बाढ़ आने से धान की फसल डूबी, नष्ट हो रही फसलों को निहारते किसान। - फोटो : GHAZIPUR

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गाजीपुर। गंगा नदी की तीन सहायक नदियों उदंती, टोंस और मगई के तेवर अभी ढीले नहीं पड़े हैं। खेतो के रास्ते यह बगीचों से होते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है। उदंती के जलस्तर में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन टोंस और मगई नदी का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। हालत यह है कि इन नदियों के आस-पास के करीब 24 गांव पानी से घिर चुके हैं। कुछ जगहों पर सड़कों पर भी पानी आ गया है। ऐसे में किसानों की नींद उड़ गई हैं और उन्हें अपनी फसलों की चिंता सता रही है। दुल्लहपुर : क्षेत्र के मगई नदी का जलस्तर एकाएक बढ़ने से रेवरिया गांव के आस पास सैकड़ों एकड़ धान की खड़ी फसल डूब गई है। जखनिया से दुल्लहपुर के बीच मगई नदी के किनारे दर्जनों किसानों के धान के खेत हैं ऐसे में बाढ़ ने उनकी नींद उड़ा कर रख दी है। वह मगई नदी के बढ़ते जलस्तर से अपनी फसल नहीं बचा पा रहे है। किसान राम अशीष यादव, दयानंद यादव, रामप्रीत यादव, चंद्रकेश यादव ,योगेश यादव, बृजेश यादव, प्रवीण राम, देवनाथ राम, मधु यादव, सुरेश निषाद, दिल्लू निषाद, रामसूरत राजभर, राम नगीना राजभर, काशी यादव, तेजू यादव, गामा यादव, रामजन्म यादव, शिवदास यादव, लालजी यादव, बिहारी यादव सहित करीब 85 किसानों की फसल डूबी हुई है। बहरियाबाद : उदंती नदी के जलस्तर में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन किसानों की चिंता कम नही हुई है। पिछले वर्ष की बाढ़ में हुई फसलों की बर्बादी का दर्द वह भूल नहीं पा रहे हैं। बाढ़ ने उनका जख्म फिर से हरा कर दिया। पिछले वर्ष बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा आज तक न मिलने से आहत किसानों का कहना है कि फसल डूबे एक सप्ताह से ऊपर हो गया है। अधिकारी की कौन कहे क्षेत्रीय लेखपाल का भी अता-पता नहीं। भंवरूपुर, भरतपुर, कबीरपुर, चकफरीद, चकसदर, चकखिजिर, उकरांव, उनरापुर, आसपुर, झंगिया, टाड़ा बैरख, डोरा आदि गांवो के किसान सरकारी इमदाद की बाट जोह रहे हैं। ताजपुर डेहमा : टोंस नदी का पानी अभी हरिनरायण के डेरा के पास सड़क पर बह रहा है। इसके अलावा नदी से असावर, गडार, कुशहा, गोसलपुर, बखरिया आदि गांव घिर हुए हैं। पानी हल्का सा कम हुआ है लेकिन अभी इसके तेवर में कमी नहीं दिख रही है।
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