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Ghazipur News: साधन सहकारी समितियों पर यूरिया की किल्लत से जूझ रहे किसान
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जिले के साधन सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध न होने व उनके बंद होने के कारण किसानों को रबी के मौसम में भी खेतों में बोए गए फसलों के लिए जरूरी यूरिया, डीएपी, जिंक आदि के लिए इधर उधर बाजारों में निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने को विवश हैं। बावजूद विभाग लापरवाह बना हुए हैं।
जिले में कुल 184 साधन सहकारी समिति है। रबी फसलों की सीजन में किसान डीएपी व यूरिया के लिए जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र स्थित साधन सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। स्टेशन रोड स्थित साधन सहकारी समिति पर डीएपी व यूरिया के लिए कड़के की ठंड में भी किसान सुबह से ही आ रहे है। मगर डीएपी व यूरिया न मिलने से मायूस हो कर लौट जाते है। कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। वहीं प्राइवेट दुकानदारों के पास डीएपी का स्टाक है, लेकिन वे सरकारी दुकान से महंगे कीमत में बेच रहे है। ऐसे में किसानों को मजबूरी में खाद खरीदना पड़ रहा है।
सुहवल संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में स्थित साधन सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध न होने से निजी दुकानों से महगें दामों पर खाद खरीदने को विवश है। ब्लाक क्षेत्र में कुल नौ साधन सहकारी समिति हैं, मगर इनमें से तीन ही चालू हालत में हैं। महकमें के अनुसार कुल नौ साधन सहकारी समिति है। जिनमें डेढगावां, सुहवल व नगसर एक नंबर चालू है। जबकि नवली, अठहठा, रेवतीपुर, नगसर नंबर दो, गोंहदा सहित ताड़ीघाट कर्मचारियों की कमी एवं किसानों के को दिए गए खाद बीज का भारी भरकम बकाया की वसूली न होने के चलते समितियां बंद हैं। लोगों ने बताया कि अधिकतर समितियां उपेक्षा के कारण जहां जर्जर हो चुकी हैं, इसका लाभ वर्षों से नहीं मिल पा रहा है। किसानों का आरोप है कि अधिकारी व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि समिति की ओर विशेष ध्यान नहीं देते हैं।
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मरदह संवाददाता के अनुसार किसान इन दिनों डीएपी व यूरिया के लिए कभी लंबी लाइनों में लगे रहने को मजबूर हैं, तो कभी सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। कभी बाजार में खाद की दुकानों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन, फिर भी किसानों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। इन किसानों ने पहले अपनी फसल बेचने के लिए संघर्ष किया फिर अगली फसल के बीज के लिए संघर्ष किया और अब किसान खाद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रबी फसलों की बुवाई के बाद अब सिंचाई के दौरान यूरिया खाद डाली जानी है। यदि बारिश हो गई, तो तुरंत यूरिया की डिमांड बढ़ जाएगी। वहीं जिन खेतों में सिंचाई हो रही है, उनमें भी यूरिया खाद खासकर गेहूं के खेतों में डाली जा रही है। फिर भी किसानों को खाद नहीं मिल रहा है।
जनपद में 600 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एक रेक यानी 2600 मीट्रिक टन यूरिया की मांग की गई है। जो दो दिन में जनपद को उपलब्ध हो जाएगा। यूरिया की कमी नहीं होने दिया जाएगा।
अंशल कुमार, सहायक निबंधक सहकारिता
किसानों का दर्द
साधन सहकारी समिति हैदरगंज पर यूरिया खाद इस समय कई दिनों से उपलब्ध नहीं है। जिससे किसानों को यूरिया खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है।- चंद्रशेखर यादव, मटेहूं गांव।
समितियों पर ससमय खाद उपलब्ध न होने के कारण हम प्राईवेट दुकानों से अधिक मुल्य पर खाद खरीदने को विवश हैं, हैदरगंज गांव स्थित समिति पर खाद के लिए कई रोज चक्कर लगा चुका हूं।- बलवीर सिंह कुशवाहा, केलही गांव।
सहकारी समिति के दशकों पहले निष्क्रिय होने के कारण खुले बाजार में उपलब्ध यूरिया अधिक कीमत लेने को मजबूर हैं, बंद पड़ी समिति पर विभाग सहित जनप्रतिनिधियों के उदासीनता के कारण हम प्राईवेट दुकानों का चक्कर लगा रहे हैं।- वशिष्ठ सिंह, मरदह गांव।
सरकारी दर पर यूरिया खाद की कीमत 266.50 पैसे है, लेकिन 50 से 70 रुपये अधिक दुकानदार किसानों से कीमत वसूल रहे हैं।- घुरहू प्रजापति, मरदह गांव।
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जिले में कुल 184 साधन सहकारी समिति है। रबी फसलों की सीजन में किसान डीएपी व यूरिया के लिए जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र स्थित साधन सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। स्टेशन रोड स्थित साधन सहकारी समिति पर डीएपी व यूरिया के लिए कड़के की ठंड में भी किसान सुबह से ही आ रहे है। मगर डीएपी व यूरिया न मिलने से मायूस हो कर लौट जाते है। कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। वहीं प्राइवेट दुकानदारों के पास डीएपी का स्टाक है, लेकिन वे सरकारी दुकान से महंगे कीमत में बेच रहे है। ऐसे में किसानों को मजबूरी में खाद खरीदना पड़ रहा है।
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सुहवल संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में स्थित साधन सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध न होने से निजी दुकानों से महगें दामों पर खाद खरीदने को विवश है। ब्लाक क्षेत्र में कुल नौ साधन सहकारी समिति हैं, मगर इनमें से तीन ही चालू हालत में हैं। महकमें के अनुसार कुल नौ साधन सहकारी समिति है। जिनमें डेढगावां, सुहवल व नगसर एक नंबर चालू है। जबकि नवली, अठहठा, रेवतीपुर, नगसर नंबर दो, गोंहदा सहित ताड़ीघाट कर्मचारियों की कमी एवं किसानों के को दिए गए खाद बीज का भारी भरकम बकाया की वसूली न होने के चलते समितियां बंद हैं। लोगों ने बताया कि अधिकतर समितियां उपेक्षा के कारण जहां जर्जर हो चुकी हैं, इसका लाभ वर्षों से नहीं मिल पा रहा है। किसानों का आरोप है कि अधिकारी व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि समिति की ओर विशेष ध्यान नहीं देते हैं।
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मरदह संवाददाता के अनुसार किसान इन दिनों डीएपी व यूरिया के लिए कभी लंबी लाइनों में लगे रहने को मजबूर हैं, तो कभी सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। कभी बाजार में खाद की दुकानों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन, फिर भी किसानों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। इन किसानों ने पहले अपनी फसल बेचने के लिए संघर्ष किया फिर अगली फसल के बीज के लिए संघर्ष किया और अब किसान खाद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रबी फसलों की बुवाई के बाद अब सिंचाई के दौरान यूरिया खाद डाली जानी है। यदि बारिश हो गई, तो तुरंत यूरिया की डिमांड बढ़ जाएगी। वहीं जिन खेतों में सिंचाई हो रही है, उनमें भी यूरिया खाद खासकर गेहूं के खेतों में डाली जा रही है। फिर भी किसानों को खाद नहीं मिल रहा है।
जनपद में 600 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एक रेक यानी 2600 मीट्रिक टन यूरिया की मांग की गई है। जो दो दिन में जनपद को उपलब्ध हो जाएगा। यूरिया की कमी नहीं होने दिया जाएगा।
अंशल कुमार, सहायक निबंधक सहकारिता
किसानों का दर्द
साधन सहकारी समिति हैदरगंज पर यूरिया खाद इस समय कई दिनों से उपलब्ध नहीं है। जिससे किसानों को यूरिया खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है।- चंद्रशेखर यादव, मटेहूं गांव।
समितियों पर ससमय खाद उपलब्ध न होने के कारण हम प्राईवेट दुकानों से अधिक मुल्य पर खाद खरीदने को विवश हैं, हैदरगंज गांव स्थित समिति पर खाद के लिए कई रोज चक्कर लगा चुका हूं।- बलवीर सिंह कुशवाहा, केलही गांव।
सहकारी समिति के दशकों पहले निष्क्रिय होने के कारण खुले बाजार में उपलब्ध यूरिया अधिक कीमत लेने को मजबूर हैं, बंद पड़ी समिति पर विभाग सहित जनप्रतिनिधियों के उदासीनता के कारण हम प्राईवेट दुकानों का चक्कर लगा रहे हैं।- वशिष्ठ सिंह, मरदह गांव।
सरकारी दर पर यूरिया खाद की कीमत 266.50 पैसे है, लेकिन 50 से 70 रुपये अधिक दुकानदार किसानों से कीमत वसूल रहे हैं।- घुरहू प्रजापति, मरदह गांव।