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बाढ़ की मार से टूट रहे पेशगी काश्तकार
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जीवनदायनी गंगा रेवतीपुर क्षेत्र के खेतिहरों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैं। इस क्षेत्र में 2016, 2019 और 2021 में बाढ़ की त्रासदी से किसान बेदम हो चुके हैं। इस साल भी नदरीलपुर, हसनपुरा, वीरउपुर, नसीरपुर में गंगा का पानी खेतों में भर गया। जिससे किसानों के खेती में लगाए गए हजारों और लाखों रुपये पानी में बह गए। इस क्षेत्र के किसान हर साल बाढ़ से सबसे अधिक जूझते हैं। बावजूद इसके भगवान पर भरोसा कर सैकड़ों बीघा सब्जी, केला, मिर्च और टमाटर की खेती करते हैं। जिस बरस भी गंगा उफान पर होती हैं उनकी कमर तोड़ देती हैं। ऐसे में क्षेत्र के किसानों को संकट से उबारने में शासन-प्रशासन का प्रयास भी ना के बराबर है।
नगदिलपुर के विजय कुमार तिवारी का कहना है कि पिछले साल भी हमने परवल की खेती की थी। लेकिन बाढ़ में सब डूब गया था। इस बार भी हमने दो बीघा परवल की खेती की था और पूरा खेत डूब गया है। अभी तक पिछले साल का भी मुआवजा नहीं मिला। इसी गांव के विपिन यादव का कहना है कि हर साल पेशगी पर लेकर खेती करते हैं। पिछले साल भी हमने 20 बीघा खेत पेशगी पर किया था। लेकिन बाढ़ ने बर्बाद कर दिया। इस बार भी हमने पांच बीघा परवल की खेती किया था। जो पानी में डूब गया है। अब परिवार के लोग एकदम टूट चूके है।
हसनपुरा के रामप्रवेश का कहना है कि बाढ़ से काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बार हमने दो बीघा परवल बोया था, जो डूब गया है। अभी मिर्चा और टमाटर बोने की तैयारी में थे लेकिन पानी आ जाने की वजह से अब खेती में लेट हो जाएगा। वहीं हसनपुरा के ही राजेश यादव का ने बताया कि बाढ़ आ जाने की वजह से सबसे अधिक समस्या पशुओं को लेकर हो रही है। हम लोगों ने खेत में चारा बोया था लेकिन वह भी डूब गया। अब हम खेत में टमाटर बोने की तैयारी में थे, लेकिन पानी आ जाने की वजह से अब दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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दो सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घट रही गंगा, बाढ़ का खतरा टला
गाजीपुर। गंगा के जलस्तर में सोमवार को दो सेमी प्रतिघंटा की रफ्तार से घटाव दर्ज किया गया। शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 62.590 मीटर रहा। जो गंगा के चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर से करीब एक मीटर ऊपर है। दिन भर गंगा के जलस्तर में घटाव होने से तटवर्ती इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है। जनपद में अब बाढ़ का खतरा टलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वहीं, सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 62.670 मीटर, दोपहर 12 बजे तक 62.670 मीटर, दो बजे तक 62.630 मीटर और शाम चार बजे 62.590 मीटर दर्ज किया गया।
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नगदिलपुर के विजय कुमार तिवारी का कहना है कि पिछले साल भी हमने परवल की खेती की थी। लेकिन बाढ़ में सब डूब गया था। इस बार भी हमने दो बीघा परवल की खेती की था और पूरा खेत डूब गया है। अभी तक पिछले साल का भी मुआवजा नहीं मिला। इसी गांव के विपिन यादव का कहना है कि हर साल पेशगी पर लेकर खेती करते हैं। पिछले साल भी हमने 20 बीघा खेत पेशगी पर किया था। लेकिन बाढ़ ने बर्बाद कर दिया। इस बार भी हमने पांच बीघा परवल की खेती किया था। जो पानी में डूब गया है। अब परिवार के लोग एकदम टूट चूके है।
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हसनपुरा के रामप्रवेश का कहना है कि बाढ़ से काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बार हमने दो बीघा परवल बोया था, जो डूब गया है। अभी मिर्चा और टमाटर बोने की तैयारी में थे लेकिन पानी आ जाने की वजह से अब खेती में लेट हो जाएगा। वहीं हसनपुरा के ही राजेश यादव का ने बताया कि बाढ़ आ जाने की वजह से सबसे अधिक समस्या पशुओं को लेकर हो रही है। हम लोगों ने खेत में चारा बोया था लेकिन वह भी डूब गया। अब हम खेत में टमाटर बोने की तैयारी में थे, लेकिन पानी आ जाने की वजह से अब दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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दो सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घट रही गंगा, बाढ़ का खतरा टला
गाजीपुर। गंगा के जलस्तर में सोमवार को दो सेमी प्रतिघंटा की रफ्तार से घटाव दर्ज किया गया। शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 62.590 मीटर रहा। जो गंगा के चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर से करीब एक मीटर ऊपर है। दिन भर गंगा के जलस्तर में घटाव होने से तटवर्ती इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है। जनपद में अब बाढ़ का खतरा टलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वहीं, सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 62.670 मीटर, दोपहर 12 बजे तक 62.670 मीटर, दो बजे तक 62.630 मीटर और शाम चार बजे 62.590 मीटर दर्ज किया गया।